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सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के लिए भारत छोड़ सकता है वीटो पावर

 Sonalika Azad |  2017-03-09 03:58:35.0

सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के लिए भारत छोड़ सकता है वीटो पावर

तहलका न्यूज़ ब्यूरो.
नयी दिल्ली. युक्त राष्ट्र सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के प्रयास के तहत भारत ने कहा है कि वह सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के तौर पर तब तक वीटो का अधिकार नहीं होने के विकल्प को लिए भी तैयार हैं जब तक इस बारे में कोई फैसला नहीं हो जाता है. जी-4 में भारत सहित ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं.


सुरक्षा परिषद के विस्तार की चर्चा कई दशकों से चल रही है. भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान इस शक्तिशाली संस्था के स्थायी सदस्य बनने के प्रबल दावेदार हैं. ये देश सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार की पैरोकारी कर रहे हैं. साथ ही, एक-दूसरे की दावेदारी का भी समर्थन कर रहे हैं. इनके संयुक्त प्रतिनिधि के तौर पर भारत के राजनयिक सैयद अकबरुद्दीन ने वीटो को लेकर दावा फिलहाल छोड़ने के फैसले की जानकारी दी.

1945 में गठित सुरक्षा परिषद में चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका पांच स्थायी सदस्य हैं. 10 अस्थायी सदस्यों का चुनाव दो वर्ष के लिए किया जाता है. स्थायी सदस्यता के भारत के प्रयासों में चीन और पाकिस्तान अड़ंगा डालते रहे हैं.


जी-4 ने एक बयान में कहा, इस बात से अवगत हैं कि आगे बढ़ने के लिए कोई दूसरा तरीका नहीं है लेकिन इसके साथ ही हम संयुक्त राष्ट्र में सुधार के लिए नए विचारों का स्वागत करते हैं.' उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अभी तक उन्हें कोई प्रगतिशील विचार सुनने को नहीं मिला है और कुछ देश पुराने ठुकराए गए विचारों को दोबारा पेश कर रहे हैं. बयान में कहा गया कि उनका मानना है कि सुरक्षा परिषद में स्थाई और गैर स्थाई सदस्यों के बीच ''प्रभाव का असंतुलन' है और गैर स्थाई श्रेणी में विस्तार करने भर से समस्या हल नहीं होगी.

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