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परिवारवाद और दलबदलुओं के दबाव में है भाजपा के टिकट

 Utkarsh Sinha |  2017-01-13 06:52:52.0

परिवारवाद और दलबदलुओं के दबाव में है भाजपा के टिकट

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. जैसे जैसे भाजपा के टिकटों की घोषणा के दिन करीब आ रहे हाँ वैसे वैसे भाजपा में लम्बे समय से पार्टी का झन्डा उठाये और अब चुनावी मैदान में उतरने की प्रत्याशा रखने वाले खांटी कार्यकर्ताओं के माथे पर चिंता की लकीरे गहराती जा रही हैं. 403 सीटों पर करीब 8 हजार लोगो ने टिकट के लिए आवेदन किया है.

पार्टी कार्यकर्ताओं की चिंता की वजह कुछ बड़े नेताओं द्वारा अपने परिवार के लिए टिकट का दबाव बनाना और दूसरी पार्टियों से आ कर भाजपा में शामिल होने वालों का कद है. इन कार्यकर्ताओं की चिंता भी जायज है क्योंकि बीते 6 महीनो में कई दलों के कद्दावर नेता भाजपा में शामिल हुए हैं और इनमे कई सिटिंग विधायक भी हैं.

"परिवारवाद की सबसे मुखर आलोचक रही भाजपा अब खुद परिवारवाद की चपेट में आ गयी है. पार्टी के कई बड़े नेता अपने बेटे बहु से ले कर नाती पोतो तक के लिए टिकट का दबाव बनाये हुए हैं. राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, कलराज मिश्र सरीखे पुराने नेताओं के साथ साथ नवगतुंक रीता बहुगुणा जोशी, स्वामी प्रसाद मौर्या और बृजेश पाठक सरीखे नेता अपने परिजनों के लिए चुनावी टिकट मांग रहे हैं. इससे पहले रमापति राम त्रिपाठी और लालजी टंडन अपने बेटों को सदन में पहुँचाने में कामयाब हो चुके हैं. "

फिलहाल लगभग एक दर्जन ऐसी सीटें हैं जहाँ ये नेता अपने परिजनों के लिए टिकट मांग रहे हैं.

पार्टी सूत्रों का कहना है कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह अपने बेटे पंकज सिंह के लिए लखनऊ की किसी भी विधानसभा से टिकट की मांग कर रहे हैं. राजस्‍थान के राज्‍यपाल और यूपी के पूर्व मुख्‍यमंत्री कल्‍याण सिंह अपने नाती और एटा से सांसद राजवीर सिंह के पुत्र संजू के लिए बुलंदशहर डिबाई से टिकट मांग रहे हैं. मगर पार्टी ने उन्हें एटा की कोई सीट देखने को कहा था. पूर्व मुख्यमंत्री स्व. रामप्रकाश गुप्त के बेटे डा. राजीव लोचन भी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं तो केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र अपने बेटे अमित मिश्र के लिए टिकट हासिल करने की कोशिश में हैं. सांसद हुकुम सिंह कैराना से अपनी बेटी के लिए बहुत सक्रिय हैं.

पार्टी में ताजा ताजा शामिल होने वाले पूर्व बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या भी अपने करीबी अजीत यादव के लिए लगे हैं, साथ ही स्वामी प्रसाद अपनी बेटी संघमित्रा को भी भाजपा के टिकट पर लड़ाना चाह रहे हैं, कांग्रेस छोड़ कर आई रीता बहुगुणा जोशी अपने साथ साथ अपने बेटे अमित जोशी को इलाहाबाद से लड़ाने के मूड में हैं. बसपा से भाजपा में शामिल हुए सांसद ब्रजेश पाठक उन्‍नाव से पत्‍नी के लिए टिकट मांग रहे हैं.

इनमे कई ऐसी सीटें हैं जहाँ पार्टी के पुराने नेताओं और मेहमान नेताओं के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है. ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने टिकट की घोषणा के बाद उपजाने वाले आक्रोश को सम्हालने में भी कौशल दिखाने की बड़ी चुनौती होगी.

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