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यूपी की जनता को पसंद नहीं है 'चुनावी गठबंधन', कुछ ऐसे रह चुके हैं नतीजे

 Abhishek Tripathi |  2017-02-05 04:42:08.0

यूपी की जनता को पसंद नहीं है चुनावी गठबंधन, कुछ ऐसे रह चुके हैं नतीजे

तहलका न्‍यूज ब्यूरो
लखनऊ. यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच गठबंधन हो चुका है। वहीं, चर्चा है यूपी में चुनाव से पहले किए गए गठबंधन जनता को कुछ ज्‍यादा रास नहीं आते। ऐसे में अखिलेश यादव ने चुनाव से पहले ही कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया है। अब देखना ये है कि यूपी की जनता को ये गठबंधन कितना पसंद आता है। इसी क्रम में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि यूपी में कब-कब गठबंधन हुए और उसका नतीजा क्‍या सामने आया...

वर्ष 1993 में पहला गठबंधन
इस साल यूपी में राममंदिर की हवा थी। ऐसे में बीजेपी को करारी शिकस्‍त देने के लिए सपा और बसपा ने गठबंधन कर लिया। मुलायम सिंह यादव और कांशीराम ने इस गठबंधन की आधारशिला रखी थी। हालांकि, गठबंधन सफल रहा और सपा-बसपा ने मिलकर सरकार बनाई। वहीं, दो साल बाद वर्ष 1995 में 'गेस्‍ट हाउस कांड' हुआ और गठबंधन टूट गया। इसके बाद बसपा ने बीजेपी के साथ गठबंधन कर यूपी में सरकार बनाई।

वर्ष 1996 में हुआ दूसरा गठबंधन
गेस्‍ट हाउस कांड से आहत मायावती सपा से बुरी तरह नाराज थीं। ऐसे में बसपा ने इस साल कांग्रेस के साथ गठबंधन किया, लेकिन यूपी की जनता को ये गठबंधन रास नहीं आया और कांग्रेस को महज 33 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। वहीं, बसपा ने भी चालाकी दिखाते हुए कांग्रेस को किनारे कर दिया और बीजेपी के साथ मिलकर एक बार फिर सरकार बना ली। कांग्रेस इस चुनाव के बाद बुरी तरह से टूट गई थी।

वर्ष 2012 में हुआ तीसरा गठबंधन
यूपी की सत्‍ता पाने के लिए एक बार फिर से गठबंधन की कवायद की गई। इस बार कांग्रेस और रालोद के बाद गठबंधन हुआ, लेकिन फायदा दोनों को नहीं मिला। जनता ने एक सिर से इस गठबंधन को नकार दिया और कांग्रेस को महज 28 सीटें और रालोद को सिर्फ 9 सीटें ही मिलीं।

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Abhishek Tripathi ( 2165 )

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