Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

दागियों और बागियों के साथ पूर्वांचल में होगी योगी के बल की परीक्षा

 Utkarsh Sinha |  2017-02-25 07:21:13.0

दागियों और बागियों के साथ पूर्वांचल में होगी  योगी के बल की परीक्षा


तहलका न्यूज ब्यूरो

लखनऊ : यूपी के चुनावी संग्राम का आखरी दो चरण जिस इलाके में होना है वैसे तो उसे सपा और बसपा का गढ़ माना जाता है ,मगर 19 फरवरी को फतेहपुर में जो 2 लाईनों का जुमला नरेन्द्र मोदी ने उछला था उसने इस इलाके कि सियासी फिज़ा बदलनी शुरू कर दी है. अवध के इलाके से पूर्वांचल की और बढ़ते बढ़ते धार्मिक ध्रुवीकरण अब साफ़ दिखाई देने लगा है. और चुनाव की शुरुआत से पहले पार्टी की अंदरूनी बगावत को पीछे छोड़ते हुए भाजपा अब बहुत मजबूत नजर आने लगी है.

जातीय समीकरणों पर चलने वाले इस इलाके में बाहुबलियों का भी बड़ा प्रभाव है. पूरब के सियासी समीकरण को प्रभावित करने में दागियों का बड़ा रोल रहा है. जरायम की दुनिया में पूर्वांचल के माफिया, पूर्वांचल के बाहुबली आदि नाम से पूरे वर्ष चर्चा में रहने वाले ये दागी चुनाव के वक़्त माननीय बनने के लिए सियासी चर्चा में बने रहते हैं और पूर्वांचल की कुछ सीटों पर सियासी गणित बनाने और बिगाड़ने की क्षमता रखते हैं. इन दागियों के साथ साथ इस बार के बागी भी पूर्वांचल की इन सीटों का समीकरण बिगाड़ सकते हैं. अपनी पार्टियों से बगावत करके छोटे दलों के टिकट से मैदान में ताल ठोंक रहे ये बागी चुनाव जीतने में कामयाब भले ही न हों परन्तु दुसरे का समीकरण जरुर बिगाड़ सकते हैं.

ऐसे में लगता है कि बाकी के चरणों में सियासी पार्टियां वोट कटवा राजनीत से अछोती नहीं रह सकेंगी. पार्टियों को इस बात का एहसास भी है कि पूर्वांचल की कई सीटे ऐसी हैं जहां पर पार्टियों को यह बागी उनके लिए सरदर्द साबित हो सकते हैं. भारतीय जनता पार्टी ने जहां आयातित नेताओं को पूरब के इन क्षेत्रों की कुछ सीटों से उम्मीदवार बनाया तो स्थानीय नेता नाराज होकर छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने को तैयार हैं. गठबंधन के बाद ऐसे मामले में दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी हैं.
इस बार पूर्वांचल के इन्हीं बागियों और बाहुबलियों के चलते पूरब की 11 सीटों पर अपना प्रभाव रखने वाले छोटे दलों की दुकान भी चल पड़ी है. इस बार के विधानसभा चुनाव में इन बागियों का सबसे बड़ा ठिकाना राष्ट्रीय लोक दल है. राष्ट्रीय लोक दल ने लम्बे समय बाद पश्चिमी यूपी से निकल बुंदेलखंड और पूर्वांचल में अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं. पूर्व में भी ये छोटी पार्टियां बाहुबलियों के सियासी ठिकाना रही हैं जिनमें निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल यानी निषाद दल से सपा के मौजूदा विधायक विजय मिश्रा और बसपा से सांसद और विधायक रह चुके धनंजय सिंह इस बार इसी पार्टी से चुनाव मैदान में हैं. इनका नाम पूरब के बाहुबलियों में से गिना जाता है. इस बार पूरब में ऐसे बहुतायत बाहुबली नेता है जिनको तीनों प्रमुख पार्टियां भाजपा, बसपा और सपा ने टिकट नहीं दिया है. ऐसे में इनके लिए यह छोटे दल ही उनके सियासत का ठिकाना साबित हुए हैं.
बाहुबली व पूर्व सांसद उमाकांत यादव के पुत्र दिनेश कांत यादव भाजपा से टिकट ना मिलने पर रालोद के सहारे जौनपुर की शाहगंज सीट से तो वहीं जौनपुर की ही मडियाहूं विधानसभा सीट से माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह कृष्णा पटेल की अगुवाई वाली अपना दल से मैदान में है. वहीं जौनपुर से सटे जिले सुल्तानपुर की इसौली विधानसभा सीट से रालोद के टिकट पर यश भद्र सिंह मैदान में है. यहां से यशभद्र के पिता और उनके बड़े भाई दो-दो बार बसपा और सपा से विधायक रहे. पूरा भद्र परिवार इलाके के दबंगों में गिना जाता है. यही हाल चित्रकूट के मानिकपुर, बलरामपुर के तुलसीपुर और गोंडा सदर का भी है. जहां इन तीनों सीटों पर भाजपा के बागी निर्दल व किसी न किसी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. यह उम्मीदवार खुद के लिए फायदेमंद साबित भले ना हो लेकिन दूसरों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता तो जरूर रखते हैं और शायद अभी तक जीत से आश्वस्त दिख रही भारतीय जनता पार्टी को इसका अंदाजा है और वह गंभीर रूप से इस पर काम कर रही है.
भाजपा ने इन्हीं सब कील कांटों को दुरुस्त करने के लिए आगामी चार चरणों की तैयारी के लिए अपने सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों की टीम को इन क्षेत्रों का अलग-अलग प्रभारी बनाकर मैदान में उतार दिया है. जहां राधामोहन सिंह और अनंत कुमार को गोरखपुर, रामकृपाल यादव को मऊ, डॉ महेश शर्मा को बस्ती, राजीव प्रताप रूडी को इलाहाबाद, संतोष गंगवार को वाराणसी की कमान मिली है. यह सारे भाजपा के केंद्र सरकार में मंत्री हैं तो मध्य प्रदेश से सांसद लक्ष्मीनारायण यादव ललितपुर कैप्टन अभिमन्यु सिंह को आजमगढ़ तथा सुशील कुमार सिंह को सोनभद्र में लगाया गया है.

इस इलाके में भाजपा के दो सांसदों गोरखपुर के फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ तथा बांसगांव सुरक्षित सीट से कमलेश पासवान के कामकाज का हिसाब भी जनता तय करेगी. जहां गोरखपुर और आसपास के करीब 15 विधानसभा सीटों पर जीत के लिए सांसद योगी की प्रतिष्टा दांव पर होगी जहाँ भाजपा ने इस बार योगी के दबाव में टिकट तो बांटे मगर योगी से बगावत कर उनका खुद का बनाया संगठन हिन्दू युवा वाहिनी ही उनके खिलाफ है. सांसद कमलेश पासवान पर अपने छोटे भाई विमलेश पासवान को जिताने का दबाव होगा.

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top