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'मथुरा का कंस' बसपा के कद्दावर नेता के खिलाफ लड़ चुका है लोकसभा चुनाव

 Abhishek Tripathi |  2016-06-04 16:53:29.0

rambriksh_yadavतहलका न्यूज ब्यूरो
गोरखपुर. मथुरा के जवाहर बाग कांड का मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव देश भर की मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। यूपी डीजीपी जावीद अहमद ने रामवृक्ष के मरने की पुष्टि भी कर दी है। ऐसे में बहुत ही कम लोग इस बात को जानते होंगे कि रामवृक्ष साल 2009 में कुशीनगर लोकसभा सीट से कई कद्दावर नेताओं के खिलाफ हुंकार भर चुका है।


मथुरा में बाबा जय गुरुदेव की ही तरह ख्याति अर्जित करने का सपना देखने वाला रामवृक्ष यादव अपने पीछे कैसे इतने लोगों की भीड़ जुटा लिया यह भी आश्चर्य की बात है। कम समय में जय गुरुदेव की तरह नाम कमाने की चाहत में वह गलत रास्ते पर चल पड़ा। मथुरा के जवाहर बाग में घटना के बाद मिले असलहे इस बात की तस्दीक भी करते हैं।


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इसके पहले के इतिहास में जाए तो हर कोई आश्चर्य से दांतों तले उंगली दबा लेगा कि रामवृक्ष ने साल 2009 में कुशीनगर लोकसभा सीट से बसपा के कद्द्वर नेता और नेता प्रतिपक्ष रहे स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उस समय वह सहकारिता मंत्री भी थे। वहीं, कांग्रेस के कद्दावर नेता आरपीएन सिंह भी चुनाव मैदान में थे।


इसके अलावा सपा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को भी यहीं से चुनाव मैदान में उतारा था। इन सब हाईप्रोफाइल नेताओं के बीच गाजीपुर के रामपुरबाघपुर का रहने वाला 54 वर्षीय रामवृक्ष अनोखे अंदाज में चुनाव मैदान में कूदा और मीडिया के बीच रातोरात चर्चा में आ गया। निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने वाला रामवृक्ष जब ट्रक पर गृहस्थी के सारे सामान और अपने छह चेलों के साथ पर्चा दाखिला करने आया तो लोगों को हंसी भी आई और हैरत से लोग उसे देखकर ताज्जुब में भी आ गए।


उस समय किसे ने ये नहीं सोचा था कि 45 वर्ष की उम्र का रामवृक्ष शासन-प्रशासन-सरकार और देश के खिलाफ ही हुंकार भरने लगेगा। प्रचार के दौरान उस समय भी वह देश की मुद्रा को फ्राड बताता और शहर सहित ग्रामीण इलाकों में भी घूम-घूम कर अपना प्रचार करने लगा। उसकी बातें तो किसी को समझ में नहीं आती थीं, लेकिन उसके अनोखे अंदाज में भाषण देने के कारण भीड़ जरूर जुट जाती। चुनाव के दौरान लाउडस्पीकर लगाने के आरोप में पडरौना कोतवाली में उसके खिलाफ चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के केस भी दर्ज हुआ था। लोकसभा चुनाव उसने भले ही जीत हासिल नहीं की लेकिन निर्दल प्रत्याशी के रूप में 5855 वोट बटोरकर देश और प्रदेश के कद्दावर नेताओं के बीच अपनी उपस्थिति जरूर दर्ज करा दी थी।

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