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मोदी के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं अखिलेश, अल्पेश और जिग्नेश

 Utkarsh Sinha |  2017-01-18 12:20:37.0

मोदी के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं अखिलेश, अल्पेश और जिग्नेश

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ . 2014 में भारतीय राजनीतिक फलक पर अपनी बेमिसाल चमक से चकाचौंध कर देने वाले नरेन्द्र मोदी को तीन युवाओं से बड़ी चुनौती मिल रही है. ये तीनो युवा मोदी के गृह क्षेत्र और कर्म क्षेत्र से ही उभर रहे हैं. यूपी से संसद में पहुंचे नरेन्द्र मोदी को यूपी के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से विकास के एजेंडे पर कड़ी चुनौती मिल रही है और फिलहाल यूपी का चुनाव मोदी बनाम अखिलेश होता दिख रहा है, तो वही 12 साल तक गुजरात के सीएम रहने वाले नरेन्द्र मोदी को उनके ही गृह राज्य गुजरात के दो युवा जिग्नेश मेवानी और अल्पेश ठाकोर सामाजिक न्याय के मुद्दे पर घेरने में लगे हैं.

अखिलेश यादव जहाँ पार्टी पालिटिक्स में मोदी की चुनौती बने हैं तो वहीँ जिग्नेश और अल्पेश मोदी की सामाजिक छवि पर प्रहार करने में लगे हैं.

गुजरात के ऊना में दलित अत्याचार के बाद मैदान में कूदे जिग्नेश मेवानी ने 'दलित अत्याचार लड़त समिति' के जरिये अपना अभियान चलाया है. राजनीति के मैदान में आने के सवाल से जिग्‍नेश मेवानी दूर भागते हिहं, जिग्नेश का कहना है – "मैं सक्रिय राजनीति में नहीं आऊंगा, लेकिन बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोलने की पूरी तैयारी है. हार्दिक पटेल भी आया है, और मेरी कोशिश होगी कि हम साथ आएं और दलितों, पिछड़ों, किसानों और भूमिहीनों के साथ मिलकर एक साझा मोर्चा तैयार करें."

हालाकि जिग्नेश यह भी साफ़ कर देते हैं कि, नई पार्टी बनाने की मेरी कोई मंशा नहीं है, ना तो मैं कांग्रेस के साथ जा रहा हूं, ना ही आप के, लेकिन बीजेपी को घेरने की योजना पर काम चल रहा है, और कुछ दिन बाद इस प्रयास को देखेंगे. हार्दिक पटेल की "अनामत आंदोलन समिति" भी जिग्नेश का साथ देने के लिए तैयार है उसके प्रवक्ता का कहना है – "हां, हम जिग्‍नेश के साथ हैं, और कई मुद्दों पर मिलकर सरकार के खिलाफ जंग छेड़ेंगे. हमारी कोशिश होगी कि हम जल्‍द ही मिलकर साथ आएं."

इसी तरह अल्पेश ठाकोर भी युवा हैं और बेरोजगारी के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने में लगे हैं. अल्पेश ओबीसी वर्ग से आते हैं और उनके सम्मेलनों में युवाओं की भारी भीड़ भी जुट रही है. आरक्षण, बेरोजगारी युवाओं को छूने वाले मुद्दे हैं और इन्ही मुद्दों को जोरशोर से उठाया जा रहा है जिससे युवा वर्ग अपने भीतर भविष्य के सपने को संजोये इन्हें समर्थन दे रहा है.

बीते दिनों अल्पेश के नेतृत्व में जब शराबबंदी के खिलाफ मुहीम छेड़ी गई तो उसके दबाव में गुजरात सरकार को कानून सख्त बनाना पड़ा. यह मुद्दा उनके रिपोर्ट कार्ड में एक सफलता के रूप में दर्ज है. वो मुद्दा अभी शांत भी नहीं हुआ था कि उन्‍होंने बेरोजगारी के मुद्दे पर राग छेड़ा. यह भी ऐसा विषय है जो समाज के हर कोने को असर करें. हार्दिक पटेल के पाटीदार आन्दोलन से इतर अल्पेश ने सिर्फ अपने समुदाय से आगे बढ़ कर पाटीदार, आदिवासी, दलित, मुस्लिम सभी तबको को जोड़ कर आगे बढ़ रहे हैं.

यूपी के चुनावो में अखिलेश से मोदी का मुकाबला होगा और आने वाले साल में गुजरात में मोदी को अल्पेश और जिग्नेश की हवा का मुकाबला करना होगा. यह देखना दिलचस्प होगा कि इन तीन युवाओं के सामने मोदी अपनी चमक कैसे बरक़रार रखते हैं.

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