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लड़ाकू विमान डील में रूस के सामने भारत ने रखी ये शर्त

 Sonalika Azad |  2017-03-09 04:37:21.0

लड़ाकू विमान डील में रूस के सामने भारत ने रखी ये शर्त

तहलका न्यूज़ ब्यूरो.

नयी दिल्ली. रूस से हजारो करोड़ में सुखोई लड़ाकू विमान खरीदने के बाद भी भारत इस विमान को खुद मैन्यूफैक्चर नहीं कर पाया. वजह इस डील में रूस ने भारत को इस लड़ाकू विमान की मैन्यूफैक्चरिंग के लिए जरूरी टेक्नोलॉजी नहीं दी थी.

अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भारत को रूस से नवीनतम पांचवे जनरेशन का लड़ाकू विमान खरीदना है. भारत सरकार ने फैसला लिया है कि इस बार रूस के साथ डील इस बात पर निर्भर करेगी कि वह भारत में मैन्यूफैक्चरिंग के लिए जरूरी सभी टेक्नोलॉजी लड़ाकू विमान के साथ देगी.

सूत्रों का कहना है कि यह फैसला शीर्ष स्तर से लिया गया है ताकि सुखोई-30MKI जेट विमानों की डील में हुई गलती को दोहराया न जा सके. 55,717 करोड़ रुपये की सुखोई डील में भारत की ओर से सबसे बड़ी चूक यह हुई थी कि वह रूस से पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण नहीं कर पाया था. यदि ऐसा होता तो भारत की घरेलू स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में इजाफा होता.

सूत्र ने बताया, 'रूस के सहयोग से तैयार हो रहे 272 सुखोई विमानों में से अब तक 240 की मैन्युफैक्चरिंग एचएएल कर चुका है. हालांकि एचएएल सिर्फ असेंबलिंग कर रहा है और सभी पार्ट्स का आयात रूस से ही किया गया है. अब भी एचएएल अपने स्तर पर सुखोई की मैन्युफैक्चरिंग नहीं कर सकता है.

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