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मुलायम-अखिलेश का झगड़ा खत्म करना चाहते हैं कल्याण सिंह

 shabahat |  2017-01-06 17:43:24.0



तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. समाजवादी पार्टी में मुलायम-अखिलेश के बीच छिड़ा संग्राम अब सिर्फ एक पार्टी के अंदर का मामला भर नहीं रह गया है. वास्तव में इस संग्राम का परिणाम ही सूबे के बाकी सियासी दलों खासकर कांग्रेस और भाजपा का चुनावी दांव टिका हुआ है. कांग्रेस और भाजपा इसी कारण अपने विधानसभा प्रत्याशियों के नाम घोषित नहीं कर रहे हैं. भाजपा नेता इस विवाद से खुद को अलग बताते हुये इसकी आलोचना करते हैं तो भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह इस झगड़े के जल्द सुलझ जाने की उम्मीद कर रहे हैं. अपने जन्मदिन पर लखनऊ आये यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने कहा कि पिता-पुत्र में झगड़ा ठीक बात नहीं है. उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की कि यह झगड़ा जल्द सुलझ जायेगा.


कल्याण सिंह की बातचीत में उनके मन में मुलायम के प्रति प्रेम नज़र आया. दरअसल जब कल्याण सिंह का बुरा वक्त था तब मुलायम ने उनका साथ दिया था. उत्तर प्रदेश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ऐसे सर्वमान्य चेहरे की तलाश कर रही है जो अखिलेश यादव का मजबूती से मुकाबला कर सके. कल्याण सिंह इस तलाश में बिलकुल फिट नज़र आते हैं. ऐसे में कल्याण सिंह का मुलायम सिंह यादव के प्रति प्रेम नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह से कल्याण सिंह की तारीफ की थी उससे भाजपा के बड़े नेता सतर्क हो गये हैं.

इस चुनाव में भाजपा चाहती है कि उत्तर प्रदेश की जनता मुलायम की मुस्लिम क़रीबी होने की छवि और अखिलेश के खराब शासन को ध्यान में रखकर भाजपा के पक्ष में वोट करे. ऐसा हुआ तो मुस्लिम वोट बसपा और कांग्रेस में बंट सकता है. वैसे भाजपा को मायावती के दलित-मुस्लिम गठजोड़ से भी खतरा दिख रहा है, लेकिन मुलायम और अखिलेश का झगड़ा निबट जाये तो मुसलमान वोट जो बसपा और कांग्रेस की तरफ ट्रांसफर हो रहा है वह मुलायम की तरफ जाएगा और इसका भाजपा को सीधे तौर पर फायदा मिल सकता है. क्योंकि तब सत्ता की सीधी लड़ाई सपा-भाजपा के बीच हो जायेगी.

समाजवादी पार्टी कमज़ोर होगी तो कांग्रेस से गठजोड़ करेगी जिसका भाजपा को नुकसान होगा. भाजपा चाहती है कि अगर दोनों में गठजोड़ हो भी तो समाजवादी पार्टी कांग्रेस को कम सीटें दे और उसे मज़बूत नहीं होने दे. भाजपा का ध्यान विधानसभा के साथ-साथ 2019 के लोकसभा चुनाव पर भी है. यहाँ कांग्रेस मज़बूत हुई तो उसका असर लोकसभा चुनाव पर भी पड़ेगा. भाजपा के लिए विधानसभा चुनाव की उतनी अहमियत नहीं है. उसका ध्यान उत्तर प्रदेश पर सिर्फ इसलिए है क्योंकि वह लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र यूपी में कांग्रेस को मज़बूत होते हुए नहीं देखना चाहती है.

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