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STING VIDEO: मदन बिष्ट का कबूलनामा- हरीश रावत ने विधायकों को खरीदा!

 Tahlka News |  2016-05-08 09:17:43.0

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तहलका न्यूज ब्यूरो
देहरादून. 
उत्तराखण्ड में सियासी उठापटक और भाजपा व कांग्रेस के एक-दूसरे के आरोपों को बीच स्टिंग की सियासत एक बार फिर गर्मा गयी है। उत्तराखण्ड में 10 मई को सुप्रीम कोर्ट की देख-रेख में होने वाले बहुमत परीक्षण से ठीक पहले सामने आये इस स्टिंग वीडियो ने सूबे की राजनीति में उबाल ला दिया है।


ताजा स्टिंग, उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बेहद करीबी समझे जाने वाले मदन बिष्ट का है। टीवी चैनल समाचार प्लस के एडिटर इन चीफ उमेश कुमार द्वारा जारी किये गए इस स्टिंग में मदन सिंह उत्तराखण्ड में कांग्रेस के बागी विधायकों को एकजुट रखने के लिए करोड़ो रूपये देने का दावा करते दिखाई दे रहें हैं। मालूम हो कि इससे पहले उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का स्टिंग भी सामने आ चुका है, जिसकी जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है। यह स्टिंग भी पत्रकार उमेश द्वारा किया गया था। इसके बाद उत्तराखंड की राजनीति में भारी तूफान आ गया था।

इस नये स्टिंग में मदन बिष्ट कांग्रेस के बागी विधायक हरक सिंह को यह बताते हुए देखे जा सकते हैं कि किस तरह से हरीश रावत ने विधायकों को एकजुट रखने के लिए प्रत्येक को 25 लाख रूपये देने की पेशकश की है। मदन बिष्ट यह भी कहते सुने जा सकते हैं कि हरीश रावत ने राज्य के खनन पट्टों के करोड़ों रूपये एकत्र कर रखें है। हालांकि हरीश रावत के घर पर बने इस स्टिंग में केवल मदन सिंह का चेहरा ही दिखाई दे रहा है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं। यह वीडियों कब बनाया गया, यह साफ नहीं है।

12 बागियों को मिले 25 लाख
इस स्टिंग में कांग्रेसी विधायक मदन सिंह बिष्ट ने कयिब्चौन्काने वाले खुलासे किए हैं। उनके मुताबिक़ विधायकों को बीती 17-18 अप्रैल को 25-25 लाख खर्चे पानी के रूप में दिए गए ताकि वे हरीश रावत खेमे के साथ जुड़े रहें। मदन सिंह ने इस स्टिंग में खुलासा किया है कि यह पैसे 12 बागी विधायकों को दिए गए हैं। देखें वीडियो: 


https://www.youtube.com/watch?v=Yfbyv2ta41g

सच सामने आ चुका है: कोशियारी
बीजेपी नेता भगत सिंह कोशियारी ने स्टिंग ऑपरेशन पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, 'सच सामने आ चुका है। हमने कभी हाउस डिजॉल्व करने को नहीं कहा था। ये पहली घटना है जब मनी बिल पर सरकार फेल हुई है। स्पीकर ने गलत निर्णय लिया, उन्हें उसी दिन बर्खास्त कर देना चाहिए था।' कोशि‍यारी ने आगे कहा, 'स्पीकर अगर अपनी शक्ति‍यों का गलत इस्तेमाल करे तो क्या करना चाहिए। हरीश रावत हमसे कहते हैं कि बीजेपी खरीद-फरोख्त कर रही है लेकिन वो तो खुद इसमें लगे हैं। 25 लाख दे रहे इैं विधायकों को। इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या होगी। इसका मतलब विधायकों का सीएम पर विश्वास नहीं है।'

हरीश रावत ने लगाया फोन टैपिंग का आरोप
दूसरी तरफ, हरीश रावत ने आरोप लगाया है कि उनके और उनके सहयोगियों के फोन टैप किए जा रहे हैं। रावत ने कहा कि ये उनकी आजादी के अधिकार का उल्लंघन है। इस बीच हरीश रावत कैंप के विधायकों को धनौल्टी में कनाताल रिजॉर्ट में शिफ्ट किया गया है।

मदन सिंह बिष्ट का अलग आरोप
हरीश रावत कैंप के मदन सिंह बिष्ट ने राजपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है कि हरक सिंह रावत ने अपने सहयोगी के साथ मिलकर उन्हें धमकी दी और 10 मई को होने जा रहे फ्लोर टेस्ट के दौरान हरीश रावत के खिलाफ वोट करने के लिए कहा।

फ्लोर टेस्ट पर बीजेपी के सवाल
बीजेपी के अजय भट्ट ने कहा कि ये चौथा स्टिंग आया है। उन्होंने कहा कि मदन बिष्ट ने खुलासा किया है कि विधायकों को 12 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई है। उन्होंने कहा, 'इस स्थिति में फ्लोर टेस्ट कराया जा रहा है। मैं कोर्ट से ये देखने की अपील करता हूं कि ये लोग संविधान की रक्षा कैसे करेंगे। ये लोग पहले ही अपराध कर रहे हैं। हम उत्तराखंड तो बचाने की कोशिश कर रहे हैं। ये फ्लोर टेस्ट निष्पक्ष है या किसी के प्रभाव में कराया जा रहा है, इसकी जांच होनी चाहिए।'

हरक सिंह को नहीं थी स्टिंग का जानकारी
स्टिंग करने वाले मीडिया हाउस ने दावा किया है कि इस वीडियो में मदन सिंह बिष्ट कांग्रेस के बागी नेता हरक सिंह रावत से बात कर रहे हैं लेकिन रावत को इस स्टिंग की जानकारी नहीं है। मीडिया हाउस का दावा है कि स्टिंग शुरुआती 10 दिनों में किया गया है।

सीएम हरीश रावत भी फंस चुके हैं स्टिंग में
बीती 26 मार्च को इसी चैनल ने एक स्टिंग का वीडियो जारी किया था जिसमें सीएम हरीश रावत बागी विधायकों को पैसा ऑफर करते नजर आये थे। इसके बाद, उत्तराखंड के गवर्नर केके पॉल ने एक रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी। केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में प्रेसिडेंट रूल लगाने की सिफारिश की। इसके ठीक एक दिन बाद सूबे में प्रेसिडेंट रूल लगा दिया गया। साथ ही स्पीकर ने 9 बागी विधायकों को डिस्क्वालिफाई कर दिया।


गौरतलब है कि विधानसभा अध्यक्ष गोविंद कुंजवाल ने 27 मार्च को आदेश जारी कर पूर्व सीएम विजय बहुगुणा सहित नौ बागी विधायकों की सदस्यता निरस्त कर दी थी। हाईकोर्ट ने भी इस फैसले पर अपनी मोहर लगाई थी। बागियों ने विधानसभा अध्यक्ष के उसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।


न्यायमूर्ति ध्यानी की एकलपीठ में दायर याचिका में कहा गया कि बागियों ने पार्टी नहीं छोड़ी थी, सिर्फ सरकार के खिलाफ गए थे। साथ ही आरोप लगाया गया है कि भाजपा विधायक भीमलाल आर्य की सदस्यता खत्म करने के मामले में विधानसभा अध्यक्ष भेदभाव बरत रहे हैं।

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