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हिंदुस्तान के साथ पाकिस्तान में भी मनाया जायेगा शहीदी दिवस

 Sonalika Azad |  2017-03-23 04:19:28.0

हिंदुस्तान के साथ पाकिस्तान में भी मनाया जायेगा शहीदी दिवस

तहलका न्यूज़ ब्यूरो.
नई दिल्ली.
23 मार्च है और आज के ही दिन 1931 में भगत सिंह, सुखबीर और राजगुरू को फांसी दी गयी थी. ब्रिटिश ने तीनों भारतीय क्रांतिकारियों के शवों को गुपचुप तरीके से करके उनकी अस्थियां सतलज नहीं में बहा दीं. अंग्रेजों की लाख कोशिशों के बावजूद भगत सिंह अपने विचारों के रूप में आज भी हमारे बीच में मौजूद हैं. खुद भगत सिंह ने लिखा है, व्‍यक्तियों को कुचलकर भी आप उनके विचार नहीं मार सकते हैं.


वही हिंदुस्तान के साथ पाकिस्तान न के लायलपुर में भी शहीद-ए-आजम भगत सिंह के शहीदी दिवस पर समारोह होने है. लाहौर हाईकोर्ट ने कड़ी सुरक्षा देने के आदेश जारी किए हैं. अदालत के आदेश की कॉपी मिलने के बाद मंगलवार को एडवोकेट इम्तियाज रशीद कुरैशी ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की.


पाकिस्तानी रिकॉर्ड के अनुसार भगत सिंह एक दहशदगर्द है, जिसके चलते उनसे संबंधित कोई भी कार्यक्रम करवाने पर पाबंदी है. भगत सिह को बेगुनाह साबित करने के लिए भगत सिह मेमोरियल फाउंडेशन प्रयासरत है, जिसके लिए उन्होंने केस भी फाइल कर रखा है. संस्था के प्रमुख एडवोकेट कुरैशी ने लाहौर से फोन पर बताया कि अदालत ने भगत सिह के चाहने वालों की भावनाओं के मद्देनजर फैसला दिया है.



आपको ये जानकर शायद हैरत होगी कि महज 12 साल की उम्र में बगैर किसी को बताए भगत सिंह जलियांवाला बाग चले गए थे और वहां की मिट्टी लेकर घर लौटे थे. 16 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को लिखे पत्र में साफ कह दिया था कि उनका जीवन देश सेवा को समर्पित है.





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