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16 साल का उपवास तोड़ेंगी इरोम शर्मिला, चुनाव लड़ने की तैयारी

 Abhishek Tripathi |  2016-08-09 04:03:53.0

irom_sharmilaइंफाल. मणिपुर की 'लौह महिला' इरोम चानू शर्मिला मंगलवार को अपना 16 साल से जारी उपवास तोड़ेंगी। अधिकारों के लिए होने वाले आंदोलनों का चेहरा बन चुकी 44 वर्षीय शर्मिला आज स्थानीय अदालत में अपना उपवास खत्म करेंगी। आज उन्हें न्यायिक मेजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा। जब वे उपवास तोड़ लेंगी तो उन्हें न्यायिक हिरासत से रिहा कर दिया जाएगा।


सैन्य बल विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) को खत्म करने की मांग को लेकर 16 साल पहले उन्होंने उपवास शुरू किया था। शर्मिला को जीवित रखने के लिए कैदखाने में तब्दील हो चुके अस्पताल में उन्हें साल 2000 से ही नाक में ट्यूब के जरिए जबरन खाना दिया जा रहा था।


गौरतलब है कि उन्होंने पिछले महीने उपवास तोड़ने की घोषणा की थी और कहा था कि वह चुनाव लड़ेंगी। इस नई शुरूआत के समय शर्मिला कुनबा लूप के बैनर तले काम करने वाले बड़ी संख्या में उनके समर्थक और महिला कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे लेकिन उनकी 84 वर्षीय मां शाखी देवी यहां नहीं होंगी।


शर्मिला के भाई इरोम सिंहजीत के मुताबिक मां शर्मिला से मुलाकात करने वहां नहीं जाएंगी। वे उनकी जीत का इंतजार कर रही हैं और यह मौका तभी आएगा जब अफस्पा को हटा लिया जाएगा। सिंहजीत भी आज अदालत परिसर में मौजूद रहेंगे। शर्मिला के परिजन और समर्थक उनसे 26 जुलाई के बाद से मिल नहीं पाए हैं। इसी दिन उन्होंने उपवास का अंत करने और अफस्पा को हटाने की लड़ाई राजनीति में आकर लड़ने के अपने निर्णय की घोषणा की थी।


शर्मिला ने 16 साल बिना खाए क्यों बिताए?
इरोम शर्मिला के अनशन की वजह बना मणिपुर में लागू आर्म्स फोर्स स्पेशल पावर एक्ट। वो इसी एक्ट को हटाने के लिए पिछले 16 साल से अनशन कर रही थीं। उनके मुताबिक इसकी आड़ में सैन्य बल आम आदमी के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।

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