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कैराना का सच जानने गई भाजपा की टीम ने उठाये सवाल

 Sabahat Vijeta |  2016-06-17 14:06:53.0

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लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी के सांसदों और विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कैराना की एक धर्मशाला में 200 परिवारों से मुलाक़ात कर कैराना की असलियत को समझने की कोशिश की. इस प्रतिनिधिमंडल ने अपनी रिपोर्ट में यह माना है कि एक दिन में हालात की तह तक नहीं जाया जा सकता. प्रतिनिधिमंडल ने कुछ सवाल उठाये हैं जिनके जवाब मिलने पर तस्वीर स्पष्ट हो सकती है.


भाजपा जानना चाहती है कि कैराना में कोई पेट्रोल पम्प क्यों नहीं है? बीते चार वर्षों में कितने हिन्दू अपनी सम्पत्तियां बेचकर कैराना से चले गए और उन सम्पत्तियों को किसने खरीदा? पिछले चार वर्षों में कितने गैस कनेक्शन दूसरी जगहों पर ट्रांसफर हुए? कितने बच्चों ने मिड टर्म में पढ़ाई छोड़ दी? कैराना में किस वर्ग को कितने शस्त्र लाइसेंस जारी हुए? पिछले चार सालों में कितने लोगों को एनएसए में निरुद्ध किया गया? कितने लोगों के खिलाफ गुंडा एक्ट और गैंगस्टर के तहत कार्यवाही की गई? और कितने व्यक्तियों को गुंडा एक्ट में जिला बदर किया गया? इन सवालों के जवाब के लिए भाजपा चाहती है कि कैराना काण्ड की सीबीआई जांच कराई जाए.


15 जून को कैराना का सच जानने के लिए भाजपा विधानमंडल दल के नेता सुरेश खन्ना के नेतृत्व में गई भाजपा की टीम ने आज अपनी रिपोर्ट पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को सौंप दी. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कैराना का सच जानने के लिए सवाल बहुत हैं लेकिन इन सवालों का जवाब एक दिन में हासिल नहीं किया जा सकता.


इस टीम में शामिल भाजपा सांसद सतपाल सिंह, राघव लखन पाल, भोला सिंह, सतीश गौतम और धर्मेन्द्र कश्यप, विधायक राधा मोहन अग्रवाल और पूर्व डीजीपी बृजलाल ने कैराना से पलायन कर चुके लोगों के परिवारजनों से सम्पर्क साधा और हकीकत जानने की कोशिश की.


यह प्रतिनिधिमंडल वर्ष 2014 में रंगदारी न देने की वजह से मारे गए लोहा व्यापारी शंकर, जनरल मर्चेंट विनोद सिंघल और राजेन्द्र के परिवार के लोगों से मिला. शंकर और राजेन्द्र की हत्या के बाद उनका पूरा कारोबार खत्म हो गया. इन तीनों परिवारों का कहना है कि रंगदारी न देने की वजह से उनकी हत्या मुकीम काला और फुरकान गैंग ने कराई. हत्या के बाद तीनों के घर राज्यमंत्री चितंजन स्वरुप गए थे. परिवार के एक सदस्य को नौकरी और मुआवज़े का एलान किया था लेकिन न मुआवजा मिला और न ही नौकरी.


प्रतिनिधिमंडल ने बताया की दरबार खुर्द मोहल्ले में रहने वाले सोमपाल को कैराना में रहने के लिए 10 लाख रुपये रंगदारी देनी पड़ी है. रामपाल, सुभाष और अतर सिंह को झूठे केस में फंसा दिया गया है. परेशान होकर यह लोग कैराना से पलायन कर गए. कई मोहल्लों के लोगों ने बताया कि कैराना में रहना है तो मुंह बंद करके रहना पड़ेगा. कैराना के लोग इतने भयभीत हैं कि उन्होंने लड़कियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है. धार्निक आयोजनों में लाउड स्पीकर पर रोक लग गई है.


प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कैराना के सबसे धनी परिवार जिनके 4 सिनेमाघर थे. पंसारी की दूकान चलाने वाले व्यापारी जिनकी एक लाख रुपये रोज़ की सेल थी. वह रंगदारी से परेशान होकर कैराना छोड़कर चले गए. कैराना के बहुत से लोग अपना घर छोड़कर उत्तराखंड चले गए. मुकीम लाला और फुरकान गैंग जेल के भीतर से ही रंगदारी वसूलने का काम कर रहे हैं.


प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि सरकार ने मदद बांटने में भेदभाव किया है. कुरैशी परिवार के सदस्य की मौत हुई तो उसके परिवार को मुआवजा मिला लेकिन हिन्दू परिवारों को मुआवजा नहीं दिया गया.


प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को लिखा है कि एक दिन में कैराना में सभी जगह जा पाना संभव नहीं था इसलिए एक धर्मशाला में 200 परिवारों से मुलाक़ात कर हालात का जायजा लिया गया.

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