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अब उत्तराखण्ड में संभावनाएं तलाश रही हैं मायावती

 Abhishek Tripathi |  2016-10-15 15:14:43.0

maywati



तहलका न्यूज़ ब्यूरो 
लखनऊ. बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष, सांसद (राज्यसभा) व पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश  मायावती  ने पड़ोसी उत्तराखण्ड राज्य के प्रदेश, ज़िला व विधानसभा स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारियों व ज़िम्मेवार लोगों की आज यहाँ बी.एस.पी. उत्तर प्रदेश यूनिट राज्य कार्यालय, 12 माल एवेन्यू में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में स्वयं शिरकत की और वहाँ पहाड़ी राज्य में पार्टी संगठन की तैयारियों व सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के अनवरत जारी रखने वाले मिशनरी कार्यों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के साथ ही वहाँ होने वाले विधानसभा आमचुनाव की तैयारियों के बारे में गहन समीक्षा की और इस दौरान सामने उजागर हुई कमियों को दूर करने के साथ-साथ आगे की तैयारियों के लिये विशेष दिशा-निर्देंश दिया।


इस अवसर पर अपने सम्बोधन में  मायावती  ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य में भी बी.एस.पी. के लिये अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जो बार-बार हर चुनाव में उभर कर लोगों के सामने आती है। राज्य के बँटवारे से पहले अर्थात् नया उत्तराखण्ड राज्य बनने से पहले संयुक्त उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी. के शासनकाल के दौरान वहाँ के सभी क्षेत्रों के सम्पूर्ण व समग्र विकास एवं व्यापक जनहित को ध्यान में रखकर अनेकों ऐतिहासिक फैसले लिये गये थे, जिनमें नये ज़िलों व तहसीलों आदि का निर्माण शामिल है। इसके अलावा बी.एस.पी. ने हाल ही में वहाँ सम्पन्न स्थानीय निकाय के चुनाव में भी अच्छे परिणाम दिखायें हैं, जो वहाँ पार्टी के जनाधार को साबित करता है, परन्तु इसे और भी ज्यादा व्यापक व मज़बूती प्रदान करने की जरूरत हैं।
मायावती ने इस बैठक में उत्तराखण्ड की वर्तमान राजनीतिक व चुनावी परिदृश्य पर भी काफी विस्तार से चर्चा की और वहाँ उभरने वाले नये चुनावी हालात के हिसाब से आगे की तैयारी करने पर बल दिया।

जहाँ तक उत्तराखण्ड के वर्तमान राजनीतिक व चुनावी हालात का सवाल है तो वहाँ के लोग कांग्रेस व भाजपा दोनों ही पार्टियों के ग़लत कार्यकलापों से काफी ज्यादा दुःखी नज़र आते हैं। बारी-बारी से रही इन दोनों ही पार्टियों की सरकारों में राज्य के संसाधनों का व्यापक लूट हुआ है तथा जनहित व जनकल्याण के काम लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप बहुत ही कम हुये हैं। साथ ही, ग़रीबों, शोषितों, दलितों व अन्य दबे-कुचले लोगों के हित व कल्याण पर उचित ध्यान नहीं दिया गया है।
इसके साथ-साथ सत्ताधारी कांग्रेस व भाजपा इन दोनों ही पार्टियों के भीतर अन्दरुनी मचे घमासान व ज़बर्दस्त गुटबाजी एवं जात-पात की राजनीति होने की वजह से भी प्रदेश की जनता काफी दुःखी प्रतीत होती है। इसका लाभ वहाँ भी शीघ्र ही होने वाले विधानसभा आमचुनाव में उठाया जा सकता है और बी.एस.पी. एक मजबूत पार्टी भी बनकर उभर सकती है। और फिर वहाँ भी ‘‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय‘‘ की सरकार चलाने का मौक़ा पार्टी को मिल सकता है, ऐसा लोगों का सोचना है।
लेकिन उसके लिये ख़ास शर्त यह है कि बी.एस.पी. के लोगों को पूरी तन्मयता व तन, मन, धन से काम करके पार्टी के संगठन को और भी ज़्यादा मज़बूत बनाना होगा तथा सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को और ज्यादा बढ़ाना होगा।
साथ ही खासकर नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री बन जाने के बावजूद पिछले उनके लगभग ढाई वर्षोंं के कार्यकाल के दौरान सन् 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके द्वारा किये गये लोक-लुभावन वायदों को निभाने में वादाखिलाफी व हर प्रकार से लोगों के साथ विश्वासघात करने को लोगों के समक्ष पर्दाफाश कर देते हैं तो बी.एस.पी. वहाँ की जनता के लिये भी एक बेहतर विकल्प के तौर पर ज़रूर उभर सकती है और कांग्रेस व भाजपा से बुरी तरह से निराश उत्तराखण्ड राज्य के लोगों में आशा का नया संचार पैदा हो सकता है।

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