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चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस, बाहरी नेताओं का रहा है जलवा यूपी की सियासत में

 Anurag Tiwari |  2017-02-18 07:29:33.0

चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस, बाहरी नेताओं का रहा है जलवा यूपी की सियासत में

अनुराग तिवारी

लखनऊ.
उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों में अब मुद्दा यूपी के लड़के और बाहरी नरेन्द्र मोदी तक पहुंचा गया है. जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने को यूपी का गोद लिया बेटा बता रहे हैं, वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन उनके ऊपर हमलावर बना हुआ है. शुक्रवार को रायबरेली में प्रियंका गांधी ने भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर बड़ा हमला करते हुए कह दिया कि यूपी को किसी बाहरी नेता की जरुरत नहीं हैं. लेकिन इतिहास देखें तो यूपी आकर बाहर के नेताओं ने बेहतर प्रदर्शन किया है.

इससे पहले भी साल 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री के वाराणसी से चुनाव लड़ने पर यही मुद्दा उछला था. उस समय तो स्थिति दिलचस्प थी कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों के ही तत्कालीन यूपी चुनाव प्रभारी भी मूलतः गुजरात के रहने वाले थे. जहां एक तरफ कांग्रेस से गुजराती मधुसूदन मिस्त्री चुनाव प्रभारी थे तो बीजेपी की तरफ से भी गुजराती अमित शाह कमान सम्भाल हुए थे. उस समय बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए यूपी से 73 सांसदों को यूपी से लोकसभा में भेजा था.


पूर्व के राजनैतिक घटनाक्रम को देखा जाए तो बाहर से यूपी आए नेताओं में नरेन्द्र मोदी, अटल बिहारी बाजपेयी, सुचेता कृपलानी, मोहम्मद अजहरुद्दीन, सरस्वती अम्माल, जयाप्रदा, मीरा कुमार और उमा भरती प्रमुख हैं.


यूपी की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी जो कि पंजाब के अम्बाला से थीं, उन्होंने बस्ती जिले की मेंहदावल सीट से विधायकी का चुनाव लड़ा. इसके बाद वह गोंडा से बतौर सांसद चुनी गई. सुचेता कृपलानी यूपी आने से पहले दिल्ली से लोकसभा सदस्य थी.


गुजरात राज्य के तीन बार मुख्यमंत्री रहे नरेन्द्र मोदी पर कई तरह के आरोप लगे. जब बीजेपी ने उन्हें बतौर प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया गया तो उन्होंने अपने लिए वाराणसी लोकसभा सीट चुनी. नरेन्द्र मोदी को वहां टक्कर देने के लिए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविन्द केजरीवाल भी पहुंचे थे. उस समय भी नरेन्द्र मोदी के ऊपर बाहरी होने के मुद्दे को लेकर राजनैतिक हमले किये गए गए. चुनावों में उनकी जीत ऐतिहासिक रही.



भारत के पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने जब वर्ष 1984 लोकसभा चुनावों में गृह प्रदेश मध्य प्रदेश के ग्वालियर में चुनाव हार गए तो उन्होंने एक बार फिर यूपी का रुख किया और प्रधानमंत्री पद तक का सफ़र तय किया. इससे पहले 1957 में उन्होंने जनसंघ के टिकट पर तीन लोकसभा क्षेत्रों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ा था. लखनऊ और मथुरा से वह चुनाव हार गए, लेकिन बलरामपुर से चुनाव जीत जीतकर लोकसभा पहुंचे.



जब क्रिकेटर और भारतीय टीम के पूर्व कप्ताम मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने सियासत की तरफ रुख ल्किया तो उन्होंने अपने जीवन का पहला चुनाव यूपी के मुरादाबाद से ही लोकसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस की सांसद बने.



पूर्व प्रधानमंत्री जगजीवन राम की पुत्री और लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने एक बार यूपी से चुनाव लड़ा और फिर अपने गृह राज्य बिहार वापस चली गईं. उन्होंने अपने सियासी जीवन की शुरुआत उत्तर प्रदेश से की थी. वे विदेश सेवा में थीं और रिटायरमेंट के बाद कांग्रेस के टिकट पर 1985 में पहला चुनाव बिजनौर से जीता था. यह उपचुनाव था. इसके बाद वे उन्होंने अपनी जन्मभूमि बिहार को ही अपनी कर्मभूमि बनाया.




वर्ष 2012 के विधान सभा चुनावों में जब प्रदेश बीजेपी के पास कोई चेहरा नहीं था तो बीजेपी ने मध्य प्रदेश की बीजेपी नेता उमा भारती को अघोषित तौर पर अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार मानते हुए विधान सभा चुनावों की जंग लड़ी. उमा भारती मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री हैं और वर्तमान में झांसी से लोकसभा सांसद हैं और इससे पहले वे महोबा की चरखारी सीट से विधायक थीं. भाजपा छोड़ने के बाद जब उनकी वापसी हुई तो विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में भाजपा में नई जान फूंकने की जिम्मेदारी सौंपी गई.



हेमा मालिनी हिन्दी फ़िल्म जगत की प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं. इन्होंने अपने फ़िल्म कैरियर की शुरुआत राज कपूर के साथ फ़िल्म सपनों का सौदागर से की थी. उन्होंने 1981 में अभिनेता धर्मेन्द्र से विवाह किया था. ये अब भी फ़िल्मों में सक्रिय हैं. हेमा बीजेपी के सहयोग से पहले राज्यसभा पहुंची. हेमा मालिनी मूलतः तमिलनाडु की रहने वाली हैं. पिछले लोकसभा चुनावों में वे यूपी की मथुरा सीट से लोकसभा पहुँचीं.



फिल्म स्टार जयाप्रदा और जया बच्चन ने भी देश की संसद तक पहुँचने के लिए यूपी की जमीन को चुना. जयाप्रदा रामपुर से दूसरी बार सांसद चुनी गयीं हैं तो जया बच्चन यूपी से राज्यसभा की सदस्य हैं. सपा से बाहर होने के बाद भी जयाप्रदा अपने राजनैतिक गुरु अमर सिंह की पार्टी लोकमंच के जरिये यूपी में अपनी सक्रियता समय समय पर दिखाती रहती हैं. जयाप्रदा 2004 में पहली बार यूपी में रामपुर से सांसद चुनी गईं थीं. उससे तेलगुदेशम पार्टी से लोकसभा और राज्यसभा सदस्य रहीं. वहीँ सपा से राज्यसभा सदस्य जया बच्चन सपा की पूर्ववर्ती सरकार में फिल्म निर्माण बोर्ड की अध्यक्ष थीं और उन्हें राज्य में कैबिनेट मंत्री का दर्जा हासिल था.



इसी तरह प्रदेश में कांग्रेस के शासनकाल के दौरान केरल की दो बहनें सरस्वती अम्माल और अलमेलु अम्माल राजनैतिक रूप से सक्रिय हुईं और. सरस्वती अम्माल नारायण दत्त तिवारी के मंत्रिमंडल में उपमंत्री भी रहीं. वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सदस्या रहीं. उनकी बहन अलमेलु अम्माल बस्ती के सदर सीट से 1984 और 1989 में दो बार विधायक बनीं.


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