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बढती स्वीकार्यता के साथ पब्लिक कनेक्ट मजबूत कर रहे हैं केशव मौर्या

 Tahlka News |  2016-12-03 11:44:18.0

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उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. मिशन 2017 के लिए भाजपा ने जब प्रदेश की राजनीति में लगभग अनजान से सांसद केशव प्रसाद मौर्या को इस युद्ध के लिए अपना सेनापति बनाते हुए प्रदेश अध्यक्ष बनाया था तब पार्टी के भीतर और बाहर भी दबे जुबान से इसे एक कमजोर फैसला बताया गया था. मगर हालिया दिनों में केशव प्रसाद मौर्या ने अपनी कार्यशैली और मेहनत से विरोधियों की इस धारणा को पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया है.

भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुके यूपी विधान सभा के आगामी चुनावो में केशव मौर्या ने अपना लक्ष्य तय करते हुए जब 265+ का नारा दिया था तब भी उसे केशव मौर्या का बडबोलापन बताया गया था , मगर तब गुटबंदी के आरोपों से जूझ रही यूपी भाजपा को केशव ने न सिर्फ बाहर निकला बल्कि कार्यकर्ताओं से अपने सीधे कनेक्ट से अपने नारे के प्रति विश्वाश भी भर दिया.


फिलहाल केशव मौर्या पार्टी की परिवर्तन यात्रा, पिछड़ा वर्ग सम्मलेन के साथ साथ संगठनात्मक मजबूती में भी जुटे हैं. इसके साथ ही उनकी निगाह हर सीट के गणित को समझने और सही प्रत्याशी के चयन पर भी लगी है. अपनी पार्टी छोड़ कर भाजपा में आने की उत्कंठा दिखाने वाले विधायको और नेताओं के प्रति न तो वे बहुत उत्साहित है नहीं बहुत खिलाफ. बहुत साफगोई से वे यह बात भी मान लेते हैं कि ऐसे नेताओं ने पार्टी के प्रति एक सहज माहौल बनाने में मदद की है और कई सीटो पर जीत की संभावनाए भी बढाई है. मगर पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं के प्रति अपनी निष्ठा और विश्वास दिखाना वे नहीं भूलते.

भाजपा की महत्वाकांक्षी परिवर्तन यात्रा और पिछड़ा वर्ग सम्मलेन के लिए केशव मौर्या लगभग 600 से 1 हजार किलोमीटर की दूरी रोज तय कर रहे हैं. सुबह अखबारों और अपने मीडिया प्रकोष्ठ का फीडबैक लेने के बाद वे एअरपोर्ट के लिए निकल जाते हैं जहा उनका MD500 हेलीकाप्टर उनका इन्तजार कर रहा होता है. उनके हर दौरे में पार्टी के किसी जिम्मेदार व्यक्ति के साथ मीडिया का भी कोई प्रतिनिधि हो उसकी जिम्मेदारी पार्टी के मीडिया प्रभारी हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने सम्हाली है. हेलीकाप्टर के भीतर ही केशव मौर्य न सिर्फ उस क्षेत्र की ऐतिहासिक और राजनितिक मुद्दों को समझते हैं बल्कि अपने भाषण के मुद्दों को भी एक बार फिर से तय कर लेते हैं.

keshav-chकेशव मौर्या ने खुद की संवाद शैली को भी बहुत बेहतर किया है. अध्यक्ष पद सम्हालने के तुरंत बाद की उनकी प्रेस कांफ्रेंस और अब मंच से भाषण देते केशव के बीच बहुत फर्क आ गया है. उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और संवाद शैली और भी पैनी और प्रभावी हुयी है.

कभी 265+ का नारा देने वाले केशव मौर्या अब इस आंकड़े को 300 तक ले जाने की बात करते हैं. उनके पास तर्क भी है. केशव कहते हैं – लोकसभा चुनावो में हमें 73 सीटे मिली थी और इन 73 सीटों में 337 विधान सभा सीटो पर पार्टी पहले नंबर पर थी. तब से अब तक मोदी जी के कामो ने जनता में बड़ा विश्वास पैदा किया है, इसलिए यह नहीं मानने का कोई कारण नहीं है कि हमें 300 से ज्यादा सीटे मिलने वाली हैं.


पिछड़ा वर्ग सम्मलेन में भाग लेने आजमगढ़ के अतरौलिया पहुचे केशव मौर्या ने इलाके की नब्ज पकड़ ली . वहां का सम्मलेन राष्ट्रीय महान प्रजातंत्र पार्टी ने आयोजित किया था. इलाके के निषाद समाज पर इस पार्टी का बड़ा प्रभाव माना जा रहा है. वहां अपने भाषण में केशव मौर्या निषाद राज गुह का जिक्र करते बड़े ही सलीके से खुद का रिश्ता बता देते हैं. किशव मौर्या इस बात का जिक्र भी कर देते हैं कि निषाद राज की राजधानी उनके ही संसदीय क्षेत्र में आती है और वे वहां निषाद राज की एक बड़ी प्रतिमा लगवाने वाले हैं. निषाद समाज खुद को सहज ही उन्हें अपने साथ कनेक्ट कर लेता है.

राष्ट्रवाद और श्रीराम उनके हर भाषण में होता है. भारत माता की जय के साथ वे जय श्री राम का नारा भी लगते हैं उसके बाद प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के करिश्मे को भी सामने रख देते हैं. केशव भीड़ से कहते हैं –“ मोदी जी ने हमेशा गरीबो की चिंता की है क्युकी वे खुद गरीब के घर पैदा हुए हैं . उन्होंने भ्रष्टाचारियों को भी नोटबंदी के जरिये सबक सिखाया है और पकिस्तान के घर में घुस कर उसे मारा है और आतंकवादियों को कडा सन्देश दिया है.. इन भावनात्मक मुद्दों के आते ही भीड़ केशव मौर्या के साथ नारे लगाने लगती है.”

अपने औसतन 15 मिनट के भाषण में केशव मौर्या सूबे की समाजवादी सरकार पर हमलावर होना नहीं भूलते. वे जनता में सवाल उछालते हैं – “ केंद्र की सरकार ने गरीबो के लिए 12 लाख करोड़ रुपये भेजे , मगर वह लूट लिया गया. गरीबो के साथ छल किया जा रहा है, गुंडा राज कायम है. वे जनता से पूछते हैं – क्या किसानो को मुआवजा मिला ? क्या गरीबो को उनका हक़ मिला ? श्रोताओं का उत्साह बढ़ते ही वे कहते हैं - साईकिल को टुकडे टुकडे कर के सैफई भेज देना है.”

भाजपा के कमिटमेंट को वे बताते हुए कहते हैं- भाजपा चुनावी बिजली नहीं देती, अखिलेश चुनावो के लिए बिजली दे रहे हैं मगर भाजपा शासित राज्यों में हमेशा बिजली आती है. हम ठोस काम करते हैं.

अपने भाषण के जरिये जनता के बीच बहस उछाल कर केशव मौर्या अपने हेलीपैड की तरह बढ़ जाते हैं जहाँ उनका MD 500उन्हें अगले मुकाम तक ले जाने के लिए मुस्तैद है.
केशव मौर्या बखूबी जानते हैं कि इत्तेफाक से ही सही मगर सही मौके पर मिला अवसर उनके लिए भविष्य की अपर संभावनाए खोल रहा है. उनकी मेहनत यूपी में दशको बाद भाजपा को अगर सत्ता दिलाने में कामयाब हो जाती है तो निश्चित तौर पर वे शिवराज सिंह चौहान और रमण सिंह की कतार में आ जायेंगे.

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