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लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे, नहीं होगी शराब की कोई दुकान

 Sabahat Vijeta |  2016-06-03 16:18:05.0


  • मुख्यमंत्री ने तेज गति के कारण राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हर सम्भव कदम उठाने के निर्देश दिए

  • एक्सप्रेस-वे तथा हाई-वे पर अधिकतम 100 किलोमीटर की स्पीड निर्धारित करते हुए उल्लंघन करने वाले वाहनों पर तकनीक के माध्यम से नजर रखने एवं भारी जुर्माना वसूलने की व्यवस्था की जाए : मुख्यमंत्री

  • आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे देश का पहला लिकर शॉप रहित एक्सप्रेस-वे होगा रोड सेफ्टी वेबसाइट www.uproadsafetycell.org
    का लोकार्पण

  • मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उ.प्र. राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक सम्पन्न


akh-expressलखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तेज गति के कारण राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हर सम्भव कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की गति सीमा निर्धारित की जाए, जिससे अक्टूबर में शुरू होने वाले आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटनाओं की सम्भावना को कम किया जा सके। निर्धारित सीमा से अधिक गति वाली गाड़ियों पर भारी जुर्माना करने की व्यवस्था की जाए। इसके लिए आधुनिक तकनीक की मदद ली जाए। उन्होंने कहा कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे देश का पहला लिकर शॉप रहित एक्सप्रेस-वे होगा।


मुख्यमंत्री आज यहां शास्त्री भवन में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने रोड सेफ्टी वेबसाइट www.uproadsafetycell.org  

का लोकार्पण किया। यह वेबसाइट रोड सेफ्टी से सम्बन्धित सभी महत्वपूर्ण विभागों में आपसी समन्वय हेतु एक प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगी। वेबसाइट के माध्यम से सड़क सुरक्षा के सन्दर्भ में जनसामान्य, स्वयंसेवी संगठनों तथा सड़क दुर्घटना में प्रभावित व्यक्तियों व उनके सम्बन्धियों से सुझाव प्राप्त करने की व्यवस्था बनायी गयी है।


इस अवसर पर श्री यादव ने कहा कि कई बार अधिक गति के कारण होने वाली दुर्घटनाओं से पूरा परिवार समाप्त हो जाता है, जो अत्यन्त दुःखद है। उन्होंने कहा कि लोगों को अधिक से अधिक सड़क सुरक्षा की जानकारी दी जानी चाहिए, क्योंकि सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सभी विभागों को इस मामले में जिम्मेदारी एवं संवेदनशीलता से काम करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को रोड सेफ्टी के मामले में उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।


श्री यादव ने देश के सबसे लम्बे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर यातायात शीघ्र ही शुरू होने जा रहा है। यदि वाहनों की स्पीड नियन्त्रित करने की प्रभावी व्यवस्था लागू नहीं की गई तो बड़ी संख्या में लोग दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं। उन्होंने एक्सप्रेस-वे तथा हाई-वे पर मोटर वाहनों के लिए निर्धारित अधिकतम गति सीमा 100 किलोमीटर प्रतिघण्टा का अनुपालन सुनिश्चित कराने का निर्देश सम्बन्धित विभागों को देते हुए कहा कि गति सीमा का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर तकनीक के माध्यम से नजर रखने एवं भारी जुर्माना वसूलने की व्यवस्था की जाए। साथ ही, इस एक्सप्रेस-वे पर लिकर शॉप को भी प्रतिबंधित किया जाए।


