Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

पीएम और सीएम की चुनावी जंग में हाशिये पर गयी आचार सहिंता

 Utkarsh Sinha |  2017-03-06 13:37:03.0

पीएम और सीएम की चुनावी जंग में हाशिये पर गयी आचार सहिंता

तहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ . यूपी के विधानसभा चुनावो में एक तरफ नेता अपने प्रचार में जुटे हैं और मुद्दों से ज्यादा व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप में जुटे हैं मगर इस गहमागहमी के बीच आदर्श आचार संहिता सिर्फ किताबी बाते रह गयी है. इस बार के यूपी के विधान सभा चुनाव में इस चर्चा ने पीएम से ले कर सीएम तक को समेट लिया. उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव के लिए सभी दल अपने चुनावी फायदे के लिए चुनाव आयोग के दिशा निर्देशों को दर किनार करते हुए हर हथकंडा अपनाए हुए है. पार्टी के कर्त्कर्ताओं और छुटभैय्ये नेताओं के अलावा पीएम हों या सीएम सभी इसमें लीन हैं. बसपा सुप्रीमो ने तो सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को दर किनार कर दिया जिसमें उसने कहा था कि जाति और धर्म के आधार पर वोट नहीं मांगे जायेंगे. प्रदेश के चुनाव में इसबार यह विषय चर्चा में इसलिए है कि लगभग शुरू से ही यहाँ का सियासी रण मुख्य रूप से प्रदेश और देश के मुखिया के बीच रहा और दोनों ने आयोग के निर्देशों की धज्जियां उड़ाने में कसर नहीं छोड़ी हैं. फिलहाल मुद्दों को छोड़ बाकी वह सभी काम किये जा रहे हैं जिसमें उनके वोट की फसल काटी जा सके.
शनिवार को प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में थे. बाबा भोले की इस नगरी में प्रधानमन्त्री मोदी बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए निकले तो उनका यह दर्शन का काफिला रोड शो में तब्दील हो गया और इस तरह के रोड शो की कोई भी पूर्व सूचना जिला प्रशासन से नहीं ली गयी थी. इस तरह बतौर सांसद नरेन्द्र मोदी ने कुल सात किलोमीटर का सियासी सफ़र तय कर शहर के कोतवाल कहे जाने वाले बाबा भैरव नाथ और बाबा विश्वनाथ के दर्शन किये. इस बाबत एक सवाल के जवाब में मुख्य चुनाव अधिकारी टी वेंकटेश ने लगभग टालते हुए अंदाज में कहा कि जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गयी है और रिपोर्ट मिलने के बाद उचित कार्यवाही की जायेगी.
इसी तरह सूबे के मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भदोही जिले में अपनी चुनावी जनसभा में कहा था कि 'मैंने सुना है कि वोटरों को पैसा दिया जा रहा है, मेरी आपको सलाह है कि पैसा अपने पास रखिये और वोट साइकिल को दीजिए.
2014 के लोकसभा चुनाव में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने भी ऐसा ही विवादित बयान देते हुए कहा था कि उन्हें इसमें कोई दिक्कत नहीं है कि लोग अन्य दलों की रैलियों में शामिल होने के लिए उन दलों से पैसा लें लेकिन उन्हें वोट 'कमल' को ही देना चाहिए. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी गोवा के मतदाताओं से अन्य दलों से धन स्वीकार करने लेकिन वोट 'आम आदमी पार्टी' को वोट देने की अपील की थी. जिसके लिए उनके खिलाफ FIR दर्ज करने तक का निर्देश
चुनाव आयोग दे चुका है.
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने आयोग तो क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को भी ठंग दिखाया है. देश की सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में जाति व धर्म के आधार पर वोट न मांगने का आदेश सियासी दलों को दिया था लेकिन इसके विपरीत चुनाव के शुरुवात से ही मायावती ने इसको तार-तार करना शुरू कर दिया और चुनाव आयोग मूकदर्शक बन देखता रहा है. मायावती अपने हर भाषण में जाति और धर्म का जिक्र करती सुनी जा सकती हैं.
आचार संहिता लागू होने के साथ ही अपने संवैधानिक अधिकार के तहत चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था के रूप में काम करती है. और उसपर नियम क़ानून के तहत स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का जिम्मा होता है. लेकिन केजरीवाल पर FIR दर्ज करने का आदेश देने वाला चुनाव आयोग उत्तर प्रदेश में पीएम और सीएम की सियासी कुश्ती में पिसता नजर आ रहा है. और तो और उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में भी आयोग फेल नजर आ रहा है.`

Tags:    

Utkarsh Sinha ( 394 )

Tahlka News Contributors help bring you the latest news around you.


  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top