Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

पूरी तरह से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार जनदबाव में है : मायावती

 Vikas Tiwari |  2016-11-29 15:08:59.0

maywati

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. बसपा सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को लखनऊ में कहा कि अब यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पूरी सरकार व भाजपा नोटबन्दी के मामले में, भारी जनदबाव में है, जिस पर से ही, लोगों का ध्यान बाँटने के लिये ही इन्हांने अपना नया शिगूफा छोड़ते हुये अपने सांसदों व विधायकों से नोटबन्दी का दिनांक 8 नवम्बर से 31 दिसम्बर, 2016 तक का हिसाब-किताब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास जमा करने का बयान दिया है।
भाजपा के इस ध्यान बाँटो अभियान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये सुश्री मायावती जी ने अपने एक बयान में कहा कि भाजपा की यह एक और नाटकबाजी है तथा लोगों की आँखों में धूल झोंकने का प्रयास है, क्योंकि देश के लोगों में भाजपा के प्रति गोलमाल की जो आशंका उत्पन्न हुई है वह वास्तव में दिनांक 8 नवम्बर को 500 व 1000 रुपये की नोटबन्दी से पहले के दस महीने के दौरान् भाजपा द्वारा अपना अकूत धन देशभर में जमीन व अन्य सम्पत्ति आदि के खरीदने, बैंकों में धन जमा करने आदि को लेकर ख़ासकर है, जिसका सही समाधान किया जाना चाहिये, ना कि इधर-उधर की बातों से जनता का ध्यान बांटने का प्रयास करना चाहिये।

हालाँकि भाजपा व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार नोटबन्दी के मामले में व्यापक जनसमर्थन का दावा करते हुये नहीं थक रही है, परन्तु इस वास्तविकता को नजरअन्दाज नहीं कर पा रही है कि पूरे देश भर में करोड़ों ग़रीब, मजदूर, किसान, व्यापारी, कर्मचारी व आमजनता पिछले 21 दिनों से काफी ज्यादा परेशान हैं और उनकी मुसीबत थोड़ा भी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि केन्द्र सरकार का नोटबन्दी का अचानक लिया गया यह फैसला काफी अपरिपक्व है तथा इसकी तैयारी में जनहित का समुचित ध्यान नहीं रखा गया है और ना ही इसके दुष्परिणाम का सही अन्दाज़ा लगाया गया है।

मायावती ने कहा कि भाजपा व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नोटबन्दी के मामले में लाख आदर्शवादी बनने की कोशिश करें, लेकिन बड़े-बड़े पूँंजीपतियों व धन्नासेठों के हित में ही कार्य करने के उनके चाल, चरित्र व चेहरे पर पर्दा नहीं डाला जा सकता है।
साथ ही, इसके भी अनेकों साक्ष्य सामने आने लगे हैं कि नोटबन्दी से पहले इन्होंने अपने कालेधन को ठिकाने लगाया है। इसलिये भाजपा के सांसदों व विधायकों से नोटबन्दी के बाद के समय का हिसाब-किताब माँगना उतना मायने नहीं रखता है जितना कि दिनांक 8 नवम्बर से पहले के एक वर्ष का भाजपा का अपना हिसाब-किताब व निवेश आदि। इसलिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जनता की आशंकाओं को दूर करने के लिये जनापेक्षा के अनुरुप कार्य करते हुये भाजपा व इनके तमाम् बड़े नेताओं का ख़ासकर सन् 2016 का 8 नवम्बर से पहले का भी पूरा हिसाब-किताब तत्काल सार्वजनिक करना चाहिये।

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top