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खुलासा: 'विकास' के साथ 'गबन' भी हुआ है, जानिए अखिलेश के खिलाफ क्या होगा BJP का मास्टर स्ट्रोक

 shabahat |  2017-01-18 12:21:26.0

खुलासा: विकास के साथ गबन भी हुआ है, जानिए अखिलेश के खिलाफ क्या होगा BJP का मास्टर स्ट्रोक


शबाहत हुसैन विजेता

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की विधानसभा में काबिज़ होने के लिए सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी गोटियाँ बिछाने में लगे हैं. समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के दौरान भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने यह मान लिया था कि जीत खुद चलकर उनके दरवाज़े पर आ रही है लेकिन अब जब समाजवादी पार्टी का विवाद थम चुका है और खुद मुलायम सिंह यादव ने यह एलान कर दिया है कि वह समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों को चुनौती नहीं देंगे तब भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी के विकास के दावों की परतें खोलते हुए उन दावों को गलत ठहरा कर अपनी पार्टी के नारे सबका साथ-सबका विकास को प्रचारित करने का फैसला किया है. भारतीय जनता पार्टी ने अपनी इस तैयारी को ई-मेल के ज़रिये उन नेताओं को भेजा है जो पार्टी का थिंक टैंक माने जाते हैं
. tahlkanews.com
के पास उस ई-मेल की कापी है.

भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रत्याशियों के पक्ष में मैदान में उतरने से पहले अखिलेश सरकार के विकास की खामियां खोजने और साफ़-सुथरी छवि बनाने वाली सरकार को भ्रष्ट साबित करने का फैसला किया है. भारतीय जनता पार्टी ने अब तक इस दिशा में जो तैयारियां की हैं आज हम उसे विस्तार से tahlkanews.com के पाठकों को बताएँगे. भारतीय जनता पार्टी के इस मास्टर स्ट्रोक में सबसे ख़ास बात यह है कि अखिलेश और रामगोपाल को निशाने पर लिया गया है जबकि मुलायम सिंह यादव और शिवपाल को टच भी नहीं किया गया है.

भाजपा को लखनऊ में चल रही परियोजनाओं मेट्रो, सीजी सिटी, जनेश्वर मिश्र पार्क और गोमतीनगर के जे.पी.सेंटर में कोई घोटाला तो नहीं मिला लेकिन इनके बारे में भाजपा का कहना है कि अखिलेश यादव की सरकार शायद लखनऊ के विकास को ही यूपी का विकास मानती है. भाजपा ने कहा है कि लखनऊ में जितने भी विकास कार्य हुए हैं उनके निर्माण का ठेका उन्हीं चर्चित राज्यसभा सांसद की कंपनी को दिया गया है जिन्हें गवर्नर ने एमएलसी बनाने से इनकार कर दिया था.

भाजपा ने कहा है कि लखनऊ में कई परियोजनाओं पर बेहिसाब धन पानी की तरह बहाया गया. जनेश्वर मिश्र पार्क के बाहर लगी एक लाईट की कीमत एक लाख 42 हज़ार रुपये है. इसी तरह 20 किलोमीटर गोमती रिवर फ्रंट के सौन्दर्यीकरण के नाम पर 3000 करोड़ रुपये खर्च किये गये. जबकि इतनी लागत में तो पूरे प्रदेश की लम्बाई में एक पक्की नहर बनाई जा सकती थी. इसी तरह से जे.पी. सेंटर के शुरू होने से लेकर अब तक उसकी लागत तीन गुना हो गई है.

भाजपा ने तय किया है कि वह अपनी चुनावी सभाओं में यह आरोप लगाएगी कि समाजवादी पार्टी ने छात्राओं को दी जाने वाली छात्रवृत्ति, साइकिलें और विवाह सहायता राशि को अपना वोट बैंक देखकर भेदभावपूर्ण तरीके से वितरित किया. इसी तरह से बसपा की तो सभी परियोजनाएं अपने वोट बैंक को ध्यान में रखकर संचालित की जाती हैं.

भाजपा अपने उम्मीदवारों के पक्ष में होने वाली सभाओं में बतायेगी कि सपा की सरकार आती है तो वह जनेश्वर मिश्र और लोहिया की स्मृति में पार्क बनवाती है तो बसपा की सरकार में इन पार्कों के नाम अम्बेडकर और कांशीराम के नाम पर बदल जाते हैं. बसपा की सरकार में सपा के करीबी अधिकारियों और कर्मचारियों का उत्पीड़न और ट्रांसफर शुरू हो जाता है जबकि भाजपा सबका साथ-सबका विकास करने वाली पार्टी है. भाजपा ने बगैर किसी भेदभाव के उज्ज्वला और जनधन योजना चलाई और इसका हर वर्ग को बराबर से फायदा हुआ. हमने कभी मेरा वोट तेरा वोट कहकर समाज को नहीं बांटा.

भाजपा जनता को बतायेगी कि सपा और बसपा दोनों ने समाज को बांटने का काम किया है. यह दोनों पार्टियाँ किसानों की बात तो करती हैं लेकिन साथ उनका देती हैं जो किसानों का उत्पीड़न करते हैं. यह दोनों सरकारें किसानों को गन्ना मूल्य के बकाये का भुगतान तो नहीं करतीं लेकिन उनका पूरा ध्यान चीनी मिलों के भुगतान पर रहता है.

भाजपा जनता को यह भी बतायेगी कि समाजवादी पार्टी इस वादे के साथ सत्ता में आयी थी कि उसकी सरकार बनेगी तो बसपा शासन में हुए भ्रष्टाचार की जांच करायेगी लेकिन जब वह सत्ता में आयी तो बसपा शासन में प्रमुख पदों पर तैनात रहने वाले वरिष्ठ अधिकारी सपा की सरकार में भी महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां पा गए. न्यायालय से भ्रष्टाचार की सज़ा पा चुका एक अधिकारी समाजवादी पार्टी की सरकार में 3-4 साल तक अधिकारियों को नियुक्त करने की ज़िम्मेदारी संभाले रहा, हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उस अधिकारी को हटाया गया.

भाजपा ने समाजवादी सरकार को बिजली उत्पादन के क्षेत्र में भी कटघरे में खड़ा करने का फैसला किया है. भाजपा जनता को बतायेगी कि बिजली उत्पादन के क्षेत्र में पावर परचेज एग्रीमेंट के मामले में हज़ारों करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया लेकिन 50 फीसदी मामलों में बिजली का उत्पादन भी शुरू नहीं हो पाया.

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