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वह जयललिता की उत्तराधिकारी तो बनीं मगर सीएम के रूप में नहीं

 shabahat |  2017-02-15 17:40:45.0

वह जयललिता की उत्तराधिकारी तो बनीं मगर सीएम के रूप में नहीं


शशिकला को सीएम की कुर्सी के बजाय मिली कैदी नम्बर 9435 की पहचान

बेंगलुरु, इंसान का वक्त कितनी तेज़ी से बदलता है इसका अंदाजा कई बार खुद उसे भी नहीं होता है. तमिलनाडू की मुख्यमंत्री जयललिता की अचानक हुई मौत के बाद जिस तरह से उनके उत्तराधिकारी के रूप में शशिकला का नाम उभरा था उसमें तो वह बहुत तेज़ी से सूबे के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाली सीढ़ियाँ चढ़ रही थीं. सूबे के गवर्नर को भी यह सूचना पहुँच चुकी थी कि शशिकला शपथ लेने आने वाली हैं. लेकिन नियति ने उनके लिये मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं बल्कि सेन्ट्रल जेल में कैदी नम्बर 9435 तय कर रखा था.

भ्रष्टाचार कर आय से अधिक सम्पत्ति जुटाने के जिस इल्जाम में जयललिता ने जेल काटी थी ठीक उसी इल्जाम में शशिकला भी आज बेंगलुरु की सेन्ट्रल जेल पहुँच गईं. वह जयललिता की उत्तराधिकारी तो बनीं लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में नहीं बल्कि जेल के कैदी के रूप में.

शशिकला को अपनी आय से 66 करोड़ रुपये ज्यादा कमाने के इल्जाम में सजा मिली है. कैदी नम्बर 9435 के रूप में वह सामान्य कैदी के रूप में साढ़े तीन साल सीखचों में बिताएंगी और इस दौरान जेल में अगरबत्ती और मोमबत्ती बनाने का काम करेंगी.

शशिकला ने सुप्रीम कोर्ट से आत्मसमर्पण के लिये मोहलत मांगी जो उन्हें नहीं मिली. मोहलत न मिलने पर उन्होंने तमिलनाडू में अपनी पसंद का मुख्यमंत्री का चेहरा चुनकर राज्यपाल को सूचना दे दी और खुद बेंगलुरु की सेशन कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करने पहुँच गईं.

उन्होंने कोर्ट से कुछ रियायतें मांगीं लेकिन कोर्ट ने वह भी ठुकरा दीं. उन्होंने कोर्ट से कहा कि उन्हें जेल में एक अलग सेल दिया जाये जिसमें पलंग और टीवी की व्यवस्था हो, उन्हें हथकड़ी न लगाई जाये, घर का बना खाना मिले, उन्हें जेल में एक सेवक दिया जाये और पीने के लिये मिनरल वाटर दिया जाये. कोर्ट ने कहा कि जेल में आम कैदी की तरह रहना होगा. उन्हें जेल में अपनी सजा के दौरान मोमबत्ती और अगरबत्ती बनाने का काम करना होगा.

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shabahat ( 2177 )

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