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साइकिल किसकी- फैसला सुरक्षित, निगाहें अब चुनाव आयोग की ओर

 shabahat |  2017-01-13 12:14:56.0

साइकिल किसकी- फैसला सुरक्षित, निगाहें अब चुनाव आयोग की ओर



तहलका न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली. समाजवादी पार्टी का घमासान सुलझने की मियाद गुज़र गई है. चुनाव आयोग ने आज साढ़े पांच घंटे तक मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के गुट की बात सुनने के बाद यह फैसला सुरक्षित कर लिया है कि साइकिल का सिम्बल किसे दिया जाये.

समाजवादी पार्टी में पिछले कई महीने से वर्चस्व की जंग चल रही है. पहली जनवरी को प्रो. राम गोपाल यादव ने समाजवादी पार्टी का अधिवेशन बुलाकर उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री अखिलेश यादव को समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा था जिसे सर्व सम्मत से पारित किया गया था. प्रस्ताव में मुलायम सिंह यादव को समाजवादी पार्टी का सर्वोच्च नेता मानते हुए मार्गदर्शक बनाया गया था.

मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर तो स्वीकार किया लेकिन वह पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोड़ने को तैयार नहीं हुए. अखिलेश भी अगले तीन महीने तक राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं. उन्हें लगता है कि अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद मुलायम के पक्ष में छोड़ा तो चुनाव के दौर में उनसे बार-बार तरह-तरह के आदेशों पर हस्ताक्षर कराये जाते रहेंगे और इससे चुनाव प्रभावित होगा.

मुलायम सिंह यादव तीन महीने के लिए भी अध्यक्ष पद छोड़ने को तैयार नहीं हुए और चुनाव आयोग चले गये. चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से अपने-अपने सबूत सामने रखने को कहा. प्रो. राम गोपाल ने एक लाख से ज्यादा पेपरों में सबूत आयोग को सौंपे. मुलायम और अखिलेश के बीच हालांकि बात हुई लेकिन मसला हल नहीं हो सका. इसी बीच दोनों पक्षों ने साइकिल न मिलने की दशा में उन चुनाव चिन्हों पर भी मंथन किया जिन पर चुनाव लड़ा जा सकता है.

आज चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को साढ़े पांच घंटों तक सुना और साइकिल किसकी होगी इस पर फैसला सुरक्षित कर लिया. चुनाव आयोग का फैसला सामने आने के बाद ही यूपी चुनाव में समाजवादी पार्टी की स्थिति स्पष्ट हो पायेगी.

राजीव धवन (अखिलेश यादव के वकील) का बयान

आमतौर पर निर्वाचन आयोग यह फैसला नहीं लेता है की किस पार्टी के अध्यक्ष कौन हैं? आयोग के पास सवाल अध्यक्ष पद का नहीं बल्की पार्टी और चिह्न का है.

पार्टी संविधान से बड़ा बहुमत

हमारी पूरी बहस इसी पर निर्भर थी की बहुमत अखिलेश के साथ है, जिसका बहुमत उनकी पार्टी, पार्टी. संविधान पार्टी के निजी उपयोग के लिए है.

सोमवार तक फैसला सम्भव

उम्मीद है की अवकाश के दिन भी फैसला आ सकता है, लेकिन सोमवार तक तो फैसला तय है. क्योंकि मंगलवार से पहसे चरण की अधिसूचना जारी होनी है. हमें अपने पक्ष पर पूरा भरोसा है.


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