Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

मायावती हमारी बुआ, स्वामी हैं बड़े नेता, बोले अखिलेश

 Tahlka News |  2016-06-23 07:05:31.0

akhilesh maya swami

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में होने वाले विधान सभा चुनावो के पहले के राजनितिक प्रहसन शुरू हो चुके हैं, पार्टिया छोड़ने और पकड़ने के सियासी सर्कस शुरू हो गए हैं और इस सर्कस के महारथी नए नए करतब दिखा रहे हैं.

स्वामी प्रसाद मौर्या के बसपा छोड़ने के दूसरे ही दिन सूबे के सीएम अखिलेश यादव ने कह दिया कि स्वामी प्रसाद मौर्या अच्छे आदमी हैं और मैंने उनसे पहले ही कहा था कि गलत जगह न रहे ,हमारे साथ आ जाए.

मुख्यमंत्री के इस साफ़ बयान ने इन अटकलों को और भी मजबूत कर दिया कि स्वामी बसपा छोड़ने के बाद समाजवादी पार्टी की साईकिल पर बैठेंगे.

1996 से हाथी पर सवार नेता स्वामी प्रसाद मौर्या 2016 में उसी हांथी से उतर गए. स्वामी प्रसाद ने बसपा सुप्रीमो पर वही आरोप लगाये जो उनसे पहले पार्टी छोड़ने वाले नेता लगाते रहे हैं. स्वामी के इस्तीफे से बिफरी बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी आनन् फानन में बुलाई प्रेस कांफ्रेंस में स्वामी को जम कर लताड़ा और कहा कि स्वामी ने पार्टी छोड़ कर एहसान किया है वरना मैं तो कब से उन्हें निकलने की तैयारी में थी.


इस बात की अटकले भी लगायी जा रही हैं कि बसपा के कई और भी विधायक स्वामी के साथ जायेंगे या नहीं. राजनितिक इतिहास के पन्ने इस बात की गवाही देते हैं कि बसपा से जाने वाले कई कद्दावर नेता पार्टी छोड़ने के बाद अपनी जमीन नहीं बना पाए. दशरथ पाल से ले कर डा. मसूद अहमद, डा. सोने लाल पटेल, राजाराम पाल, राजबहादुर, आर.के.चौधरी से ले कर दद्दू प्रसाद तक कभी बसपा के कद्दावर नेता हुआ करते थे, मगर जब इन्होने पार्टी छोड़ी तो अपनी अपना सियासी वजूद नहीं बचा सके.

अपवाद सिर्फ डा.सोने लाल पटेल ही रहे जिन्होंने अपना दल की स्थापना की और उसका वजूद अब तक कायम है.

स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने साथ कई विधायकों के समर्थन का दावा किया है, इससे पार्टी में चिंता है. हांलाकि मायावती का दबदबा इतना है कि स्वामी प्रसाद की प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद कुछ नेताओं के चेहरे पर इस्तीफे की घोषणा के बाद हवाइयां उड़ती दिखी और बाद में उन नेताओं ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया.

राज्य सभा और परिषद् के चुनावो के बाद मायावती को यह दूसरा झटका लगा है. इस मतदान से ठीक पहले बसपा विधायक और पूर्व मंत्री राजेश त्रिपाठी ने पार्टी छोड़ी थी और अब नेता विपक्ष के पद पर रहे स्वामी प्रसाद ने चुनावो की तैयारियों में लगी मायावती को बड़ा झटका दे दिया.
बसपा अध्यक्ष ने 25 जून को लखनऊ में पार्टी विधायकों की बैठक बुलाई है. बसपा छोड़ने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थक विधायक अगर इस बैठक से गैरहाजिर रहते हैं तो मौर्य का दावा और मजबूत हो जाएगा. मौर्य समर्थक बुधवार शाम से ही इस दिशा में सक्रिय हो गए हैं.
मुलायम से है पुराना साथ

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भूगोल में परास्नातक और एलएलबी करने वाले मौर्य ने 1980 में सक्रिय राजनीति की शुरुआत चौधरी चरण सिंह के लोकदल से की थी. मुलायम सिंह भी इसी दल में थे. मौर्य को पहली जिम्मेदारी युवा लोकदल के संयोजक की मिली.इसके बाद वे युवा लोकदल के प्रदेश महामंत्री तथा लोकदल की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य, प्रदेश महामंत्री और मुख्य महासचिव रहे.

लोकदल के टूटने के बाद जनता दल के गठन के बाद मौर्य भी जनता दल के साथ हो लिए और 1991-95 तक प्रदेश महासचिव रहे. मुलायम भी तब जनता दल का हिस्सा थे. आगे चलकर मुलायम ने समाजवादी पार्टी बनाई और मौर्य 1996 में बसपा में शामिल हो गए. इस तरह मौर्य एक दशक से ज्यादा समय तक सपा मुखिया के साथ रह चुके हैं. अब एक बार फिर उनकी नई पारी सपा के साथ शुरू होने के संकेत हैं.

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top