मुख्यमंत्री ने नगरों में पैदल चलने वाले यात्रियों के लिए यथासम्भव फुटपाथ का निर्माण कराए जाने का निर्देश देते हुए कहा कि भविष्य में किसी भी सड़क परियोजना को परिकल्पित करने तथा उसके क्रियान्वयन में पैदल चलने वाले व साइकिल सवार व्यक्तियों के सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था को अवश्य शामिल किया जाए। हाईवे, एक्सप्रेस-वे तथा स्टेट हाईवे पर थानों की सीमा एवं मोबाइल नम्बर से सम्बन्धित बोर्डों पर नजदीकी पी.एच.सी. का भी फोन नम्बर दर्ज किया जाए। इसके साथ ही, व्यापारिक वाहनों के चालकों के रीफ्रेशर कोर्स के समय वीडियो फोटोग्राफी करायी जाए, जिससे फर्जी रीफ्रेशर कोर्स के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस के प्रचलन को रोका जा सके। इसके साथ ही, विद्यालयों से सम्बद्ध बसों एवं वाहनों की सघनता से ऑडिट कराते हुए लर्निंग लाइसेंस के साथ-साथ स्थाई लाइसेंस निर्गत करने की ऑनलाइन व्यवस्था करने के लिए आवश्यक कदम उठाने तथा रोड सेफ्टी से सम्बन्धित बिन्दुओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सूचना विभाग की मदद लेने का निर्देश दिया है।


इसी प्रकार ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन परीक्षण कराने का निर्देश देते हुए श्री यादव ने कहा कि इस व्यवस्था को प्रदेश के सभी जनपदों में लागू किया जाए। अभी यह व्यवस्था लखनऊ जनपद में ही काम कर रही है। उन्होंने यातायात नियमों का पालन न करने वाले वाहनों पर नजर रखने के लिए प्रस्तावित आई.टी.एम.एस. योजना को सबसे पहले लखनऊ एवं नोएडा में प्रभावी बनाने का निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश के अन्य प्रस्तावित 10 नगरों में भी शीघ्र यह व्यवस्था लागू की जाए।


श्री यादव ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गयी व्यवस्था कि गुड समेरिटियन (नेक आदमी) अर्थात वह व्यक्ति, जो सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को बचाने तथा अस्पताल पहुंचाने में मदद करता है, को पुलिस द्वारा उत्पीड़ित नहीं किया जाएगा, का अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सड़क दुर्घटनाओं के पर्यवेक्षण एवं अनुश्रवण के लिए पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित कमेटी ऑन रोड सेफ्टी की दिनांक 12 मई, 2016 की बैठक में दिए गए निर्देशों पर सभी सम्बन्धित विभागों द्वारा तदानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए भी कहा।


मुख्यमंत्री ने दुर्घटना बाहुल्य स्थलों को नए सिरे से चिन्हित करके उनमें रोड डिजाइनिंग से सम्बन्धित सुधार लाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश देते हुए कहा कि हाई-वे पुलिस की तैनाती के साथ-साथ हाई-वे पर स्थित ट्रॉमा सेण्टरों में पर्याप्त ट्रेंड स्टाफ की व्यवस्था तथा बेसिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम एवं एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर आधारित एम्बुलेंस की तैनाती की जाए। उन्होंने कहा कि हाईवे पर निर्माणाधीन 36 ट्रामा सेण्टरों में से 21 को क्रियाशील किया गया है, शेष के काम भी शीघ्र पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि जिन विभागों को सड़क सुरक्षा से सम्बन्धित जो दायित्व सौंपे गए हैं, उन्हें समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए।


बैठक में आई.आई.टी., कानपुर के प्रतिनिधि द्वारा ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार हेतु कतिपय सुझाव दिये गये, जिसके क्रम में मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि कानपुर शहर में आई.आई.टी. का सहयोग लेकर ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक उपाय किए जाएं।


इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव, बेसिक शिक्षा मंत्री अहमद हसन, परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) यासर शाह, राज्य मंत्री परिवहन मान पाल सिंह, एम.एल.सी. मधुकर जेटली, मुख्य सचिव आलोक रंजन, प्रमुख सचिव वित्त राहुल भटनागर, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्रीमती अनीता सिंह, प्रमुख सचिव परिवहन कुमार अरविन्द सिंह देव, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अरविन्द कुमार, प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग श्रीमती आराधना शुक्ला, परिवहन आयुक्त एवं प्रबन्ध निदेशक के. रवीन्द्र नाईक सहित अन्य अधिकारी तथा स्वैच्छिक संस्थाओं के पदाधिकारी आदि उपस्थित थे।

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