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पीएम की बहराइच रैली फ्लाप : मायावती

 Vikas Tiwari |  2016-12-11 15:13:28.0

mayawati

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को बहराइच ज़िले में भाजपा की हुई परिवर्तन रैली को फ्लाप बताते हुये कहा कि पूर्व की इनकी रैलियों की तरह ही इस बार भी अधिकांशतः जिले के बाहर के भाड़े की लोगां की व टिकटार्थियों द्वारा स्वार्थ की ही भीड़ इकट्ठा हुई जो लोगां की उम्मीद के हिसाब से बहुत ही कम थी।
भाजपा की आशा के अनुरूप इन रैलियों के सफल साबित नहीं होने से भी यह साबित होता है कि लोकसभा आमचुनाव के बाद इनकी केन्द्र की सरकार की वादाखिलाफी के साथ-साथ इस सरकार की घोर जनविरोधी नीतियों व गलत कार्यकलापों के कारण ख़ासकर उत्तर प्रदेश में बीजेपी का जनाधार काफी खिसक गया और इनकी हालत यहाँ काफी ज्यादा ख़राब है। यही कारण है कि भाजपा अभी तक विधानसभा आमचुनाव के लिये अपने उम्मीद्वारों के नाम तक भी घोषित नहीं कर पा रही है। वैसे भी पिछले सन् 2012 के विधानसभा आमचुनाव में भाजपा को यहाँ मात्र 47 सीटें व 15 प्रतिशत ही वोट मिले थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस रैली में शामिल नहीं हो सके, परन्तु मोबाइल से रैली को सम्बोधित करने की औपचाकिता पूरी की।

