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जब सुनी इमाम हुसैन पर हुए ज़ुल्म की दास्ताँ तो फूट-फूट कर रोये लोग

 Vikas Tiwari |  2016-10-12 17:35:05.0

मोहर्रम



तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. लखनऊ में मोहर्रम के दिन इमामबाड़ा गुफरानमॉब में मजलिस शामें गरीबा हुई. इमामबाड़ा गुफरानमॉब में हमेशा की तरह आज भी अँधेरे में बग़ैर फर्श बिछाये मजलिस हुई. मौलाना कल्बे जवाद ने मजलिस को ख़िताब किया. मौलाना ने बताया कि इस्लाम में सबसे कीमती है इल्म. इल्म हासिल करने से सही और गलत का पता चलता है.  जेहाद के मायने गलत समझाये गए. माँ अपने बच्चे को दूध पिलाती है वह उसका जेहाद है.

मौलाना ने कहा कि अल्लाह ने इतने पैगम्बर दुनिया में भेजे लेकिन यह नहीं कहा कि मैंने अहसान किया लेकिन जब हज़रत मोहम्मद को दुनिया में भेजा तो कहा कि यह हमारा एहसान है. दरअसल एहसान तब होता है जब ज़रूरत से ज़्यादा दिया जाता है. मौलाना ने कहा कि जो जिस तरह के काम करता है उसका वैसा ही नतीजा भुगतना पड़ता है. अहले बैत अमन के पैगम्बर थे. हज़रत इमाम हुसैन जानते थे कि उन पर पानी बन्द किया जायेगा लेकिन अपने दुश्मनों को प्यासा देखा तो अपने लिए रखा पानी उन्हें पिलाकर उनकी जान बचाई. उन्ही दुश्मनों ने इमाम हुसैन के घर वालों पर पानी बन्द कर दिया.


इसके बाद तीन दिन के प्यासे छह महीने के अली असग़र को भी पानी नहीं दिया. इमाम हुसैन ने दुश्मनों से कहा कि तुम्हारी दुश्मनी मुझसे है, मुझे नहीं इस बच्चे को ही पानी पिला दो. दुश्मनों ने छह महीने के बच्चे को तीर मार कर शहीद कर दिया. कर्बला के मैदान में हक़ और इन्साफ को बचाने के लिये हज़रत इमाम हुसैन का घर दस मोहर्रम के दिन लुट गया. एक ही दिन में 72 लोगों को शहीद कर दिया गया.
यज़ीद के सवा लाख के लश्कर ने तीन दिन के भूखे प्यासों को शहीद कर दिया. कर्बला में दस मोहर्रम को इमाम हुसैन का भरा घर लुट गया था. इमाम हुसैन के घर में अँधेरा हो गया था. इसी वजह से शामे गरीबा की मजलिस अँधेरे में होती है. इमाम हुसैन और उनके घर वालों पर हुए ज़ुल्म की दास्ताँ सुनकर लोग फूट फूट कर रो पड़े.

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