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गठबंधन की कीमत पर क्या कुर्बान हो जायेंगे गायत्री

 shabahat |  2017-02-02 12:19:20.0

गठबंधन की कीमत पर क्या कुर्बान हो जायेंगे गायत्री


तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी गायत्री प्रजापति को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गठबंधन की वेदी पर कुर्बान कर दिया. विवाद और गायत्री प्रजापति का चोली-दामन का साथ रहा है. तमाम विवादों के बावजूद उनका बाल भी बांका नहीं होता क्योंकि उनके सर पर मुलायम सिंह का हाथ रहता है. गायत्री अखिलेश सरकार के अकेले मंत्री हैं जिन्होंने सरकार के एक ही कार्यकाल में चार बार शपथ ग्रहण की. उन्हें जब-जब बर्खास्त किया गया तब-तब मुलायम उनके लिये ढाल बनकर खड़े हो गये लेकिन इस बार कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिये गायत्री की कुर्बानी ज़रूरी हो गयी. गायत्री अमेठी से लड़ेंगे या नहीं लड़ेंगे यह अब मुलायम सिंह यादव के रुख पर निर्भर करेगा.

गायत्री प्रजापति अमेठी सीट से काफी दिनों से तैयारी कर रहे थे. अभी हाल में चार हज़ार साड़ियों से भरा ट्रक पकड़ा गया था. ट्रक पर रखी साड़ियाँ अमेठी में बांटने के लिये ले जाई जा रही थीं. साड़ियों का बिल गायत्री प्रजापति के नाम पर था. यह मामला निर्वाचन आयोग के संज्ञान में है. गायत्री प्रजापति की तरफ से सायकिलें बांटने की चर्चा भी चली थी.

अखिलेश सरकार के मंत्री गायत्री लगातार चर्चा में बने रहे हैं. खनन मामले में भी गायत्री निशाने पर रहे हैं अखिलेश यादव ने अपनी सरकार की छवि के नाम पर जब गायत्री प्रजापति को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया तब मुलायम की सिफारिश पर उनकी फिर वापसी हो गई.

टिकट वितरण पर जब संग्राम चल रहा था तब भी गायत्री को टिकट मिलेगा या नहीं मिलेगा पर संशय बना हुआ था लेकिन अंत में अखिलेश की लिस्ट में गायत्री का भी नाम था. आज सुबह प्रशांत किशोर और अखिलेश यादव की मुलाक़ात के बाद यह मुद्दा बड़े जोरशोर से उठा कि अमेठी और रायबरेली की दस सीटों में से आठ पर कांग्रेस और दो पर समाजवादी पार्टी लड़ेगी. यह भी बताया गया कि समाजवादी पार्टी गायत्री प्रजापति और मनोज पाण्डेय दोनों का टिकट काट सकती है और इन दोनों सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे.

अब मुद्दा यह है कि पहली बात तो यह है की यह मनोज पाण्डेय और गायत्री प्रजापति दोनों ही इन सीटों के मौजूदा विधायक हैं. दूसरी बात यह है कि गायत्री मुलायम सिंह यादव के बहुत अज़ीज़ हैं और मनोज पाण्डेय अखिलेश यादव के बहुत अज़ीज़ हैं. कल अखिलेश और राहुल गांधी का एक साथ रोड शो है. इस रोड शो से पहले मनोज पाण्डेय और गायत्री प्रजापति को अभयदान मिल जाने का रास्ता बन जाने की उम्मीद भी लगाई जा रही है.

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन में यूपी की कई सीटों पर पेंच फंसा हुआ है.चुनाव की उल्टी गिनती चल रही है. ऐसे में दोनों दलों को जल्दी से जल्दी स्थितियों को ठीक करना होगा. लखनऊ मध्य में समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक रविदास मेहरोत्रा की सीट पर भी कांग्रेस के मारूफ खान ने नामांकन किया है. रविदास ज़मीनी नेता हैं और लखनऊ की राजनीति में रविदास के संघर्ष का अपना इतिहास है. रविदास अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं.

गायत्री प्रजापति की सीट से कांग्रेस डॉ. संजय सिंह की पत्नी अमिता सिंह को मैदान में उतारना चाहती है. इस सीट से संजय सिंह की पहली पत्नी गरिमा सिंह भाजपा के टिकट पर पहले से मैदान में हैं. कांग्रेस इस सीट पर हाथ आजमा का मुकाबले को दिलचस्प बनाना चाहती है लेकिन गायत्री को मैदान से हटाना भी आसान नहीं होगा क्योंकि मुलायम पहले ही गठबंधन से खफा हैं. कल ही उन्होंने गठबंधन के पक्ष में प्रचार की हामी भरी है. ऐसे में मुलायम को फिर नाराज़ करना गठबंधन के लिए भी अच्छा नहीं होगा.

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