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मोदी के संसदीय क्षेत्र में भाजपा गठबंधन का एसिड टेस्ट

 Utkarsh Sinha |  2017-01-25 11:28:07.0

मोदी के संसदीय क्षेत्र में भाजपा गठबंधन का एसिड टेस्ट


उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन भले ही भाजपा को रोकने के नाम पर बना हो मगर भाजपा ने जिन दलों के साथ गठबंधन किया है वह पूरी तरह से जातीय समीकरणों पर आधारित है. नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की 8 विधान सभा सीटों पर इस गठबंधन की ताकत का भी एसिड टेस्ट होगा. जिस संसदीय सीट से ऐतिहासिक जीत हासिल कर मोदी देश के प्रधानमंत्री बने थे अगर विधानसभा चुनावो में उसे आशातीत सफलता नहीं मिलती तो विपक्ष इसे भी मोदी की नाकामयाबी से जोड़ने से नहीं चूकेगा.

मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भाजपा शहरी इलाकों की 3 सीटे तो लम्बे समय से जीतती रही है मगर बाहरी इलाकों में उसे अक्सर हार का सामना करना पड़ता रहा है. फिलहाल भाजपा के पार तकनीकी रूप से 4 सीटे हैं. कैंट, शहर दक्षिणी और शहर उत्तरी की सीटो पर उसे 2012 में सफलता मिली थी और शिवपुर से बसपा के टिकट पर जीते उदय लाल मौर्य अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं.

कांग्रेस के पास पिंडरा की सीट है जहाँ से दबंग माने जाने वाले अजय राय विधायक हैं. 2014 में अजय राय मोदी के खिलाफ वाराणसी से उम्मीदवार भी बने थे. 2012 में अपना दल की अनुप्रिया पटेल ने रोहनिया सीट पर जीत हासिल कर विधानसभा में अपनी जगह बनायीं थी. 2014 के संसदीय चुनावो में अनुप्रिया के अपना दल का गठबंधन भाजपा से हुआ और वे मिर्जापुर से सांसद बन गयी, उपचुनावों में यह सीट समाजवादी पार्टी ने अपना दल से छीन ली. इसके अलावा सेवापुरी से भी समाजवादी पार्टी का ही विधायक है. और अजगरा पर फिलहाल बसपा का कब्ज़ा है.

लम्बे समय से विधान सभा में भाजपा का चेहरा रहे शहर दक्षिणी से विधायक श्यामदेव राय चौधरी और कैंट की विधायक ज्योत्सना श्रीवास्तव को इस बार भाजपा ने टिकट नहीं दिया है. शहर दक्षिणी से नीलकंठ तिवारी को टिकट मिला है तो कैंट से ज्योत्सना श्रीवास्तव के बेटे सौरभ श्रीवास्तव को पार्टी ने मैदान में उतारा है. शहर उत्तरी से रविन्द्र जायसवाल पर एक बार फिर पार्टी ने भरोसा जताया है. जबकि बसपा से भाजपा में आये उदय लाल मौर्या की जगह शिवपुर सीट से अनिल राजभर को टिकट दिया गया है.

भाजपा ने जातीय समीकरण साधने के लिए उर वोट आर अच्छा प्रभाव रखने वाली अनुप्रिया पटेल के अपना दल और राजभर वोटो पर पकड़ वाले ओम प्रकाश राजभर की भारतीय समाज पार्टी से समझौता किया है. भासपा को समझौते में अजगरा सीट दी गयी है.

गठबंधन में शामिल अपना दल के सामने स्थिति अभी साफ़ नहीं है रोहनिया सीट को ले कर अपना दल अपना दावा कर रहा है जबकि इस सीट पर भाजपा ने सुरेन्द्र नाथ ओढ़े को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है. अपना दल में इसे ले कर आक्रोश है और वह इस सीट को छोड़ने को तैयार नहीं है. पिंडरा की सीट भी बहजापा अपने साथी दलों को ही देना चाहती है.

बीते विधानसभा चुनावो में कांग्रेस ने एक सीट जीती थी और शहर दक्षिणी और कैंट में उसके प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे. इस बार कांग्रेस और सपा का गठबंधन है. इन दोनों पार्टियों का भी वाराणसी में आधार काफी मजबूत है और इस गठबंधन के बाद भाजपा की राह आसान नहीं होने वाली. वाराणसी सीट के महत्व को देखते हुए सपा कांग्रेस गठबंधन अपनी पूरी ताकत इन 8 सीटों पर कोई कसर नहीं छोड़ेगी. वही भाजपा के गठबंधन का भी एसिड टेस्ट इसी जिले में होना है जहाँ गठबंधन के तीनो दल एक साथ लड़ रहे हैं.

सवाल भी आखिर सीधे मोदी को चुनौती देने का है.

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