Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

बलिया की बेटी ने लगाई छलांग, IPS के बाद अब IAS

 Tahlka News |  2016-05-10 17:32:52.0

a1तहलका न्यूज ब्यूरो
झांसी. एसपी सिटी के रूप में तैनात आईपीएस गरिमा सिंह के जीवन का सपना मंगलवार को पूरा हो गया। अपनी चाहत के अनुरूप उनका चयन आईएएस में हो गया। उनकी सामान्य की 91 सीट्स में 55 रैंक है। वह बताती हैं कि यह सब उनके पेरेंट्स की दुआओं और एक आईपीएस की ड्यूटी से मिले वक्त में की गई तैयारी से ही संभव हो सका है। आईएएस का रिजल्ट आने के बाद वह इतनी खुश थीं, कि उनकी भूख तक गायब हो गई। मोबाइल फोन पर चारों तरफ से बधाइयों का सिलसिला जब शुरू हुआ, तब भी वह अपनी आईपीएस की ड्यूटी पर थीं। वह कई मामलों के खुलासे के दौरान पत्रकारों के बीच में ही थी।


a2

स्कैचिंग व कविता का है शौक
आईपीएस से आईएएस बनीं गरिमा को स्कैचिंग करना बहुत अच्छा लगता है। वह कहती हैं कि किसी का भी स्कैच वह फटाफट तैयार कर देती हैं। जब कभी भी ड्यूटी की बेहद व्यस्त जिंदगी में थोड़ा सा भी वक्त मिलता है, तो वह या तो स्कैचिंग करती हैं या फिर नोबेल पढ़ती हैं। जब अनुकूल और शांत माहौल मिलता है तो उनका मन कविता लिखने को भी करता है। उन्होंने अनेक कविताएं भी लिखी हैं।


a3

दिल्ली यूनिवर्सिटी से की है पढ़ाई
आईपीएस से आईएएस बनीं गरिमा सिंह ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफन कालेज से बीए और एमए की पढ़ाई की है। उनका अपना मन तो एमबीबीएस करके डाक्टर बनने का था, लेकिन पापा उन्हें सिविल सर्विसेज में देखना चाहते थे। इंजीनियर पिता ओमकार नाथ सिंह की बेटी गरिमा ने अपने पापा की भावना का ख्याल करते हुए सिविल सिर्विसेज की तैयारी की। परीक्षा दी, तो पहली ही बार में आईपीएस में सिलेक्शन हो गया। वह 2012 बैच की आईपीएस हैं। पुलिस की जिम्मेदारी वाली ड्यूटी ने उन्हें जॉब सेटिसफेक्शन बहुत दिया है। एक आईपीएस की ड्यूटी निभाने के दौरान ही मिले समय में उन्होंने आईएएस की तैयारी की। करीब तीन साल की ड्यूटी के दौरान उन्होंने बहुत अच्छा महसूस किया। इसी बीच उन्होंने तैयारी जारी रखी। ड्यूटी से कभी कोई समझौता नहीं किया। जब भी जहां भी ड्यूटी पर लगाया गया, चाहे अतिक्रमण हटवाने की जिम्मेदारी हो या वीआईपी ड्यूटी की, गरिमा सिंह हर जगह नजर आईं। आज आईएएस का रिजल्ट आने पर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने इसके लिए अपने पेरेंट्स और ईश्वर का धन्यवाद किया।


a4

भुलाए नहीं भूलता वह वाकया
आईपीएस से आईएएस बनीं गरिमा सिंह को अपनी जिंदगी का वह वाकया भुलाए नहीं भूलता है। वह अपनी स्टूडेंट लाइफ को याद करते हुए बताती हैं कि वह एक रात मॉल से वापस हॉस्टल आ रही थीं। तभी चेकिंग के दौरान उनसे रात में घूमने का कारण पूछा गया। इसी के साथ 100 रुपये देकर जाने की बात कही गई। न देने पर घर वालों से शिकायत करने की बात कही गई।


हालांकि, बाद में उन्हें जाने दिया गया। एक समय उनसे पैसे मांगने वाली पुलिस आईपीएस बनने के बाद उन्हें सैल्यूट करती नजर आई। अब उनका सिलेक्शन आईएएस में हो गया है, तो अब वह नई जिम्मेदारी भरी पारी की तरफ देख रही हैं। लखनऊ में रहीं बतौर एएसपीसन् 2012 बैच की आईपीएस गरिमा सिंह दो साल तक लखनऊ में अंडर ट्रैनिंग एएसपी रहीं।


G1


पति हैं इंजीनियर
गरिमा की शादी इसी साल 25 जनवरी को हुई। उनके पति राहुल इंजीनियर हैं और इन दिनों नोएडा में उनकी जॉब है। उन्होंने आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री की है।


