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HDFC Bank ZIIEI: कहीं सांप सीढ़ी से सीख रहे मैथ्स, कहीं कॉमिक्स से समझ रहे Lesson

 Anurag Tiwari |  2016-06-01 14:05:33.0

HDFC, CSR, ZIIEI

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. प्राइवेट सेक्टर के बैंक एचडीएफसी ने अपने सीएसआर यूनिट के जरिए यूपी में एजुकेशन का तरीका बदलने का बीड़ा उठाया है। इससे न केवल सरकारी स्कूलों में एजुकेशन का लेवल सुधरेगा बल्कि दोयम दर्जे के माने जाने वाले सरकारी प्राइमरी स्कूलों की साख भी बढ़ेगी। एचडीएफसी साल यूपी में 2015 में यूपी में इन्वेस्टमेंट इनोवेशन इन एजुकेशन इनिशिएटिव यानि (ZIIEI) प्रोग्राम शुरू किया था।

तीन लाख आईडिया में से चुने जाएंगे टॉप 25

इस प्रोग्राम के तहत एचडीएफसी ने पुडुचेरी की अरबिंदो सोसाइटी के साथ मिलकर यूपी के 70 जिलों में 30000 हजार स्कूलों के टीचर्स से इनोवेटिव आईडिया मांगे हैं। अब तक उन्हें 2 लाख आईडिया मिले हैं एक लाख और मिलने की उम्मीद है। यह आईडिया 15 जुलाई तक भेजे जा सकते हैं। एचडीएफसी की सीएएसआर हेड नुसरत पठान ने बताया कि जो आईडिया मिलेंगे, उनमे से टॉप 25 आईडिया चुने जाएंगे और उन्हें न केवल प्रदेश में बल्कि देश के अन्य स्कूलों में भी लागू करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इससे न केवल एजुकेशन का लेवल बढेगा बल्कि एक जगह की बेस्ट प्रैक्टिस को देश के अन्य स्कूलों में भी रेप्लिकेट किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि अब तक 1000 एजुकेशनल ऑफिसर्स और 5 लाख टीचर्स को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। उन्होंने बता कि औसतन 5 महीनों में 6000 टीचर्स की हर दिन ट्रेनिंग हुई। इस दौरान विशेष रूप से तैयार की गई 8 लाख बुकलेट्स बांटी गई हैं।


250 अफसरों के लिए रेजिडेंशियल प्रोग्राम नैनीताल में सम्पन्न हुआ।

अरबिंदो सोसाइटी के प्रोग्राम डायरेक्टर संभ्रांत शर्मा ने बताया कि इस मुहीम के तहत यूपी पहला राज्य है, जिसमें यह प्रोग्राम शुरू हुआ है। यूपी गवर्नमेंट ने भी पहल करके इस प्रोग्राम को शुरू करने में मदद की। उन्होंने बताया कि हमारा प्रयास है कि टीचर और स्टूडेंट के बीच जो लर्निंग गैप को कम कैसे किया जाए।, क्योंकि अकसर ऐसा होता है कि टीचर्स पढ़ाते हैं और अधिकतर बच्चे समझ नहीं पाते। उन्होंने बताया कि इस ट्रेनिंग के बाद टीचर्स की सोच में बदलाव आया है, इस पहल से। इस ट्रेनिंग का सीधा प्रभाव सीधा बच्चों पर दिखेगा।

सांप सीढ़ी से पढ़ा रही हैं मैथ्स

कानपुर के यूपीएस स्कूल से आई मैथ्स टीचर मंजू ने बताया कि उन्होंने अपने यहाँ एक ऐसी पहल की है जिससे बच्चों को मैथ्स आसानी से समझ में आने लगा है। उन्होंने बताया कि उन्हें खेल खेल में पढ़े हुए लेसन आसानी से याद हो जाते हैं।  इसके लिए उन्होंने सांप सीढ़ी को ग्राउंड में बनवाया। 10 x10 का एक बड़ा सांप-सीढ़ी का बोर्ड जमीन पर बनवाया गया है। इसमें गोट की जगह बच्चे को खड़ा किया जाता है।  जैसे जैसे बच्चे पास एके अनुसार इस सांप सीढ़ी पर ऊपर या नीचे होते हैं उन्हें सम्न्बंधित मैथ्स का फोर्मुला बताया जता है कि कसी नम्बरों में अंतर आया है। मंजू का कहना है कि जब बच्चे खेल खेल में सीखते हैं तो उन्हें जल्दी याद होता है।

बच्चों को हिंदी के लेसन पढाये जा रहे हैं कॉमिक्स के रूप में

इसी तरह मुरादाबाद के के एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने वाली सोनिया चौहान ने बताया के हिंदी के कठिन पाठ बच्चों को कॉमिक्स के रूप में बदल कर पढ़ाया जाता है।  इससे बच्चे आसानी से कठिन से कठिन लेसन समझ में आ जाते हैं। उन्होंने बताया कि जल्दी ही वे हिस्ट्री और जियोग्राफी भी कॉमिक्स के रूप में पढ़ाएंगी।

 एमडीएम क्यारी में बच्चे उगा रहे हैं पालक

कन्नौज के प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने वाले आशुतोष दूबे ने बताया कि एमडीएम में खाने के लिए मिलने वाले सोयाबीन फेंक देते थे। ऐसे में बच्चों को न्यूट्रिशन नहीं मिल पाटा था। ऐसे में उन्हें एक विचार आया और उन्होंने स्कूल के प्रांगण में क्यारी बनवाकर उसमे बच्चों से पलका की खेती करवाई। जब स्कूल में पलाक की सब्जी बनी तो उसे भी बच्चों ने खाने से माना कर दिया। इस पर उन्होंने बच्चों कोई याद दिलाया कि यह पालक उन्होंने ही उगाई थी तो बच्चों ने वह पालक चाव से खाई। धीरे-धीरे उन्होंने बच्चों को सोयाबीन भी खाने के लिए राजी कर लिया।

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