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ईवीएम पर उठे संदेह को दूर करेगी यह मशीन

 Avinash |  2017-03-17 15:04:37.0

ईवीएम पर उठे संदेह को दूर करेगी यह मशीन

तहलका न्यूज़ ब्यूरो
लखनऊ. देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं और चुनाव के नतीजे भी आ चुके हैं. जिन पांच राज्यों चुनाव हुए उनमें से चार राज्यों गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार बना रही हैं, बाकी बचे एक राज्य में कांग्रेस ने बीजेपी को सत्ता से बेदखल करके अपना परचम लहराया है. 2014 से शुरू हुई मोदी लहर धीरे-धीरे सुनामी बनती जा रही है. उत्तर प्रदेश में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत के बाद विपक्ष घबराया और बौखलाया हुआ है.

कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों के जहन में सिर्फ एक सवाल है कि आखिर मोदी के विजय रथ को कैसे रोका जाए ऐसे में विपक्षी दलों में आत्मचिंतन और मंथन जारी है, लेकिन यूपी की सियासत में हाशिए पर जा रही प्रदेश की सबसे मजबूत पार्टी बसपा की प्रुमुख मायावती ने बीजेपी से मिली करारी शिकस्त के बाद ईवीएम मशीन पर सवाल खड़े करके एक नए विवाद को शुरू कर दिया है. मायावती के समर्थन में सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से लेकर अरविंद केजरीवाल तक सभी विपक्षी आ गए हैं. हालाँकि केजरीवाल ने इससे पहले भी 2015 के दिल्ली चुनावों से ठीक पहले आरोप लगाए थे कि ईवीएम मशीनों के साथ छेड़-छाड़ की जा सकती है. पर वो 70 में से 67 सीटें जीत के आए और मामला दबा रह गया.

इतना ही नहीं खुद बीजेपी की ओर से भी ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाया जा चुका है लेकिन उस समय बीजेपी हारी थी तो उसने अपनी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ा था अब दूसरे हारे हैं, तो भी यही आरोप लग रहे हैं. दरअसल इसकी मुख्य वजह वजह ये है कि आज हमारे समाज में ईमानदार और सच्चे नेताओं का अकाल है, ज्यादातर नेता और दल लोगों को ऊल जुलूल बातों में बरगला कर सियासी फायदा उठाना चाहते हैं. ईवीएम विवाद भी विपक्षी दलों के लिए अपनी खामियों को छुपाने का एक ऐसा ही मुद्दा है.

हालाँकि ईवीएम से छेड़छाड़ की गई और क्या ईवीएम को हैक किया जा सकता है इसे जानने के लिए हम आपको कुछ जानकारी देने का प्रयास कर रहें हैं, जिसके बाद आप भी यही कहेंगे कि ईवीएम में नहीं कमी हमारे नेताओं में है.

एक्सपर्ट की राय

ईवीएम मशीन से छेड़छाड़ के बारे में एक साइबर एक्सपर्ट से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि ईवीएम मशीन इंटरनेट से कनेक्ट नहीं होती अत: इसमें किसी भी तरह के साइबर क्राइम की कोई गुंजाइश नहीं है. हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि गड़बड़ी की संभावना को नकारा नहीं जा सकता. सुरक्षा में तैनात लोगों के मेल-जोल से इस मशीन में गड़बड़ी की जा सकती है. लेकिन ईवीएम मशीन में छेड़छाड़ करने के लिए हर एक मशीन से छेड़छाड़ करनी पड़ेगी और सारी मशीनों में एक साथ गड़बड़ी करना संभव नहीं है. वहीँ कौन सी ईवीएम मशीन किस पोलिंग बूथ पर रहेगी इस बात का पता पहले से नहीं होता, पोलिंग पार्टी को एक दिन पहले पता चलता है कि उनके पोलिंग बूथ पर कौन से सीरिज़ की ईवीएम आएगी अर्थात मशीन की सुरक्षा में तैनात व्यक्ति भी किसी तरह की गड़बड़ी नहीं कर सकता.

वहीँ चुनाव प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग ने कहा है कि उसका इरादा अगले लोकसभा चुनावों तक हर ईवीएम के साथ एक वीवीपैट (वोटर वैरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल) मशीन लगाने का है, जिससे चुनाव में गड़बड़ी के सारे शक-सुबहे दूर होंगे. आपको बता दें कि यूपी में 20 सीटों पर वीवीपैट का इंतजाम था, उनमें से 17 पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है. जिन तीन सीटों पर वो हारी भी, उनमें से दो पर वो दूसरे नंबर पर रही है.

चुनाव आयोग का दावा- साबित करें धांधली

सुप्रीम कोर्ट के सामने भी ईवीएम टैंपरिंग के कई मामले पहले भी आए हैं, लेकिन आज तक कभी भी इस तरह का कोई मामला सही साबित नहीं हुआ. चुनाव आयोग की तरफ से कई बार आम लोगों को आमंत्रित किया है कि वह खुद चुनाव आयोग जाकर ईवीएम को गलत साबित करने का दावा प्रस्तुत करें लेकिन आज तक इस तरह का कोई भी दावा सही साबित नहीं हो पाया है. अर्थात बात एकदम शीशे की तरह साफ़ है अगर आप चुनाव लड़ें और हार गए तो यदि पेपर पर वोटिंग हुई है तो बूथ कैप्चरिंग हुई है और अगर मशीन से हुई है तो मशीन हैक हुई है.

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