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महात्मा गांधी ने नहीं मनाया था आजादी का जश्न, ये थी खास वजह

 Abhishek Tripathi |  2016-08-15 07:07:41.0

mahatma_gandhiतहलका वेब टीम
नई दिल्ली. जब भी भारत की आज़ादी की बात होती है तो देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम सबसे पहले सामने आता है। लेकिन क्या आपको पता है 15 अगस्त 1947 को मिली आजादी के जश्न में न तो महात्मा गांधी शरीक हुए और न ही 14 अगस्त को उनके शिष्य पंडित नेहरू द्वारा दिए गए ऐतिहासिक भाषण में शामिल हुए। इसकी सबसे बड़ी वजह ये थी कि भारत के विभाजन के आधार पर मिली आजादी गांधी को मंजूर नहीं थी।


महात्मा गांधी आजादी के जश्न में नहीं शरीक हुए
अपने राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले की सलाह पर उन्होंने पहले भारत घूमा बाद में 1919 में बिहार के चंपारण से जमीन पर आंदोलन की शुरुआत की। जिस राष्ट्रध्वज को आज सारा देश शान से फहराता है। शुरूआत में उसी तिरंगे को महात्मा गांधी ने अस्वीकार कर दिया था। इतना ही नहीं उन्होंने यहां तक कह दिया था कि यदि इस तिरंगे को राष्ट्रध्वज घोषित किया गया तो मैं इसे सलाम नहीं करूंगा। गांधी तिरंगे के बीच में चरखा हटाकर ‘अशोकचक्र’ को शामिल करने से बेहद खफा थे।


किसने बनाया तिरंगा
आइए आपको बताते हैं कि भारत का राष्ट्रध्वज किसने बनाया। इस महान व्यक्ति का ना है पिंगाली वैंकैया और यह 2 अगस्त को 1876 को आंध्र प्रदेश के मछलीपत्‍तनम में पैदा हुए थे। पिंगाली वैंकैया ने करीब 30 देशों के राष्‍ट्रध्‍वजों का निरीक्षण और अध्ययन किया और इसके बाद में अपने देश के राष्‍ट्रध्‍वज की रूप रेखा तैयार की। उन्होंने हिन्दुओं के प्रतीक रंग के रूप में लाल रंग का चयन किया था। बाद में इसे केसरिया किया गया।

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