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ये था चुनाव आयोग के फैसले का आधार, अपनी ही गलतियों से हारे मुलायम

 Utkarsh Sinha |  2017-01-16 14:20:47.0

ये था चुनाव आयोग के फैसले का आधार, अपनी ही गलतियों से हारे मुलायम


उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. खुद की बनायीं गयी समाजवादी पार्टी से मुलायम सिंह यादव के बाहर होने की वजह खुद उनकी गलतिय ही बनी. मुलायम खेमा लगातार इस बात की दुहाई देता रहा कि अखिलेश खेमे द्वारा बुलाया गया सम्मलेन अवैध था मगर खुद मुलायम सिंह ने अपनी ही पार्टी के संविधान को इतनी बार नजरअंदाज किया था कि चुनाव आयोग ने उसे ही आधार बना लिया.

तहलका न्यूज के पास मौजूद चुनाव आयोग के आर्डर की कापी बताती है कि चुनाव आयोग ने मुलायम के मनमाने तरीके से पार्टी चलने को ही अपना मुख्य आधार बनाया.

अपने फैसले में चुनाव आयोग ने कहा है कि 24 जून 2014 के बाद से बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की कोई बैठक ही नहीं बुलाई थी जिसका जिक्र करते हुए पार्टी संविधान की धारा 15(10) का हवाला दिया गया है जिसके अनुसार हर दो महीने में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई जानी जरूरी है.

पार्टी संविधान की धारा 20 के अनुसार 7 सदस्यीय पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक के बाद ही पार्टी के प्रत्याशियों की घोषणा की जानी चाहिए मगर उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावो के लिए जब मुलायम ने उम्मीदवारों की घोषणा की थी तब पार्लियामेंट्री बोर्ड की कोई बैठक ही नहीं बुलाई गयी थी.



मुलायम सिंह की यही दो गलतियाँ पार्टी से उनके बेदखल होने की वजह बनी. इन सबके बीच रामगोपाल यादव की बड़ी भूमिका रही. पार्टी के गठन के बाद से ही यह सारे तकनीकी काम रामगोपाल ही करते रहे थे. उन्हें इन पेंचो का पहले ही से ज्ञान था. इसी लिए उन्होंने पार्टी की आम सभा की बैठक बुलाई और पार्टी उपाध्यक्ष किरणमय नंदा से उसकी अध्यक्षता कराई थी.

इस पूरी बहस में कांग्रेस और तेलगुदेशम के बंटवारे के कई सारे उदहारण दोनों पक्षों के वकीलों ने दिए . मगर सबसे महत्वपूर्ण उद्धरण सुप्रीम कोर्ट का सादिक अली (सुप्रा) केस बना और अंत में आयोग ने इसी केस को रेफेर करते हुए फैसला अखिलेश के पक्ष में दिया.

मुलायम की यही कमजोरी उन्हें उस पार्टी से बाहर कर गयी जिसे न सिर्फ उन्होंने खड़ा किया था बल्कि मेहनत से सींचा भी था. अब मुलायम सिंह के पास दो ही रास्ते बचे हैं. जिस तरह से फैसला आने के बाद अखिलेश यादव मुलायम से मिलने गए और उनके समर्थको ने मुलायम सिंह से साथ आने की भावनात्मक अपील शुरू की है उसके बाद वे बीती बाते भुला कर अखिलेश के साथ आ जाए या फिर अपनी अलग पार्टी बनाये. इन सबके बीच सबसे ख़राब स्थिति शिवपाल सिंह यादव की हो गयी है जिनके पास अब राजनितिक रूप से कुछ नहीं बचा है.

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