आईएएस गरिमा सिंह का परिचय
नाम-गरिमा सिंह, उम्र 29 वर्ष, पिता- ओमकार नाथ सिंह, मां- श्रीमती ममता। वे दो बहनें है। बड़ी बहन मुम्बई में जॉब करती है। उनका गांव उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में है। उनके माता पिता नोएडा में रहतेे हैं और पिता ओमकार नाथ गुड़गांव की एक कम्पनी में इंजीनियर हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवसिर्टी से बीए और एमए की शिक्षा ग्रहण की। उनके पति राहुल राय नोएडा में एक कम्पनी में इंजीनियर हैं।


G2


यह है आईपीएस से आईएएस का सफर
आईपीएस से आईएएस बनी गरिमा सिंह का कहना है कि उनके इस सपने को पूरा करने में सबसे अधिक सहयोग उनके माता-पिता, बड़ी बहन का रहा। उन्होंने शुरु से ही उनके सपने को पूरा करने के लिये उनका मनोबल बढ़ाया है। उनके पिता का सपना था कि वह अपनी बेटी को सिविल सर्विसेस में देखें। पिता जी के इस सपने को ध्यान में रखते हुये उन्होंने तैयारी की और प्रथम बार में ही आईपीएस में चयनित हो गयीं। जब वह आईपीएस में चयनित हुयीं तो उस समय उनकी खुशी का ठिकाना नही था। उन्होंने इस खुशी को अपने दोस्तों के बीच शेयर कर आनन्द किया। वे 2012 बैच की आईपीएस हैं।


G3
आईपीएस बनने पर उन्होंने अपनी जिम्मेदारी का पूरा निर्वाहन किया। उनके पास आने वाले फरियादियों की शिकायतों को उन्होंने गम्भीरता से सुनकर न्याय दिलाने का प्रयास किया। उनका सपना यहीं पर आकर खत्म नही हुआ। उनका सपना था कि वे आईएएस बनेे। इस सपने को पूरा करने के लिये डयूटी के बाद जो समय उन्हें आराम करने के लिये मिलता था उसमें वे पढ़ाई कर तैयारी करतीं थीं। आईएएस बनने में उन्हे पहली बार सफलता नहीं मिली। दूसरी बार फिर प्रयास किया और उन्होंने इस बार अपने सपने को पूरा कर लिया। उन्होंने सामान्य श्रेणी की 91 सीटों में 55 वें रैंक को हासिल किया है। जब उन्हे आईएएस में चयन होने की जानकारी हुयी तो पहले तो कुछ देर तक उन्हे यह एक सपना लगा। लेकिन यही हकीकत है।


पति का भी रहा सहयोग
आईपीएस से बनी आईएएस गरिमा सिंह का कहना है शादी के बाद उनके पति राहुल को जब उनके आईएएस के सपने की जानकारी हुयी तो उन्होंने भी उनका मनोबल बढ़ाया। पति के साथ-साथ सास-ससुर ने भी उन्हें इस तरक्की तक पहुंचने में साथ दिया।


G4


नही रहा खुशी ठिकाना
आज आईएएस में चयन होने पर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। उनके माता-पिता, सास-ससुर और पति भी फूले नही समां रहें हैं। वह अपने परिवार और दोस्तों को धन्यवाद देतीं है। कि इस मुकाम को हासिल करने पर उन्होंने समय-समय पर मार्ग दर्शन और मनोबल व उत्साह बढ़ाया।


लगन और इच्छा शक्ति से कोई भी मंजिल की जा सकती है हासिल
29 वर्षीय गरिमा सिंह का कहना है कि वह नही मानती हैं कि इस मुकाम पर पहुंचने के लिए 15 से 16 घंटे की पढ़ाई की जरुरत होती है। कम समय भी इसकी तैयारी की जा सकती है बस जरुरत है तो लगन और इच्छा शक्ति की। यदि दिल में सपना पूरा करने की तमन्ना हों तो फिर कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है। आईएएस की तैयारियों करने वालों से वे बस इतना ही कहना चाहती है कि उन्हें अपने अन्दर जज्बे को जगाना होगा और फिर देखिए कि मंजिल आपके कदम चूमेगी।


विकास और कमजोर लोगों की मदद करने का होगा सपना
आईपीएस से बनी आईएएस गरिमा सिंह का कहना है कि उनका बस एक ही सपना होगा कि जिस प्रकार उन्होंने अभी तक अपने पदों पर रहकर जिम्मेदारी को पूरा किया है उसी प्रकार आगे भी अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करेंगी। उनका पहला सपना होगा कि वे जिस क्षेत्र में भी रहें वहां विकासकारी कार्य करेंगी और कमजोर लोगों की मदद करेंगीं।

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top