मायावती ने उनके भाषण पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में ज़्यादातर पुरानी व घिसी-पिटी बातें ही दोहरायी हैं और जनहित व जनसमस्या के निदान से सम्बन्धित लोगां की अभिरूची की कुछ भी नई बात नहीं की, जिससे लोगों को काफी निराश होना पड़ा।
जहाँ तक नोटबन्दी के हवाले से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कल गुजरात में कहीं गयी अपनी बात को आज फिर बहराइच में दोहराते हुये यह कहना कि संसद में विपक्ष उन्हें बोलने नहीं दे रहा है, इसलिए वे बाहर बोलते हैं, वास्तव में यह सरासर गलतबयानी है और देश के प्रधानमंत्री को और वह भी उस पार्टी के नेता को जिसको लोकसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त हो, उसको इस प्रकार से रोना-धोना करना व उस माध्यम से जनता को वरग़लाने का प्रयास करना थोड़ा भी शोभा नहीं देता है। वास्तव में यह तो ‘‘उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे‘‘ की कहावत को ही चरितार्थ करता है। साथ ही ऐसा कहकर प्रधानमंत्री श्री मोदी अपनी व अपनी सरकार की ज़िम्मेदारी व जवाबदेही से भाग रहे हैं, लेकिल जनता इन्हें माफ करने वाली नहीं है।
मायावती ने कहा कि सरकार द्वारा 500 व 1000 रुपये की नोटबन्दी का फैसला 90 प्रतिशत ईमानदार देशवासियों के लिये एक गम्भीर समस्या बन गयी है, परन्तु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस समस्या को जल्दी दूर करके लोगों को राहत पहुँचाने के बजाय वे अपना ही रोना रोते रहते हैं। देश का प्रधानमंत्री जब यह कहने लगे कि संसद में उसे बोलने नहीं दिया जाता है तो यह खुद उनका अपने ऊपर ही आक्षेप है, ना कि विपक्षी पार्टियां पर।
बल्कि इसके विपरीत लोगां की शिकायत यह रही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संसद का सत्र जारी रहने के बावजूद अक्सर संसद के बाहर ही बयानबाज़ी करते हैं और इस प्रकार संसद का अपमान करते हैं। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संसद में व संसद के बाहर जनता की बात व उनकी समस्याओं के सम्बन्ध में कुछ भी सुनने को तैयार ही नहीं है जिससे समस्यायें लगातार जटिल होती जा रही हैं।
साथ ही, नोटबन्दी की ज़बर्दस्त मूल समस्या से जूझ रहे, देश की 90 प्रतिशत आमजनता का ध्यान बाँटने व ख़ासकर इस मामले में अब अपनी सरकार की विफलताओं पर पर्दा डालने के लिये ही इस प्रकार के हथकण्डे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी लगातर ही अपना रहे हैं, लेकिन अब इनका इस प्रकार का घड़ियाली आँसू बहाने व इमोशनली ब्लैकमेल करने का हथकण्डा भी पुराना पड़कर काफी निष्प्रभावी साबित हो रहा है। देश की आमजनता व ख़ासकर उत्तर प्रदेश की विशाल जनसंख्या अब इस प्रकार की उनकी बार-बार की नाटकबाजी के झाँसे में आने वाली नहीं है।
वैसे भी सर्वविदित है कि प्रधानमंत्री जो कहते हैं, अधिकांशतः वह उसका उल्टा ही करते हैं जिससे जनहित व जनकल्याण का लाभ मिलने के बजाय उसका लोगों को नुकसान ही होता है। इसका खास सबूत यह है कि सन 2014 के लोकसभा आमचुनाव के दौरान देश की गरीब व आमजनता के हित में इन्होने जो अनेको लुभावने वायदे किये थे, वे इनकी सरकार के आधा से ज्यादा समय निकल जाने के बावजूद अभी तक भी पूरे नहीं किये गये हैं।
साथ ही नोटबन्दी के इनके फैसले से देश की ग़रीब, मज़दूर, किसान व अन्य मेहनतकश ईमानदार जनता अर्थात् देश की 90 प्रतिशत आमजनता का जीवन काफी ज्यादा कष्टदायी व कंगालमय बन गया है, जबकि कालाधन रखने वाले मुट्ठीभर लोग या तो पहले ही अपने-अपने धन को ठिकाने लगा चुके हैं या फिर जुगाड़ से अपने कालेधन को नई करेन्सी में तब्दील करा ले रहे हैं, जैसाकि देश भर में लोगां को देखने को मिल रहा है। अर्थात् प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोटबन्दी के फैसले से देश की ईमानदार आमजनता ही काफी बुरी तरह से प्रभावित हुई है तथा इनका यह फैसला ‘‘खोदा पहाड़ और निकली चुहियां‘‘ की ही तरह अब तक काफी विफल ही साबित हुआ है।
साथ ही, उत्तर प्रदेश के लोगों को यहाँ शीघ्र ही होने वाले विधानसभा आमचुनाव के मद्देनज़र उन्हें बहकाने व वरगलाने के लिये ही भाजपा व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं उनके केन्द्रीय मंत्रियों द्वारा लगातार दौरे करके छोटी से छोटी योजनाओं का शिलान्यास व अनेकों प्रकार की जो घोषणायें की जा रही हैं, वास्तव में वे सब लोकसभा आमचुनाव की तरह ही, ज़्यादातर को चुनाव के बाद ठण्डे बस्ते में डाल दिया जायेगा। इसलिए ख़ासकर प्रदेश की आमजनता को भाजपा के इस प्रकार के छलावे से सावधान रहने की जरूरत है।
इसके अलावा मायावती ने तुर्की में हुये दोहरे बम धमाके की तीव्र निन्दा करते हुये कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत सरकार को तुर्की के साथ खड़े होकर उसका सहयोग करना चाहिये।
साथ ही साथ मायावती ने नोटबंदी की ज्वलन्त राष्ट्रीय समस्या व उसके निदान के प्रति केन्द्र की भाजपा सरकार की असंवेदनशीलता के मद्देनजर संसद में पार्टी की भूमिका को देखते हुये उत्तर प्रदेश बी.एस.पी. के वरिष्ठ पदाधिकारियों की आज दिल्ली में ही बैठक की, जिसमें पार्टी संगठन व अन्य चुनावी तैयारियों की गहन समीक्षा की तथा सर्वसमाज में पार्टी के तेजी से बढ़ रहे जनाधार के सम्बन्ध में उनके कार्यों की सराहना की। जनहित के विभिन्न मुद्दों व जन ससमयाओं को लेकर पार्टी की संसद व संसद के बाहर भूमिका पर भी पार्टी की आज की बैठक में संतोष व्यक्त किया गया।

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