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मायावती की चुनाव आयोग से अपील,केंद्र सरकार को आम बजट पेश करने से रोके

 Girish |  2017-01-04 13:41:09.0

mayavati

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा उत्तर प्रदेश सहित देश के पाँच राज्यों में विधानसभा आमचुनाव के लिये मतदान कार्यक्रम घोषित करने का स्वागत करते हुये कहा कि बहुजन समाज पार्टी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखण्ड व पंजाब इन तीनों ही राज्य में विधानसभा का आमचुनाव अकेले पूरी तैयारी के साथ अपने बलबूते पर लड़ेगी तथा बी.एस.पी. मूवमेन्ट के हित के मद्देनज़र किसी के साथ किसी भी प्रकार का कोई गठबंधन या समझौता नहीं करेगी।

मायावती ने आज यहाँ जारी एक बयान में कहा कि खासकर उत्तर प्रदेश में स्वतन्त्र, निष्पक्ष व शान्तिपूर्ण चुनाव के लिये जरूरी था कि यहाँ कई चरणों में मतदान कराया जाये। इसलिए यहाँ सात चरणों में चुनाव कराने का निर्वाचन आयोग का फैसला स्वागत योग्य है।


उन्होंने कहा कि प्रदेश की वर्तमान सपा सरकार के शासनकाल में हर प्रकार का अपराध काफी बढ़ा ही नहीं है बल्कि काफी चरम पर पहुँच गया है व अराजकता एवं जंगलराज का दौर लगातार जारी है। प्रदेश की सपा सरकार द्वारा पुलिस व प्रशासन को भी संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिये लगातार इस्तेमाल किया जाता रहा है। आगे भी सपा की काम चलाऊ सरकार द्वारा सरकारी मशीनरी के दुरूपयोग की आशंका है।

इसलिए निर्वाचन आयोग के सामने यह एक प्रकार की चुनौती है कि यहाँ उत्तर प्रदेश में विधानसभा का आमचुनाव पूरी तरह से स्वतन्त्र, निष्पक्ष व शान्तिपूर्ण हो तथा खासकर गरीब, कमजोर व उपेक्षित वर्ग के लोग निर्भीक होकर पूरी आज़ादी के साथ अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें। इसके लिये जरूरी है कि केन्द्रीय सुरक्षा बलों की अधिक से अधिक तैनाती हो तथा स्थानीय पुलिस पर भी कड़ी नज़र रखी जाये और उन्हें मनमाना व पक्षपाती रवैया अपनाने से रोकना सुनिश्चित हो।

मायावती ने कहा कि जैसा कि सर्वविदित है कि बीएसपी एक अनुशासित पार्टी है और चुनावों में आदर्श आचार संहिता का सख़्ती से अनुपालन स्वयं अपने स्तर पर भी सुनिश्चित करती है। इस बारे में पार्टी के सभी लोगों को सख्त निर्देश देने हेतु जल्दी ही बैठक बुलायी जायेगी, परन्तु जैसा कि हर चुनाव में देखने को मिलता है कि विरोधी पार्टियों में से ख़ासकर भाजपा, सपा व कांग्रेस आदि जानबूझकर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करती हैं और आयोग को इनसे निपटने में काफी दुश्वारी का सामना करना पड़ता है। ऐसा कड़वा अनुभव खासकर सन् 2014 के पिछले लोकसभा के आमचुनाव में देखने को मिल चुका है। इसलिये इस सम्बन्ध में निर्वाचन आयोग को विशेष सतर्क रहने की जरूरत है।
इसके अलावा उन्होंने निर्वाचन आयोग से यह भी अनुरोध किया कि निष्पक्ष चुनाव के लिये केन्द्रीय सरकार को यह निर्देशित करे कि वह एक फरवरी को आमबजट पेश न करें और उसके स्थान पर सन् 2012 की तरह ही सभी 5 राज्यों में अन्तिम पोलिंग (वोटिंग) की तिथि अर्थात् 8 मार्च 2017 के बाद किसी भी तिथि को पेश करे क्योंकि चुनाव के दौरान आमबजट पेश करके मतदाताओं को प्रभावित किया जा सकता है जिसकी वजह से निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकेंगे।

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