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गाजीपुर: शहीद शशांक सिंह को आज दी जाएगी अंतिम विदाई

 Abhishek Tripathi |  2016-11-25 04:38:14.0

shashank_singhतहलका न्यूज ब्यूरो
गाजीपुर. कश्मीर के माछिल सेक्टर में बीते मंगलवार को नियंत्रण रेखा पर गश्त करते समय पाकिस्तानी फौज के कायराना हमले में शहीद दोनों जवानों के पार्थिव शरीर गाजीपुर में उनके गांव पहुंच गए हैं। वायुसेना का हेलीकाप्टर बद्धोपुर निवासी शहीद मनोज कुशवाहा और नसीरुद्दीनपुर के निवासी शहीद शशांक सिंह के पार्थिव शरीर लेकर जैसे ही गाजीपुर के अंधऊ हवाई अड्डे पर उतरा वहां मौजूद हजारों लोगों की भीड़ ने रूंधे गले से शहीदों के सम्मान में नारेबाजी शुरू कर दी। मौके पर मौजूद लगभग हर शख्स गमगीन था और रह रह कर पाकिस्तानी सेना और वहां के हुक्मरानो को कायराना हरकत के लिए कोस रहा था।


शहीद शशांक को आज दी जाएगी अंतिम विदाई
शहीद मनोज कुशवाहा का अंतिम संस्कार गुरुवार को गाजीपुर के गंगा घाट पर कर दिया गया, जबकि शंशाक की अंत्येष्टि आज सुबह होगी। गुरुवार देर शाम दोनों वीरों के शव उनके पैतृक गांव पहुंच गए जहां श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ था। शहीद मनोज की अंतिम यात्रा में बडी तादाद में लोगों ने हिस्सा लिया और उन्हें अपनी आखिरी सलामी दी। इससे पहले जिलाधिकारी संजय कुमार खत्री, पुलिस अधीक्षक अरबिंद सेन, उपजिलाधिकारी सदर, पुलिस अधीक्षक (नगर) केशव प्रसाद गोस्वामी, पुलिस उपाधीक्षक उदयराज सिंह, सपा के जिलाध्यक्ष राजेश कुशवाहा, विधायक प्रतिनिधि असलम खान, भाजपा जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष विनोद अग्रवाल, एमएलसी प्रतिनिधि पप्पू सिंह, शैलेंद्र सिंह, बसपा जिला पंचायत सदस्य सुभाष राम ने शहीद के शव पर पुष्प अर्पित किया तथा दोनों शहीदों के शव को पैतृक गांव स्थित आवास पर लाया गया।


शहीद शशांक सिंह 2010 में राजपूताना राइफल में हुए थे भर्ती
बीते मंगलवार को शहीद मनोज ने घर फोन करके अपने छोटे भाई बृजमोहन से हाल-चाल लिया था। अपने भाई से यह भी कहा था कि मैं जल्द ही दो चार दिन में छुट्टी लेकर घर आ रहा हूं। घर लौटने पर पिछले वर्ष बहन प्रिया की शादी का शेष कर्ज लोगो को चुकता कर दूंगा। मां से बात करके फिर शाम को फोन करने की बात कहकर फोन काट दिया था। शशांक सिंह सेना में वर्ष 2010 में राजपूताना राइफल में भर्ती हुए थे। उनकी तैनाती 57 राष्ट्रीय राइफल में कश्मीर में तैनात थे। आखिरी बार वह जुलाई में छुट्टी आए थे। उसकी शादी नहीं हुई थी। पाकिस्तानी फौजियों ने उनका शरीर छलनी कर दिया था। उनके बड़े भाई हिमांशु सिंह भी फौजी हैं और उनकी तैनाती भी कश्मीर में ही है।

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