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यूपी की सियासत में बढ़ा महिलाओं का दबदबा

 Kirti |  2017-03-09 11:07:33.0

यूपी की सियासत में बढ़ा महिलाओं का दबदबा

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में ऐसे कई चेहरे सामने आये जो पहले गुमनाम थे. इसमें ऐसे भी चेहरे हैं जिनकी सियासत में पहचान तो पहले भी थी लेकिन सामने आने का मौका पहली बार मिला है. आज हम ऐसे ही कुछ चेहरों पर नजर डाल रहें है. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी और कन्नौज से सांसद डिम्पल यादव, अनुप्रिया पटेल , स्वाति सिंह व अपर्णा यादव ने अपने अपने दलों के लिए बहुत महनत की.


सांसद, डिम्पल यादव


समाजवादी पार्टी में कलह होने के बाद यूपी चुनाव में समाजवादी पार्टी की पूरी जिम्‍मेदारी अखिलेश यादव के कंधों पर आ गई. जिसमें उनका साथ डिंपल ने बखूबी निभाया. ब्रैंड अखिलेश को स्थापित भी डिम्पल यादव को प्रमुख चेहरे के तौरपर जगह मिली. डिंपल ने चुनाव में 33 रैलियां की हैं. हर चरण में जनता बीच जाकर सपा प्रत्‍याशियों के लिए वोट मांगे. साथ ही पीएम मोदी से लेकर मायावती तक सभी विरोधियों को करारा जवाब भी दिया. डिंपल ने इस दौरान मीडिया और विश्लेषकों का ध्यान खिंचा है. इसके अलावा सपा के पक्ष में महिला वोटरों को लामबंद करने की रणनीति की अगुवाई की है. मंच से संवादात्मक शैली व भावनात्मक संवाद के जरिये डिम्पल ने कहीं बहू तो कहीं बेटी के तौर पर वोट मांगा है. इस चुनाव में डिम्पल यादव प्रमुख स्टार प्रचार के तौर पर उभरी है.


छोटी बहू, अपर्णा यादव


सपा सरंक्षक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव भी इस बार विधानसभा चुनाव में लखनऊ की कैंट सीट से अपनी किस्‍मत आजमा रही हैं. 26 साल की अपर्णा लखनऊ कैंट से सपा उम्मीदवार हैं. बता दें कि लखनऊ कैंट इलाके में अपर्णा का जन्म हुआ और इसी इलाके से वो अपनी राजनीतिक पारी शुरूआत करने जा रही हैं. हालांकि, लखनऊ कैंट सीट पर समाजवादी पार्टी कभी नहीं जीती है और इस बार अपर्णा का मुकाबला कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुई रीता बहुगुणा जोशी से है.


अनुप्रिया पटेल 'अध्यक्ष' अपना दल


अनुप्रिया पटेल भारत की सोलहवीं लोकसभा में सांसद हैं. 2014 के चुनावों में इन्होंने उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर सीट से चुनाव जीता था. अनुप्रिया पटेल मोदी सरकार की सबसे युवा मंत्री हैं तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री के रूप में कार्यरत है. 2012 में अनुप्रिया पटेल वाराणसी की रोहनिया सीट से विधायक बनकर आई उसी समय से उनका सियासी ग्राफ उठने लगा था जब उनकी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी से गठबंधन किया था. हालांकि अनुप्रिया एक साल में ज्यादा चर्चा में पार्टी को लेकर अपनी माँ से विवाद के चलते रहीं. बीजेपी ने उनको केंद्र सरकार में मंत्री बनाकर उनके कद को और मजबूत किया. इस विधानसभा चुनाव में वह 12 सीटें लेकर यूपी में बीजेपी की सबसे बड़ी गठबंधन सहयोगी हैं. बीजेपी ने अपने कई मंचो पर मुख्य वक्ता व स्टार प्रचारक के तौर पर अनुप्रिया की अगुवाई की. इस चुनाव में अनुप्रिया के कद को और विस्तार मिला है.


स्वाति सिंह, अध्यक्ष, बीजेपी महिला मोर्चा


लखनऊ में सरोजनीनगर विधानसभा सीट से बीजेपी प्रत्‍याशी और पूर्व भाजपा नेता दयाशंकर की पत्‍नी स्‍वाती सिंह चुनाव से पहले घर तक ही सीमित थी. लेकिन 20 जुलाई 2016 को घटे एक वाकये ने उन्‍हें राजनीति में आने पर मजबूर दिया. दरअसल, पूर्व यूपी बीजेपी उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने मायावती के लिए आपत्तिजनक शब्द कहे और बीएसपी ने इसे मुद्दा बना लिया. मायावती ने इसे भुनाया और उनके समर्थक हजरतगंज की सड़कों पर प्रदर्शन को उतर गए. बीएसपी के बड़े नेताओं में दयाशंकर की पत्नी एवं बेटी के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया. इस पर खफा दयाशंकर की पत्नी स्‍वाती ने घर की दहलीज लांघ सड़क पर उतरीं तो उन्होंने सियासत के समीकरण बदल दिए. परिवार की अस्मिता की लड़ाई को बीजेपी ने बेटी के सम्मान में बदला और माया का दांव पलटने में स्वाति मुख्य चेहरा बन गई हैं.





























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Kirti ( 2104 )

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