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गुंडा राज के खिलाफ जीती भाजपा कैसे सम्हालेगी अपने गुंडों को !

 Utkarsh Sinha |  2017-03-16 08:09:02.0

गुंडा राज के खिलाफ जीती भाजपा कैसे सम्हालेगी अपने गुंडों को !


तहलका न्यूज ब्यूरो

लखनऊ. यूपी विधान सभा के चुनावी अभियान में समाजवादी पार्टी के गुंडा राज को बड़ा मुद्दा बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी को उसके ही कुछ नेता नीचा दिखने में जुट गए हैं. 11 मार्च को आये नतीजो के बाद तीन ऐसी बड़ी घटनाएँ भाजपा नेताओं ने की हैं जो गुंडा राज के उसके नारे के खिलाफ जाता दिखाई दे रहा है. ऐसे में भाजपा के उस दावे पर भी सवाल उठने लगे हैं जिसमे वह सूबे में कानून का राज स्थापित करने की बात कहती रही है.

पहली घटना मिर्जापुर में हुयी जहाँ भाजपा ने नव निर्वाचित विधायक आरके पटेल के भतीजे ने खुलेआम गुंडागर्दी की और घर में घुस कर दो महिलाओं की जम कर पिटाई की. ये दोनों महिलाएं मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखती थी और उनके परिजनों का किसी मामले में आरके पटेल के भतीजे से विवाद चल रहा था. विधायक के भतीजे ने चुनावी नतीजे आने के अगले ही दिन इस कांड को अंजाम दे दिया और भाजपा के सुशासन के नारे की धज्जियां उड़ा दी.

इसके बाद आगरा के एक विधायक ने अपने चहेते को थाने से छुडवाने के लिए सीओ को फोन पर खूब धमकियाँ दी. इसका आडिओ भी वायरल हुआ और भाजपा की खूब किरकिरी हुई और उस दावे पर भी सवाल खड़ा हुआ जिसमे कहा जाता था की पुलिस को खुल कर काम काज की छूट होगी.

तीसरी घटना गोंडा में हुयी जहाँ भाजपा सांसद ब्रज भूषण शरण सिंह के गुर्गो ने सपा नेता ओर पूर्व मंत्री पंडित सिंह के नजदीकी सहयोगी देवेन्द्र यादव पर तब हमला कर दिया जब वे सुबह मंदिर से पूजा कर घर जा रहे थे. इसके बाद दोनों पक्षों में संघर्ष इतना उग्र हो गया कि हथगोले फेंके गए और कई रौंद फायरिंग भी हुयी. इस घटना ने भी भयमुक्त समाज के दावे पर दाग लगा दिया.

आपसी रंजिश से भरे इन मामलों के बाद सबसे खतरनाक घटना बरेली में हुयी है . बरेली के पास एक गांव में कुछ पोस्टर लगाये गये हैं, जिनमें मुस्लिम लोगों को वह इलाका तुरंत छोड़ने का आदेश दिया गया है. इस पोस्टर में लिखा है कि अब उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बन गई है, तो उत्तर प्रदेश के हिंदुओं को मुस्लिमों के साथ वही करना चाहिए जो कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं. हालांकि पुलिस के द्वारा कई पोस्टरों को हटा दिया गया है, लेकिन अभी भी कुछ पोस्टर लगे हुए हैं. इसके साथ ही सबका साथ सबका विकास का नारा भी दागदार हो गया.

भाजपा को यूपी में प्रचंड बहुमत मिला है और उसकी एक बड़ी वजह समाजवादी सरकार के समय ख़राब कानून व्यवस्था का मुद्दा रहा. नतीजे आने के 6 दिन बाद तक पार्टी अपना मुख्यमंत्री तय नहीं कर सकी है. मतदाताओं की उम्मीदे भाजपा के नारों और दावों से जुडी हुयी हैं. अब अगर ऐसी घटनाएँ हर रोज सामने आएँगी तो भाजपा के वादे और दावों पर सवाल उठेगा ही.

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