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नहीं बचा समुद्र-मंथन से निकला काशी का कल्पवृक्ष, टूटकर हुआ धराशाई

 Anurag Tiwari |  2017-02-19 06:44:00.0

नहीं बचा समुद्र-मंथन से निकला काशी का कल्पवृक्ष, टूटकर हुआ धराशाई

तहलका न्यूज ब्यूरो


वाराणसी.
धर्म नगरी काशी से एक बुरी खबर है, यहां सदियों से विराजमान समुद्र-मंथन में निकला कल्पवृक्ष टूट कर धराशाई हो गया. इस कल्पवृक्ष को कई वर्षों से बचाने की कवायद चल रही थी.

यह कल्प वृक्ष वाराणसी के कैंटोंमेंट स्थित भीष्मचंडी मंदिर के पास स्थित था. शुक्रवार को यह अचानक धराशाई हो गया.

भीष्मचंडी मंदिर के महंत मंगला प्रसाद चौबे के मुताबिक़ यह कल्पवृक्ष लगभग 500 साल पुराना था. उनके अनुसार यह समद्र मंथन के दौरान निकले कल्पवृक्ष का बीज गिरने से यहां पनपा था.



महंत मंगला प्रसाद ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक़ इस कल्पवृक्ष के नीचे बैठकर कोई भी जो भी मन्नत मांगता था, वह जरूर पूरी होती थी.
महंत मंगला प्रसाद के अनुसार पुराणों में जिक्र है कि समुद्र मंथन में 14 रत्नों में से कल्पवृक्ष भी एक था. जब कल्पवृक्ष निकला तो उस पर देवता और असुर दोनों ने दावा किया.

यह देखकर ऋषि मुनियों ने कल्पवृक्ष को पृथ्वी वासियों के कल्याण के लिए इसे पृथ्वी पर भेजने की मांग की. इस विवाद को बढ़ता देख भगवान विष्णुा ने हस्तक्षेप किया और कहा कल्पवृक्ष बैकुंठ धाम में ही रहेगा.


जब इस पर फल लगेंगे तो वृक्ष के बीज पृथ्वी पर गिरेंगे. इन्हीं बीजों के गिरने से पृथ्वी पर कई जगह कल्पवृक्ष पैदा हुए.

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