Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

66 सालो में जनसंघ के 2 विधायक से भाजपा के 312 विधायको का सफ़र

 Utkarsh Sinha |  2017-03-15 12:17:50.0

66 सालो में जनसंघ के 2 विधायक से भाजपा के 312 विधायको का सफ़र

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ : कभी जनसंघ के अवतार में रही आज की भारतीय जनता पार्टी ने यूपी में 2 सीट से 312 सीटो का सफ़र तय कर लिया है. इस छलांग के लिए भाजपा को साढ़े चार दशको का समय जरूर लगा लेकिन 2017 की जीत ने यूपी विधान सभा के रिकार्ड बुक अपना नाम दर्ज करा लिया.

आजादी के बाद 1951 में जब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ के रूप में अपना राजनीतिक प्रधिनिधित्व दिया तब जनसंघ को यूपी के मतदाताओं में विश्वास जगाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी. 1952 में जनसंघ के शारदा भक्त सिंह और उम्मीद सिंह के रूप में 2 विधायक जीते थे. इसके बाद चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व में बही संविद सरकार में समाजवादियों के साथ जनसंघ भी शामिल हुई और राम प्रकाश गुप्ता उप मुख्यमंत्री भी बने. जब इंदिरा गाँधी के आपातकाल के फैसले के बाद जय प्रकाश नारायण ने सभी विपक्षी दलों को एक होने का आह्वान किया तब भारतीय जनसंघ भी उसका हिस्सा बना और नवगठित जनता पार्टी में जनसंघ का विलय हो गया. जानता पार्टी का प्रयोग महज तीन वर्षो में ही असफल हो गया और जनता पार्टी टूट गयी. इसके बाद 1980 में भारतीय जनता पार्टी अस्तित्व में आई जो की मूल जनसंघ का ही नया रूप थी.

यूपी में भारतीय जनता पार्टी को पहली कामयाबी राम मंदिर आन्दोलन के कारण मिली और 1991 में कल्याण सिंह यूपी के मुख्यमंत्री बनाने वाले पहले भाजपा नेता बने,इसके बाद बाबरी ढांचा गिरा और कल्याण सिंह की सरकार भी. इसी समय सपा और बसपा भी मजबूत होने लगी. कुछ वर्षो बाद भाजपा ने फिर से यूपी में सरकार बनायीं और 1997 से ले कर 2001 तक भाजपा का शासन यूपी रहा. इस बीच कल्याण सिंह (दो बार) राम प्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री रहे.

लेकिन 2002 के बाद से 2017 तक भाजपा यूपी की सत्ता से न सिर्फ बाहर रही बल्कि 2014 के लोकसभा चुनावो के पूर्व तक यूपी में भाजपा बहुत ही कंमजोर भी मानी जाती रही. दिशाहीन नेतृत्व और लचर पार्टी संगठन इसका जिम्मेदार था. भाजपा में नरेन्द्र मोदी युग के बाद यूपी भाजपा में भी नयी उर्जा का संचार हुआ. और पार्टी ने लोकसभा चुनावो में बड़ी जीत हासिल कर नया इतिहास रच दिया. इसके बाद 2017 की मोदी लहर ने राम लहर को भी पीछे छोड़ते हुए 300 का आंकड़ा पार कर लिया.

इस एतिहासिक जीत के बाद भाजपा से अपेक्षाएं भी बढ़ी हुयी हैं. बड़ी सियासी जीत की इस जिम्मेदारी को लेकर भाजपा नेतृत्व गंभीर भी है और आगे की चुनौतियों का आंकलन करने में पार्टी लगी है. प्रदेश नेतृत्व को बखूबी पता है की चुनौतियां भी कम नहीं हैं और इतने बड़े जनसमर्थन का नेतृत्व करने और प्रदेश की पेचीदा जातीय ब्यवस्था के मद्देनजर एक उपयोक्त चेहरे को सामने लाना एक फिलहाल एक गंभीर विषय है. जातीयता और क्षेत्रीयता के आधार पर मंत्रिमंडल में नुमाईंदगी देते हुए अपनी घोषणाओं को जनता के बीच पहुंचकर उनका विश्वास जीतने की चुनौती है और भाजपा के लिए यह एक गंभीर चिंतन का विषय है. शायद इसीलिए बीजेपी मुख्यमंत्री का चेहरा चुनने में कोई जल्दीबाजी नहीं दिखा रही है.

Tags:    

Utkarsh Sinha ( 394 )

Tahlka News Contributors help bring you the latest news around you.


  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top