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पहले चरण के चुनाव में "जाट" खडी न कर दे भाजपा की खाट

 Utkarsh Sinha |  2017-02-10 10:13:25.0

पहले चरण के चुनाव में जाट खडी न कर दे भाजपा की खाट


उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. यूपी विधान सभा चुनावो के पहले चरण के मतदान के लिए अब महज कुछ घंटे ही बचे हैं लेकिन भाजपा के रणनीतिकारो के माथे पर शिकन बढ़ गयी है. दरअसल यही चरण यूपी की चुनावी हवा का अंदाजा देगा और इसके बाद ही पश्चिम से चलने वाली हवा पूरब तक फैलेगी. लेकिन इस बार इलाके की 73 विधानसभा सीटो की गणित भाजपा के पक्ष में नहीं दिखाई दे रही.

2014 के लोकसभा चुनावो में इस इलाके ने भाजपा का बहुत साथ दिया था. मगर इस बार स्थितियां बदली हुयी हैं. इन बदली परिस्थिति का सबसे बड़ा कारण है जाटो का भाजपा से मोहभंग और मायावती की मुस्लिम रणनीति. ऐसी स्थिति में कोई सियासी पंडित इस बात का अनुमान लगाने को तैयार नहीं है कि चुनाव का ऊंट किस करवट बैठेगा. मगर यह तो तय है कि जाट वोर्तारो की नाराजगी भाजपा को महँगी पड़ सकती है.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट खड़ी करेगा भारतीय जनता पार्टी की खाट जाट बिरादरी एक हुई और सभी खाप के नेताओं ने तय कर लिया है कि वह इस मर्तबा जाट के छोरे के साथ रहेंगे . जिन 71 सीटों पर पहले चरण के लिए कल मतदान होना है उसमे 2012 के विधान सभा चुनाव के दौरान बसपा और सपा को बड़ी कामयाबी मिली थी. राष्ट्रीय लोकदल के चौधरी अजीत सिंह को कुल 9 सीटें मिली थी जिसमें इस बार इजाफा होने के साफ संकेत दिख रहे हैं. बसपा पश्चिम उत्तर प्रदेश में बढ़िया चुनाव लड रही है लेकिन मुस्लिम बहुल सीटों पर समाजवादी पार्टी फिलहाल नंबर 1 बताई जा रही है.

भाजपा के कई दिग्गज नेता इस बार फंसे हुए हैं. कद्दावर नेता चौधरी हुकुम सिंह की बेटी के खिलाफ उनके भतीजे ने ताल ठोक दी है और यहां गुर्जर नेता फस गए हैं. इसी तरह मुजफ्फर नगर दंगो के बाद सुर्ख़ियों में आये संगीत सोम की सीट भी फंसी हुयी है.

पश्चिमी यूपी के 26 जिलों में से 18 जिलों में जाट वोटरों का दबदबा है. इन जिलों में आने वाली 60 सीटे ऐसी हैं जिसपर वे किसी की खाट खड़ी कर सकते हैं. 17 प्रतिशत वोटो की अपनी हिस्सेदारी के साथ जाट इस इलाके का सबसे महत्वपूर्ण कारक बन जाता है.

इन सीटो को प्रभावित करने वाला जाट मतदाता इस बार भाजपा से नाराज होने के साथ साथ प्रायश्चित की मुद्रा में दिखाई दे रहा है. जाटो के संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले धर्मेन्द्र मालिक कहते हैं- "जाट इस बार प्रायश्चित करना चाहता है, उसे किसी कि हार जीत से कोई मतलब नहीं है, जाट इस बात से खफा है कि 2013 के दंगो का दाग उसके माथे पर लगा और उसके बाद भाजपा ने हर समय उसका अपमान किया है. इतिहास में जाट कभी दंगो में शामिल नहीं हुआ था , मगर 2013 में उससे गलती हुयी थी. हरियाणा में भी भाजपा ने जाटो को उपेक्षित कर दिया और उनका दमन किया उसके बाद चौधरी अजीत सिंह को अपमानित किया गया. जाट भावनात्मक रूप से वोटिंग करने के मूड में है , उसे सत्ता में भागीदारी की चिंता नहीं है इस बार उसका रुझान अजीत सिंह की तरफ ही है."

हरियाणा के जाट आन्दोलन के नेता भी फिलहाल पश्चिमी यूपी में डेरा डाले हुए हैं. वे जाट आन्दोलन को जिस तरह से भाजपा सरकार ने कुचला है उससे बहुत नाराज हैं. 35 खाप की पंचायत में भी इस बात का निर्णय लिया जा चूका है कि इस बार भाजपा को इस इलाके में जीतने नहीं देना है. भाजपा को भी स्थिति की गंभीरता का एहसास है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने चौधरी वीरेंदर सिंह जैसे जाट नेता के जरिये डैमेज कंट्रोल के तहत जाट नेताओं के साथ एक मुलाकात की और गन्ने के भुगतान से ले कर कई अन्य बातो पर आश्वासन दिया. मगर इस बैठक में कोई भी बड़ा जाट नेता गया ही नहीं.

अखिल भारतीय जाट संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मालिक ने भी जाटो से भाजपा को वोट न देने की अपील की है. हालाकि भाजपा ने इस इलाके में योगी आदित्यनाथ, संजीव बालियाँन जैसे नेताओं को उतारा और सांप्रदायिक बयानों के जरिये ध्रुवीकरण की कोशिश में भी कोई कमी नहीं रखी है लेकिन जाट नेताओं के फ़िलहाल का रुख तो बदलता नहीं दिखाई दे रहा. जाट यदि इस ध्रुवीकरण में शामिल नहीं होता है तो फिर भाजपा की उम्मीदे धराशायी हो जाएँगी.

दूसरी तरफ कई सीटो को प्रभावित करने की स्थिति में मुस्लिम वोटर है जो फिलहाल सपा –कांग्रेस गठबंधन और बसपा के बीच झूल रहा है. बसपा ने बड़ी संख्या में मुस्लिमो को टिकट दिया है. इलाके में दलित वोटरों की तादात भी काफी है जो बसपा के साथ है. ऐसे में इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि मुस्लिम वोटो का बंटवारा हो. हलाकि अखिलेश यादव से मुस्लिम नाराज नहीं है और कांग्रेस के साथ आने के बाद इस गठबंधन पर मुस्लिम वोटरों का भरोसा भी बढ़ा दिखाई दे रहा है लेकिन फिर भी इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अपने बेस दलित वोट और उम्मीदवारों के दम पर मायावती इस वोट बैंक में सेंध न लगा दें.

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