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जौनपुर के थे शहीद SHO संतोष यादव, गांव में मातम

 Girish Tiwari |  2016-06-03 09:23:23.0

Santosh-yadav

तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
लखनऊ:
मथुरा के जवाहर बाग में गुरुवार को हुई फायरिंग में शहीद हुए एसओ संतोष यादव जौनपुर के केवटली गांव के रहने वाले थे। संतोष यादव के शहीद होने की खबर से केवटली गांव स्तब्ध है। एसओ फरह के पद पर तैनात रहे संतोष ने सात दिन पहले ही पत्नी व बच्चों को मथुरा से केवटली गांव भेज दिया था। घर पर बूढ़ी मां व दो भाई रहते हैं। घटना की जानकारी मिलते ही छोटा भाई व रिश्तेदार मथुरा के लिए रवाना हो गये। शहीद दरोगा के परिवार में कोहराम मचा हुआ है।

शहीद दरोगा के घर में पत्नी मिथिलेश यादव, 10 साल का बेटा निखिल और 8 साल की बेटी श्रेया है। गांव में संतोष की मां अभिराजी देवी, भाई अजय राय और रायसाहब रहते हैं। शहीद संतोष के पिता लालबहादुर यादव की चार साल पहले मौत हो चुकी है। पूरे परिवार का भार संतोष के ही कंधे पर था।


संतोष के शहीद होने की खबर पूरे गांव को लग गई है लेकिन मां और पत्नी को अभी इस बारे में कुछ भी नहीं बताया गया है। घर का टीवी भी बंद कर दिया गया है। उनके गांव पहुंचे मीडिया वालों और अन्य लोगों को प्रधान अंबरीश की गुजारिश पर रोक दिया गया। प्रधान का कहना है कि अगर अभी उनके घर पर सूचना दी गई तो रातभर रोना मचेगा। इससे कोई भी उनके घर नहीं जा रहा है।

संतोष यादव 2001 में पुलिस सेवा में आए। वह सीधे उपनिरीक्षक के पद पर तैनात हुए। साल 2013 में वह आगरा से मथुरा आए थे। उनकी पहली पोस्टिंग थाना प्रभारी शेरगढ़ रही, जिसके बाद उन्हें स्वॉट टीम का प्रभारी बनाया गया।

स्वॉट टीम में रहते हुए संतोष ने कई बड़े खुलासे किए थे, जिसके बाद वह एसएसपी के पीआरओ बने। फिर उन्हें जमुनापार का थाना प्रभारी बनाया गया। जमुनापार के बाद एक बार फिर से एसएसपी ने उन्हें अपना पीआरओ बनाया। करीब 20 दिन पहले उन्हें एसएसपी डॉ. राकेश सिंह ने फरह का थाना प्रभारी बनाया था।



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