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हिंदुत्व के उभार के जरिये जीत का रास्ता खोज रही है भाजपा

 Utkarsh Sinha |  2017-02-06 08:52:04.0

हिंदुत्व के उभार के जरिये जीत का रास्ता खोज रही है भाजपा

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. जैसे जैसे चुनावी रंग चढ़ रहा है वैसे वैसे भाजपा के शीर्ष नेताओं का दल ऐसे बयानों को धार देने में जुटने लगा है जो हिंदुत्व की राजनीति को और पुख्ता कर सके. भाजपा के रणनीतिकारो का मानना है कि पहले चरण के मतदान में यदि ध्रुवीकरण की खबरे आने लगे तो बाकी के चरणों में भी इसका असर और ज्यादा होगा और राहे आसान हो जाएँगी.

बीते 4 फ़रवरी से नरेन्द्र मोदी की रैलियों की शुरुआत के बाद भाजपा ने दो तरफ़ा बयांन देने शुरू किये हैं, प्रधानमंत्री खुद तो विकास और भ्रष्टाचार के अपने एजेंडे पर बोल रहे हैं मगर पश्चिमी क्षेत्रों में प्रचार अभियान पर निकले उनके नेता और लखनऊ में आकर बयांन देने वाले नेता हर वो मुद्दे उठाने में लगे हैं जो साम्रदायिक ध्रुवीकरण को मजबूत कर सके.

पहले और दुसरे चरण के वोटिंग में वे इलाके शामिल हैं जो 2013 के दंगो में बुरी तरह से प्रभावित रहे. दंगो की आंच को ठंडा करने के लिए तो कोशिशे कम हुयी मगर उसकी आंच बनी रहे इसकी कोशिशे अब तक जारी हैं. भाजपा के फायर ब्रांड हिंदूवादी नेता योगी आदित्यनाथ स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल है. योगी की हर सभा में एजेंडा एक ही होता है, हिन्दुओं की सुरक्षा और मुस्लिम तुष्टिकरण , वे विकास के मामले पर ज्यादा नहीं नहीं बोलते लेकिन कैराना के पलायन, और कैराना को कश्मीर बनाये जाने की बात जोर शोर से उठाने में लगे हैं, खुद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या भी इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं, हलाकि सावधानी बरतते हुए ये नेता इसे कानून व्यवस्था का सवाल बता रहे हैं मगर इसके पीछे छुपा एजेंडा हिन्दुओं को ध्रुवीकृत करना ही है. मुजफ्फरनगर दंगो से चर्चा में आये संगीत सोम और संजीव बालियाँन भी इसी लाईन को आगे बढा रहे हैं.उनके भाषणों में दंगो का जिक्र होता है और फिर बात हिन्दुओं की सुरक्षा पर आ जाति है. संगीत सोम ने तो अपनी प्रचार वैन में उस समय के वीडियो फुटेज भी दिखने शुरू कर दिए थे मगर बाद में चुनाव आयोग ने इसका संज्ञान लेते हुए इसे रोक दिया.

दूसरी तरफ राजधानी लखनऊ में आ कर रोज मीडिया से बात करने वाले मोदी मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य भी अपनी सरकार की उपलब्धियों के साथ साथ, मुस्लिम महिलाओं के तीन तलाक, स्लाटर हॉउस और राम मंदिर के मुद्दे को गर्माने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे. स्मृति ईरानी और रवि शंकर प्रसाद ने तीन तलाक मामले पर राहुल और अखिलेश का बयान माँगा. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और विनय कटियार लगातार राम मंदिर का मुद्दा उठाने में लगे हैं.

पहले दो चरणों की कई सीटें ऐसी हैं जहाँ मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में मौजूद हैं. मायावती ने यहाँ मुस्लिम कार्ड खेला है. ऐसे में ध्रुवीकरण ही ऐसा अस्त्र है जो लडाई को भाजपा के पक्ष में मोड़ सकता है. हालाकि 2013 के दंगो में बदनाम हुए जाट समुदाय भाजपा से काफी खफा नजर आ रहे हैं भाजपा ने हलाकि 17 सीटो पर जाट उम्मीदवार जरुर उतारे हैं मगर अभी तक जाट वोटरों का रुझान उसकी तरफ बनता नहीं दिखाई दे रहा. अति पिछड़ा वर्ग ही भाजपा की उम्मीद है. मगर इसकी संख्या 20 प्रतिशत से कम है और ऐसे में बिना हिंदुत्व की राह पकडे भाजपा के लिए जिताऊ समीकरण नामुमकिन लगता है.

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Utkarsh Sinha ( 394 )

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