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चुनाव से पहले विजिलेंस के चक्रव्यूह में फंसे मायावती के येे धुरंधर

 Girish |  2017-01-07 08:34:49.0



तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
लखनऊ:
उत्‍तर प्रदेेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बसपा सुप्रीमो मायावती को तगड़ा झटका लगा है। आचार संहिता लागू होते ही सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने बीएसपी के पूर्व मंत्रियों, विधायकों और मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। स्मारक घोटाले के तहत विजिलेंस आठ मामलों की जांच कर रही है। इसमें से दो मामलों में विजिलेंस चार्जशीट दाखिल करने जा रही है। इन मामलों में बीएसपी के दो पूर्व मंत्रियों- नसीमुद‌्दीन सिद‌्दीकी और बाबू सिंह कुशवाहा समेत 19 लोग आरोपित हैं। छह अन्य आरोपों की जांच भी अंतिम दौर में है।

बता दें कि 1 जनवरी 2014 को गोमतीनगर थाने में लोकायुक्‍त की रिपोर्ट पर विजिलेंस ने एफआईआर ने करवाई थी। धारा 409, 120 बी, 13 (1) डी और 13 (2) भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ था।


पहला मामला- नियम विरुद्ध कंर्सोटियम (पट्टाधारकों के समूह बनाकर पत्थरों की सप्लाई) बनाने के इस मामले में विजिलेंस को साक्ष्य मिले हैं कि आठ जुलाई 2008 को हुई बैठक में यूपी उप खनिज (परिहार) नियमावली 1963 का उल्लंघन हुआ। बैठक में दिए गए सुझावों को नजरअंदाज कर कंर्सोटियम बनाए गए और उनसे पत्थरों की आपूर्ति का अनुबंध किया गया।

दूसरा मामला- विजिलेंस को साक्ष्य मिले हैं कि 18 जुलाई 2007 को पत्थरों की खरीद के लिए बनी संयुक्त क्रय समिति की बैठक में नियमों को दरकिनार किया गया। बिना टेंडर बाजार से ऊंचे रेट पर मिर्जापुर सैंड स्टोन के ब्लाक खरीदने व सप्लाई के लिए मनमाने रेट तय किए गए। आरोपितों ने निजी लाभ के लिए मनमाने ढंग से दरें तय कर करोड़ों का वारा-न्यारा किया। दाम ज्यादा दिखाने के लिए पत्थरों की खरीद कहीं से हुई, कटान कहीं हुई और सप्लाई कहीं और से की गई। रॉयल्टी व ट्रेड टैक्स से अधिक रेट पर पेमेंट का फैसला हुआ। 28 फरवरी 2009 की बैठक में चुनार पत्थर की आपूर्ति के लिए मनमाने ढंग से रेट निर्धारित किए गए।

स्मारक घोटाला
1410 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिंद्दीकी, बाबू सिंह कुशवाहा, राजकीय निर्माण निगम के तत्कालीन एमडी सीपी सिंह, खनन के तत्कालीन संयुक्त निदेशक सोहेल अहमद फारुकी, तत्कालीन अपर परियोजना प्रबंधक राकेश चंद्रा, निर्माण निगम के इंजीनियर अडिशनल प्रॉजेक्ट मैनेजर एसके सक्सेना, यूनिट इंचार्ज केआर सिंह, एई राजीव गर्ग, प्रोजेक्ट मैनेजर एसपी गुप्ता, एसके अग्रवाल, पीके जैन, आरके सिंह, बीडी त्रिपाठी, मुकेश कुमार, हीरालाल, एसके चंदेल, एसपी सिंह, मुरली मनोहर और एसके शुक्ला आरोपित हैं।

रामअचल राजभर: आय से अधिक संपत्ति में दोषी
बीएसपी के प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर भी आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस की जांच में दोषी पाए गए हैं। विजिलेंस इनके खिलाफ भी शासन को एफआईआर की संस्तुति भेज रहा है। विजिलेंस के सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह सामने आया है कि राम अचल राजभर की वर्ष 2007 से 2012 के बीच कुल आय करीब 34 लाख रुपये है। जबकि खर्च चार करोड़ रुपये है। यह आय से 812 प्रतिशत अधिक है।

पूर्व एमएलए आय से अधिक संपत्ति में दोषी
विजिलेंस की एक अन्य जांच में बीएसपी के पूर्व विधायक केके सचान आय से अधिक संपत्ति रखने के दोषी पाए गए हैं। विजिलेंस ने उनके खिलाफ इस मामले में एफआईआर करवाने के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी है। विजिलेंस की जांच के अनुसार, वर्ष 2007 से 2011 के बीच सचान की कुल आय करीब 66 लाख रुपये है जबकि खर्च डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा है। यह उनकी आय से 97 प्रतिशत अधिक है।

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