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मंत्रियों के वादे 2 हजार केवल 552 का बेड़ा पार, बाकी लटका रहे सरकार

 Anurag Tiwari |  2017-02-07 00:21:19.0

मंत्रियों के वादे 2 हजार केवल 552 का बेड़ा पार, बाकी लटका रहे सरकार

तहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली .
चुनावी वादे है वादों का क्या, सवाल उठा वादा कर दिया फिर भूल गए. लगभग हर राजनैतिक दल का यही हाल है. केंद्र में सत्ता पर काबिज एनडीए सरकार का हाल भी सुन लीजिए. सवाल उठे तो संसद में वादा कर दिया फिर आदतन भूल गए.

बेटे दो साल में मोदी सरकार के मंत्रियों ने संसद में किए गए वादों में से 70% से अधिक पूरे ही नहीं किए हैं. ज्यादातर अभी भी पेंडिंग स्टेटस में हैं. इन मंत्रियों ने पिछले दो साल में किए गए वादों में से केवल 29% वादों को पूरा किया है. साथ ही कई वादे और आश्वासन ऐसे भी थे जिनकी फाइल दोबारा खोलने की जहमत ही नही उठाई गई. अधूरे वादों में उनकी लिस्ट सबसे लंबी है.

सरकार के मंत्रियों की जबानी जमा खर्ची की पोल तब खुली जब बीते रविवार को संसद में मंत्रियों द्वारा किए गए वादों की एक ऑफिसियल रिपोर्ट सामने आई. इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि साल 2015 और 2016 के दौरान में केंद्रीय मंत्रियों ने कुल 1877आश्वासन संसद में दिए, इनमे से महज 552 पर ही पूरे हुए, जबकि 893 वादे पेंडिंग और 392 की फाइल खोलने की नौबत नहीं आई. व्यक्तिगत आश्वासन का तो कोई पुरसाहाल नही.


रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि संसद में किए गए वादों को वादा पूरा करने की जिम्मेदारी के लिए मंत्रालय की लंबी-चौड़ी फौज के साथ लोकसभा में 15 सदस्यों की स्थायी निगरानी समिति का भी है. यह समिति संबंधित मंत्रालयों के अधिकारीयों को तलब भी कर सकती है. इन हजारों की संख्या में कर्मचारियों के रहते हुए भी सैकड़ों वादे अधूरे पड़े हैं.

संसद के नियमों के अनुसार किसी सवाल के जवाब में जब मंत्री कोई भी वादा करते हैं तो हर वादे को आगे बढ़ाने के साथ ही संबंधित मंत्रालय को सुनिश्चित करना होता है कि जिस दिन सुझाव दिया गया है उस तारीख से वादा तीन महीने के भीतर ही पूरा हो जाए.

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