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हम पर हमला हो सकता है : उमर खालिद

 Sabahat Vijeta |  2016-03-26 12:25:20.0

umar-khalidरुवा शाह 
नई दिल्ली, 26 मार्च| कथित तौर पर राष्ट्र विरोधी नारे लगाने के कारण देशद्रोह के आरोप में तीन सप्ताह से भी अधिक समय तिहाड़ जेल में बिताने के बाद जमानत पर रिहा जवाहर लाल नेहरू विश्वविाद्यालय के छात्र व कार्यकर्ता उमर खालिद ने कहा है कि उन्हें तथा उनके विश्वविद्यालय के दोस्तों को डर है कि उन पर कट्टरपंथी हिंदू समूहों द्वारा पूर्वनियोजित हमला हो सकता है।


आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में खालिद (28) ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा सशर्त जमानत दिए जाने के बाद वह लगातार 'डर' के साये में जी रहे हैं। विश्वविद्यालय परिसर के उसी लॉन में जहां फरवरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान खालिद पर कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाने का आरोप लगा था, बैठकर खालिद ने कहा, "खतरा बना हुआ है। मैं अभी मानता हूं कि मुझे मेरी आजादी नहीं मिली है। हम आजाद नहीं हैं। डर आज भी है। हमें डर है कि हम पर हमला हो सकता है, और हम यह भी जानते हैं कि यह हमला पूर्वनियोजित होगा।"


खालिद से जब यह पूछा गया कि उन पर तथा राष्ट्र विरोधी करार दिए गए विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के नेता कन्हैया कुमार सहित पांच अन्य छात्रों पर आखिरकार कौन हमला करेगा तो खालिद ने कहा, "आज हमारे देश में विडंबना यह है कि आजादी के बारे में बात करने को अपराध माना जाता है, जो हम पर शासन कर रहे हैं, हमें गुलाम बनाना चाहते हैं। वे हमारे विचारों और सोच पर रोक लगाना चाहते हैं लेकिन इन चीजों पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।"


खालिद ने कहा कि जेएनयू में कश्मीर को लेकर हुए कार्यक्रम को लेकर हुए विवाद के बाद साफ हो गया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) एक नई चाल चल रहा है, जो असल में 'नई बोतल में पुरानी शराब' की तरह है।


जन्म से मुसलमान, लेकिन विचारों से मार्क्सवादी खालिद ने कहा, "आरएसएस ने इससे पहले भी धर्म के नाम पर देश को तोड़ा है। एक समय यह हिंदू-मुसलमान मुद्दा था और अब यह राष्ट्रवादी बनाम 'राष्ट्रविरोधी' हो गया है।"


खालिद ने अगे कहा, "जो लोग आरएसएस की विचारधारा को नहीं मानते, वे आज 'राष्ट्रविरोधी' हैं।" खालिद ने कहा कि उसने कभी फासीवादी ताकतों द्वारा लागू किए गए राष्ट्रवाद की विचारधारा को आत्मसात नहीं किया।


खालिद ने कहा कि वह राष्ट्रवाद की विचारधारा को नहीं मानता, क्योंकि इसी के कारण दुनियाभर में विश्वयुद्ध हुए हैं और सरेआम नरसंहार हुए हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस ने जेएनयू छात्रों के साथ अलग बर्ताव किया है? खालिद ने कहा, "बीती सरकार ने उस हद तक कभी शिक्षण संस्थानों में हस्तक्षेप नहीं किया, जिस हद तक भारतीय जनता पार्टी की सरकार कर रही है।"


खालिद ने कहा, "यह आरएसएस और भाजपा की कार्यशैली में निहित है। वे शिक्षण संस्थानों का भगवाकरण करना चाहते हैं और देश के इतिहास को दोबारा लिखना चाहते हैं। भाजपा और कांग्रेस की सरकारों में यही अंतर है।"


कश्मीर मुद्दे पर खालिद ने कहा, "कश्मीर एक अहम मुद्दा है और इसका समाधान निकलना चाहिए, क्या ऐसा कहना देशद्रोह है?" खालिद ने यह भी कहा कि न तो भारत और न ही पाकिस्तान की सरकार कश्मीर मुद्दे को मानवीय दृष्टिकोण से देख रही है। कश्मीर सम्बंधी उनकी सोच और उससे सम्बंधित क्रिया में कश्मीर के लोग कहीं नहीं हैं।

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