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तीसरे चरण में अपने गढ़ में लड़ेंगे अखिलेश , होगा संघर्ष का इम्तिहान

 Utkarsh Sinha |  2017-02-18 13:12:33.0

तीसरे चरण में अपने गढ़ में लड़ेंगे अखिलेश , होगा संघर्ष का इम्तिहान

तहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के जाट लैंड और रूहेलखंड के बाद यूपी विधानसभा चुनावो के तीसरे चरण के वोट रविवार को डाले जायेंगे. ये वो इलाका है जिसे समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है. बीते विधानसभा चुनावो में 12 जिलों की इन 69 सीटों में से 55 समाजवादी पार्टी के पास थी. इलाके में कई ऐसी सीटें हैं जहाँ यादव बिरादरी का दबदबा है और यह देखने वाली बात रहेगी कि समाजवादी संग्राम के बाद यादव मतदाताओं का रुझान अखिलेश यादव की तरफ कितना है. मैनपुरी, इटावा और कन्नौज जिले सपा के गढ़ माने जाते हैं और सैफई परिवार के कब्जे वाले भी.

तृतीय चरण के इन 12 जिलों में से आधे में रहने वाला लगभग हर यादव मतदाता इस परिवार को अपना नेता मानता रहा है. लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव की स्थितियां कुछ और थीं और लोग समाजवादी पार्टी के इस कुनबे के मुखिया मुलायम सिंह यादव के चेहरे और नेतृत्व पर लोग वोट करते थे. परन्तु आज सियासी परिस्थितियाँ कुछ और हैं जहां यह सियासी परिवार दो हिस्सों में बंटा हुआ है और मुलायम सिंह यादव लगभग नेपथ्य में चले गए हैं. ऐसे में इन बदली परिस्थितियों में यहाँ का मतदाता किसके साथ होगा ये देखने वाली बात होगी.
पिछले कुछ महीनों से देश की सबसे बड़ी इस सियासी फेमिली में चल रहा सियासी ड्रामा कमोबेश अभी भी बदस्तूर जारी है. परिवार के सदस्यों के बयानों पर नजर डालें तो समाजवादी पार्टी और परिवार दो खेमों में अभी भी बंटा हुआ है. हालांकि प्रत्यक्ष रूप से दोनों धड़े आपस में सबकुछ सामान्य होने की बात करते हैं परन्तु मौका मिलने पर एक दूसरे पर आरोप लगाने से भी नहीं चूकते. ऐसी स्थिति में यहां के मतदाताओं के सामने जहां दुविधा की स्थिति होगी, वहीं इस संग्राम से उभरे दोनों केंद्र अर्थात चाचा (शिवपाल) और भतीजा (अखिलेश) दोनों की प्रतिष्ठा भी दांव पर है.
तृतीय चरण में राजधानी लखनऊ सहित कुल 12 जिलों में मतदान होना है जिसमें लगभग आधा दर्जन जनपदों में सबसे ज्यादा पैठ इसी परिवार की रही है. 2012 के विधानसभा चुनाव में कुल 69 सीटों में से 55 सीटों पर इसी पार्टी का कब्जा रहा है. इन जिलों में इस परिवार के गृह क्षेत्र इटावा की तीनों सीटें सपा के पास, फर्रुखाबाद की चार में से तीन सपा के पास, कन्नौज की सभी सीटों पर सपा, मैनपुरी की सभी सीटों पर सपा, औरैया की तीनों सीटों पर सपा, कानपुर देहात की कुल चार में से तीन पर सपा का कब्जा रहा है. यहाँ के लोग खुद को बड़े फक्र के साथ अपना परिचय इस परिवार से जोडकर देते हैं. आज उन्हीं के सामने यह संकट होगा की वो परिवार की इस लड़ाई में किधर जाएँ.
बीते गुरूवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी मैनपुरी की सभा में चाचा शिवपाल का नाम लिए बगैर कहा कि जिन लोगों ने हमारे और नेता जी के बीच खाई पैदा करने की कोशिश की, उन्हें वोटर सबक सिखायेंगे. इधर कल बाराबंकी की एक सभा में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ उनकी पत्नी व मुलायम के गढ़ों में से एक कन्नौज से सांसद डिम्पल यादव ने परिवार के विवाद पर बोलते हुए कहा कि अखिलेश यादव के खिलाफ साजिश रची गई थी साइकिल चुनाव निशान छिन जाता तो आपके भैया के पास मैं और केवल चाबी ही बचते लेकिन आप लोगों के सहयोग से साइकिल सिंबल हमें मिला है. इसी दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह के करीबी कहे जाने वाले बेनी प्रसाद वर्मा पर तमाम आरोप लगाए और उनको अपने परिवार के झगडे का जिम्मेदार ठहराया. ऐसे में इस सियासी परिवार के दोनों धडों यानि चाचा और भतीजे को अपने ही गढ़ में खुद को साबित करने का इम्तिहान होगा. हालांकि समाजवादी परिवार के ये दोनों धड़े अपने बीच सब कुछ सामान्य होने और पार्टी को जिताने की बात करते हैं लेकिन जानकारों की मानें तो अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं है और ये पब्लिक है सब जानती है.

स्वामी प्रसाद मौर्या के साथ आने के बाद अति पिछड़ी जातियों का भाजपा के साथ कितना जुडाव हुआ है, इस चरण में यह भी दिखना शुरू हो जायेगा. जमुनापट्टी के बाद के इलाकों में कुर्मी, शक्य, कुशवाहा और कोईरी वोटो का प्रभाव भी इन्ही इलाको से जोर पकड़ता है. इस बार भाजपा की रणनीति खास तौर पर इन जातियों के समीकरण पर टिकी है. दूसरी तरफ बसपा की दावेदारी भी इस इअल्के में जबरदस्त है. ऐसे में तिकोने संघर्ष की स्थिति बन गयी है. हलाकि कुछ ऐसी सीटें भी हैं जहाँ कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आमने सामने आ गए हैं और स्थिति को जटिल बना रहे हैं.

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Utkarsh Sinha ( 394 )

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