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फिर जागा मोदी का दलित प्रेम,खुद को बताया अम्बेडकर का भक्त

 Girish Tiwari |  2016-09-02 16:57:17.0


modi2222नई दिल्ली
:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दलितों पर अत्याचार को राजनीतिक रंग दिए जाने के प्रयासों की निंदा की और कहा कि वह भारत में वंचितों के कल्याण के लिए समर्पित हैं। जाति आधारित भेदभाव एक सामाजिक समस्या है, जिसे पराजित करने की जरूरत है। टीवी चैनल सीएनएन न्यूज 18 पर शुक्रवार को प्रसारित साक्षात्कार में प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक, राजनीतिक और कर चोरी समेत कई मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए।

वह दलित मुद्दे पर काफी मुखर दिखे और हाल में दलित समुदाय के लोगों पर हुए हमलों की निंदा की। गुजरात के उना में एक मृत गाय की खाल उतारने पर स्वयंभू गोरक्षकों ने चार दलित युवाओं की बेरहमी से पिटाई की थी। इसका वीडियो वायरल होने के बाद पूरा देश हैरान हुआ था।


मोदी ने कहा, "जहां तक कुछ घटनाओं का सवाल है तो उनकी निंदा होनी चाहिए। सभ्य समाज में इस तरह की घटनाओं के लिए कोई जगह नहीं है, लेकिन इस तरह की हिंसा को रोकने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है, क्योंकि कानून व्यवस्था राज्य का विषय है।"

उन्होंने समाज में गहरी जड़ जमा चुकी इस सामाजिक समस्या को राजनीतिक रंग देने के प्रयासों का उपहास किया।

प्रधानमंत्री ने कहा, "कुछ लोग मुद्दों को चुन रहे हैं और मोदी को दोषी ठहरा रहे हैं। सामाजिक असंतुलन पर राजनीति करना समाज और पीढ़ियों से अन्याय के शिकार लोगों को हानि पहुंचना है।"

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को इस सच्चाई से परेशानी है कि मोदी दलितों के मसीहा बी.आर.अंबेडकर के भक्त हैं।

अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जाति का मुद्दा महत्वपूर्ण होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश में दलितों की एक बड़ी आबादी है। इस प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी साल 2002 से सत्ता में नहीं है। इसके अलावा पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भी अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

मोदी ने कहा कि भाजपा इन राज्यों में विधानसभा चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ेगी और वह रोजगार, शांति, एकता और सामाजिक न्याय पर अपना ध्यान केंद्रित करेगी।

प्रधानमंत्री ने इस तरह की किसी भी धारणा को सिरे से खारिज किया कि वह बदले की राजनीति का अनुसरण करते हैं।

जब उनसे पूछा गया कि काला धन पर निशाना साधते वक्त वह किसी भी 'वंश' को नहीं बख्शेंगे तो मोदी ने कहा कि उन्होंने राजनीतिक हिसाब चुकता करने के लिए कभी भी कोई संचिका नहीं खोली है।

आर्थिक मोर्चे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि जब साल 2014 में पदभार ग्रहण किया तो वह देश की आर्थिक हालत पर श्वेतपत्र लाना चाहते थे, लेकिन राष्ट्रहित में ऐसा करने से उन्होंने परहेज किया।

मोदी ने कहा कि अर्थव्यवस्था के बुरे दिन अब बीत चुके हैं। उन्होंने यह नहीं कहा कि अच्छे दिन आ गए हैं।

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