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ए दिल! यहां मरना भी हुआ मुश्किल, आत्मा की मुक्ति में नोटबंदी बनी रोड़ा

 Anurag Tiwari |  2016-11-17 09:47:41.0

Varanasi, वाराणसी, Manikarnika, HarishChandra Ghat, Cremation, Last Rites


तहलका न्यूज ब्यूरो

वाराणसी. एक तरफ जहां देश भर में पीएम नरेन्द्र मोदी के नोटबंदी के फैसले को समर्थन मिल रहा है वहां आम आदमी की दुश्वारियां भी बहुत हैं. यहां तक की नोटबंदी मरने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ रही. पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के महाश्मशान मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर याही आलम देखने को मिल रहा है. शायद इतना कष्ट तो राजा हरिश्चंद्र को भी श्मशान पर नहीं झेलना पड़ा होगा, जितना कि मृतकों के रिश्तेदारों को मुश्किलें सहन करनी पद रही हैं.

मणिकर्णिका पर शव जलाने के लिए लकड़ी हो या फिर दाह-संस्कार कराने वाले पंडे, सरकार के आदेश के बाद भी पुरानी नोटों को लेने से मना कर रहे हैं. उनका तर्क है दाह-संस्कार के लिए आने वाले नई नोटें और छुट्टे लेकर आएं.

अपने रिश्तेदार का दाह-संकार कराने पहुंचे गाजीपुर के रमेश ने बताया कि नोटबंदी भले काले धन से मुक्ति दिला दे लेकिन आत्मा की मुक्ति में बाधक बन रही है. वे कहते हैं कि ज्सिके घर मौत हुई है वह अंतिम संस्कार की तैयारी में लगे या बैंक और एटीएम के सामने लाइन लगाए. अभी समय है, इन लोगों को मानवता के आधार पर और सरकार के फैसले के अनुसार पुरानी नोटों को स्वीकार कर लेना चाहिए.

वहीं अंतिम संस्कार कराने वाले एक पंडे पप्पू ने कहा कि जब लोगों को मालूम है कि 500 और हजार की नोटें अब किसी काम की नहीं तो उसी हिसाब से इंतजाम करके अंतिम संस्कार के लिए लोग आएं.

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