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मणिपुर : प्रवासी विरोधी विधेयकों के पक्ष और विपक्ष में आंदोलन तेज 

 Vikas Tiwari |  2016-05-31 22:00:41.0

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इंफाल.  मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह विधानसभा में पारित तीन प्रवासी विधेयकों के लिए समर्थन जुटाने के लिए अपने नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली ले जाने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि प्रस्तावित कानून का विरोध करने वालों ने कहा है कि वे अपना आंदोलन तेज करेंगे। जनजातीय संगठनों ने कहा कि आंदोलन के 300वें दिन पर 9 जून को धरना प्रदर्शन किया जाएगा और 12 जून को चर्च में प्रार्थना की जाएगी। साथ ही जनजाति बहुल क्षेत्रों में 12 घंटे का बंद रखा जाएगा।

ये संगठन मामले का हल निकलने तक मणिपुर की जनजातियों से अपने-अपने घरों पर काले झंडे फहराने की अपील कर रहे हैं। इन तीनों विधेयकों और गत साल सितंबर में चुराचंदपुर जिले में 9 युवा प्रदर्शनकारियों की मौत के विरोध में मणिपुर ट्राइबल्स फोरम (एमटीएफ) कई महीनों से नई दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहा है।


जनजातीय संगठनों ने मुर्दाघर में रखे इन नौ युवा प्रदर्शनकारियों के शवों को अभी तक नहीं लिया है। गत सप्ताह के शुरू में नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के चार विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी। विधयकों ने 'मणिपुर की हृदयविहीन इबोबी सिंह सरकार के खिलाफ कार्रवाई करने और कांग्रेस सरकार द्वारा गत साल 31 अगस्त को विधानसभा में पारित पहाड़ी क्षेत्र विरोधी तीन विधेयकों' को खारिज करने का अनुरोध किया था।

दूसरी ओर विधेयक के समर्थन में आंदोलन के कारण सरकार ने राज्य में मंगलवार से तीन दिनों के लिए सभी स्कूल और कॉलेजों को बंद करने का आदेश दिया है।

राज्य सरकार ने कहा है कि इबोबी सिंह के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल 3 जून को नई दिल्ली जाएगा और इस मुद्दे पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह से चर्चा करेगा।

'इनर लाइन परमिट सिस्टम' पर संयुक्त समिति (जेसीआईएलपीएस) ने तीनों विधेयकों को प्रवासियों से स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है और इनके कानून बनने में हो रही देरी के विरोध में बंद की घोषणा की है।

जेसीआईएलपीएस के संयोजक खोमद्राम रतन ने कहा, "राज्य में सभी केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालय एक जून से तीन दिनों के लिए बंद रहेंगे।" जेसीआईएलपीएस मणिपुर के मूल निवासियों के संरक्षण के लिए 'इनर लाइन परमिट सिस्टम' की मांग करती रही है जिसे इन तीन विधेयकों में जगह दी गई है। ये विधेयक राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

इनर लाइन परमिट देश के कुछ विशिष्ट निषिद्ध क्षेत्रों में प्रवेश के लिए विशेष परमिट की व्यवस्था करती है। यह व्यवस्था पहले से ही अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम में लागू है।

यह व्यवस्था सबसे पहले ब्रिटिश शासकों ने इन इलाकों में अपने व्यावसायिक हितों की रक्षा के लिए लागू की थी। उन्होंने इन इलाकों में लोगों के प्रवेश पर कई तरह की रोक लगाईं थीं। जेसीआईएलपीएस की मांगों को मानते हुए कांग्रेस सरकार ने गत साल विधानसभा में तीन विधेयक पारित कराए थे।

ये विधेयक हैं-मणिपुर लोक संरक्षण विधेयक 2015, मणिपुर भू-राजस्व और भू-सुधार (सातवां संशोधन) विधेयक 2015 और मणिपुर दुकान और प्रतिष्ठान (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2015।

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