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EXCLUSIVE: मिशन-2017 का गणित बिगाड़ सकते हैं कल्बे जवाद और ओवैसी

 Sabahat Vijeta |  2016-04-13 13:09:01.0

kj-modi-1शबाहत हुसैन विजेता


लखनऊ, 13 अप्रैल. मिशन-2017 को लेकर यूपी में सियासी सरगर्मियां लगातार बढ़ती जा रही हैं. समाजवादी पार्टी को लगता है कि अपने काम के बल पर वह वापस सरकार बनाने जा रही है. बहुजन समाज पार्टी को लगता है कि यूपी में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज़ नहीं बची है इसलिए इस बार उसके अलावा जनता के पास कोई विकल्प नहीं है. भारतीय जनता पार्टी ने यूपी पर कब्जे का ज़िम्मा अपने नए कमान्डर केशव मौर्या को दे दिया है जो बगैर राम मंदिर के नाम का इस्तेमाल किये ही यूपी में 400 सीटें जीतने वाले हैं. कांग्रेस ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए चुनाव जिताने में माहिर माने जाने वाले प्रशांत किशोर को ठेका दे दिया है.


ovaisi-javadचुनाव है तो ज़ाहिर है कि तैयारियां सबकी हैं. होनी भी चाहिए. सब अपने-अपने वोटर तौलने में लगे हैं. अब तो भाजपा ने समझ लिया है कि दलित वोट के बगैर उनका भला होने वाला नहीं है. इसी वजह से भाजपा भी अम्बेडकरमय हो गई है. सपा यादव-मुस्लिम गठजोड़ में दलित का गणित फिट करने में लगी है. बसपा जानती है कि दलित उसे छोड़ेगा नहीं और कांग्रेस जानती है कि चुनाव तक अगर पार्टी अपने पाँव पर खड़ी हो गई तो उसके छिटक कर बसपा में गया दलित वोट उसी के पास लौटेगा.


kj-modi-3यूपी चुनाव में इस बार दो फैक्टर और भी हैं जो यह तय करेंगे कि ऊँट किस करवट बैठे. यह फैक्टर हैं शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद और एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी. कल्बे जवाद वक्फ़ मुद्दे पर अखिलेश सरकार से खफा हैं. वक्फ आन्दोलन शुरू करते वक़्त छोटे इमामबाड़े में मौलाना कल्बे जवाद ने एलान किया था कि 2017 में सपा की नहीं ओवैसी की हिमायत करेंगे. पिछले महीने ओवैसी लखनऊ आये तो कल्बे जवाद से मिलने उनके घर भी गए.


kj-nasimuddinयूपी की सियासत में ओवैसी नए हैं लेकिन उनकी छवि हीरो वाली है. वह भले जीत न पायें लेकिन हराने का दम तो रखते ही हैं. कल्बे जवाद उनके साथ खड़े हो गए तो तस्वीर बदल भी सकती है. मौलाना कल्बे जवाद को हलके में तौलने की गलती नहीं की जानी चाहिए क्योंकि यह वही कल्बे जवाद हैं जिन्होंने 2014 के इलेक्शन में कांग्रेस को हराने का नारा लगाते हुए राजनाथ सिंह का समर्थन कर दिया था. दिल्ली में वक्फ सम्पत्ति को बचाने के लिए वह यूपीए सरकार के पास कई बार गए थे लेकिन वहां से मदद न मिलने पर उन्होंने देश भर में कांग्रेस को हराने के लिए यात्राएं की थीं. सही है कि 2014 में मोदी का जादू चला था लेकिन उस जादू में कल्बे जवाद का भी योगदान शामिल था.


यूपी सरकार ने कल्बे जवाद को इग्नोर करने का सिलसिला जारी रखा है लेकिन दूसरी पार्टियाँ उनके दरवाज़े के चक्कर लगाने लगी हैं. ओवैसी उनसे मिलने आ चुके हैं. राजनाथ सिंह फोन पर उनकी खैरियत पूछते रहते हैं. कल बसपा के बड़े नेता नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी और कोआर्डीनेटर इंतज़ार आब्दी बाबी उनसे मुलाक़ात करने गए थे. नसीमुद्दीन ने मौलाना कल्बे जवाद से कहा है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो हर मसले पर संजीदगी से सोचेगी और समस्याओं को हल करायेगी. आज दिल्ली में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी और मौलाना कल्बे जवाद की लम्बी मीटिंग हुई.


यह ताज़ातरीन बैठकें मिशन 2017 में क्या गुल खिलायेगी. इसका सही जवाब तो 2017 में ही मिलेगा लेकिन जो कयास लग रहे हैं. और उन कयासों के पीछे जो तथ्य हैं वह किसी को हंसाने के लिए और किसी को रुलाने के लिए काफी हैं.

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