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थमी आसमानी गडगडाहट, 36 दिनों में नेताओं ने नाप दी इतनी दूरी !

 Utkarsh Sinha |  2017-03-09 08:04:48.0

थमी आसमानी गडगडाहट, 36 दिनों में नेताओं ने नाप दी इतनी दूरी !

तहलका न्यूज ब्यूरो

लखनऊ. यूपी विधान सभा के लिए लम्बे चले प्रचार अभियान के बाद अब सारे खेम सांस रोक कर 11 मार्च का इंतजार कर रहे हैं. इस चुनावी रण में जहाँ जमीन पर रैलियों और रोड शो में लाऊडस्पीकर्स का शोर रहा वही यूपी का असमान हेलिकाप्टरो और छोटे जहाजों के शोर से सराबोर रहा. भाजपा से ले कर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बसपा और राष्ट्रीय लोकदल के नेताओं की ताबड़तोड़ चुनावी सभाओं में मुख्य भूमिका निभाने वाले ये उड़नखटोले भी अब अपने अपने ठिकानो पर आराम कर रहे हैं.

उड़नखटोलो का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भाजपा ने किया. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्या तो चुनावी अधिसूचना जारी होने के काफी पहले से ही परिवर्तन रैलियों और पिछड़ा वर्ग सम्मेलनों के लिए दिन रात एक कर रहे थे. 4 फरवरी से शुरू हुए नरेंद्र मोदी के दौरों ने इस अभियान को और तेज कर दिया. नरेन्द्र मोदी ने इस बार यूपी में कुल 23 चुनावी सभाएं की और कुल 17 जिलो तक अपनी सीधी पहुँच बनायीं. हालाकि नरेन्द्र मोदी ने बिहार चुनावो की तुलना में यूपी में 13 सभाएं कम की. मोदी यूपी को लेकर कितने सतर्क थे इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 8 मार्च को अपने संसदीय क्षेत्र में होने वाली वोटिंग के पहले वे लगातार तीन दिन तक वाराणसी पहुंचे.

मोदी के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी यूपी को खूब मथा. अमित शाह ने पूरे राज्य में 100 चुनावी सभाए की. प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या 150 चुनावी सभा के साथ दूसरे नंबर पर रहे. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी बहुत पीछे नहीं रहे और उन्होंने कुल 90 सभाएं संबोधित की. और भाजपा के नए स्टार बने योगी आदित्यनाथ अपने संसदीय क्षेत्र गोरखपुर में घिरे होने के बावजूद यूपी में 75 सभाए कर गए. भाजपा गठबंधन का प्रमुख चेहरा बन चुकी केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की मांग भी भाजपा प्रत्याशियों ने खूब की और अनुप्रिया का उड़नखटोला भी लगातार आसमानी दूरियां नापता रहा.
पारिवारिक युद्ध से असमय जूझने के बाद समाजवादी पार्टी के नए मुखिया अखिलेश यादव इस चुनावो में अकेले पड गए थे. समाजवादी पार्टी के पर्याय कहे जाने वाले मुलायम सिंह यादव ने कुल चार सभाएं ही की जिसमे शिवपाल और अपर्णा उनके परिवार के ही थे और पारस नाथ यादव उनके पुराने मित्र.2012 के चुनावो में मुलायम सिंह ने 300 चुनावी सभाएँ की थी.

अखिलेश को इस बात का अंदाजा बखूबी था इसलिए उन्होंने पूरा चुनाव अपने ब्रांड तक ही सिमित रखा और अधिसूचना जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश के चुनावी संग्राम में ज़्यादा चुनावी सभाएं करने वाले नेता बने. अखिलेश ने 24 जनवरी को सुल्तानपुर से अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की और उसके बाद के एक महीने से कुछ ज्यादा के समय में ही 221 सभाएं की. अखिलेश यादव का औसत एक दिन में 6 सभाओं का रहा. अखिलेश की पत्नी डिम्पल ने भी अपना धर्म खूब निभाया और अखिलेश यादव के बाद वे सपा की दूसरी बड़ी स्टार कंपेनर बन का उभरी. डिम्पल की मांग भी प्रत्याशियों के बीच खूब रही. डिम्पल यादव ने 33 चुनावी सभाएँ की और वाराणसी के रोड शो में राहुल और अखिलेश के साथ पूरे वक्त रही.

मायावती की पार्टी की तरह ही उसका अभियान भी मायावती के इर्द गिर्द ही सिमटा रहा. पार्टी की एकलौती स्टार कैमेनर रही मायावती ने इस बार 36 दिनों में 52 चुनावी सभाएँ की. मायावती के अलावा नसीमुद्दीन सिदिक्की और सतीश चन्द्र मिश्र ही इसे नेता रहे जो प्रदेश के अलग अलग इलाकों में सक्रिय हुए.

कांग्रेस पार्टी की तरफ से हालाकि प्रियंका गांधी को बड़ा कैम्पेनर माना जा रहा था मगर प्रियंका यूपी के चुनावो में महज एक ही बार दिखी. राहुल गाँधी ने अखिलेश यादव के साथ रोड शो किये और साथ ही साथ 45 जन सभाओं को भी संबोधित किया. लेकिन कांग्रेस की ओर से सबसे ज्यादा सभाएँ प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने की. राज बब्बर ने कुल 65 सभाओं को संबोधित किया तो गुलाम नबी आजाद ने भी 45 चुनावी सभाएँ की.

लेकिन कई बड़े नेताओं और बड़ी पार्टियों की तुलना में राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजीत सिंह ज्यादा सक्रिय दिखाई दिए. अपने सियासी अस्तित्व की लडाई लड़ रहे चौधरी अजीत सिंह ने इस बार अपने प्रत्याशी पशिचिमी यूपी के बाहर भी उतारे थे और अजीत ने प्रचार में भी खुद को पीछे नहीं रोका. अजीत सिंह की सभाओं की संख्या कुल 95 रही

बहरहाल चुनावी मैदान में सबने अपनी ताकत झोंकी है और लम्बे समय बाद यूपी का चुनाव त्रिकोणीय बना है. मतदाताओं पर किसकी बातो का कितना असर हुआ है और किस राजनितिक ब्रांड पर वोटर का भरोसा है इस पर सबकी निगाहें लगी हुयी हैं.

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