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पटेल और शिवाजी के जिक्र के साथ भाजपा ने शुरू की प्रतीकों की राजनीति

 Utkarsh Sinha |  2017-02-19 14:05:18.0

पटेल और शिवाजी के जिक्र के साथ भाजपा ने शुरू की प्रतीकों की राजनीति

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. जिस वक्त यूपी में तीसरे चरण में मतदान चल रहा था उस वक्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लखनऊ से सवा सौ किलोमीटर दूर फतेहपुर में अपनी चुनावी रैली में जो भाषण दे रहे थे उसमे तीसरे चरण के मतदाताओं के लिए सन्देश भी छिपा था. मोदी ने इस सभा में छत्रपति शिवाजी का नाम भी लिया और सरदार पटेल का भी. फतेहपुर से सटे कानपूर और कानपूर देहात में कुर्मी मतदाताओं की तादात देखते हुए इस सन्देश के मतलब साफ़ समझे जा सकते हैं.

तृतीय चरण की वोटिंग के साथ ही प्रदेश का चुनावी रथ जैसे-जैसे पूरब की तरफ बढ़ रहा है सियासी सरगर्मी में तमाम चर्चाएँ जन्म ले रहीं है. तृतीय चरण में जहां सियासी दलों के कुछ प्रमुख चेहरों की प्रतिष्ठा दांव पर है तो कुछ नाराजो के भितरघात का डर भी खासकर इसी चरण से पार्टियों में है. रविवार को संपन्न हुए तृतीय चरण में जहां बसपा, भाजपा और कांग्रेस को खोने के लिए कुछ नहीं था तो वहीं सपा अपनी साख बचाने की कवायद में दिखी. 2012 के विधानसभा चुनाव में इन 69 सीटों पर सपा 55, बसपा एवं भाजपा को 6 तथा कांग्रेस को 2 सीट मिली थी. फिलहाल कांग्रेस-सपा के साथ गठबंधन करके चुनाव मैदान में है और उसको इसका फायदा मिलता दिख रहा है तो सपा को अपनी साख बचाने की चिंता है. जानकारों की मानें तो इस चरण में भाजपा लाभ की स्थिति में जा सकती है. और बीजेपी इन सीटों के साथ ही साथ अगले चरण बाकी की सीटों पर पार्टी काफी रणनीतिक दृष्टि से आगे बढ़ रही है.

अवध इलाके के रुझानो का असर हमेशा पूरब की सीटो पर पड़ता रहा है. लखनऊ और कानपूर जैसे शहरों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग रहते हैं जिनकी जड़े पूर्वांचल में जमी हैं. इसके साथ ही चुनावो में लगे सुरक्षाबल भी पिछले चरणों की सूचनाये अनचाहे तरीके से ही सही मगर आगे ले जरुर जाते हैं. इसलिए अवध के बाद के इलाकों में ही जिस तरह वोटिंग होती है वही किसी भी दल को बहुमत की ओर ले जाति है.

अगर पिछले चुनावों पर नजर डालें तो इन तीसरे और चौथे चरण की सीटों पर बढ़त बनाने वाली पार्टी ही सत्ता की दावेदार रही है. प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने तीसरे चरण सहित बाकी पूरब की सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए बड़े सलीके से अपनी रणनीति को धार देते हुए पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को एक सन्देश देने की कोशिश कर अपने पाले में लाने की कोशिश की. कांग्रेस पर हमला और सरदार पटेल व क्षत्रपति शिवाजी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि काफी अच्छा होता अगर देश के पहले प्रधानमन्त्री सरदार पटेल होते. ध्यान रहे अब आने वाले चरणों में क्षत्रिय और पिछड़े मतदाता अच्छी तादात में हैं और वे पूरब की कई सीटों को प्राभावित करते रहे हैं. और शायद इस वर्ग को अपने पाले में लाने के लिए ही भाजपा ने पहले से ही योजना तैयार कर काम करना शुरू कर दिया था. और इसी रणनीति के तहत भाजपा ने अपना दल और भासपा से समझौता करके पूरब की इन सीटों पर कई पिछड़े वर्ग के प्रत्याशी मैदान में उतारे. इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा सरदार पटेल की सबसे बड़ी लौह प्रतिमा बनवाने को एक आन्दोलन के रूप में प्रचारित कर घर-घर से लोहा इकट्ठा करना भी इस योजना का एक अहम हिस्सा था .

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